सूर्य देव के रथ में क्यों है सात घोड़ें ?

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हमारे हिंदू धर्म में पंचदेव बताए गए हैं जिनकी हमें रोज पूजा करनी चाहिए। भगवान शिव, विष्णु, गणेश, मां दुर्गा और सूर्यदेव। आज हम बात करेंगे सूर्यदेव की। ऐसा माना जाता है कि अगर व्यक्ति रोज भगवान सूर्य की पूजा करता है तो उसकी कुडंली के सारे दोष खत्म हो जाते हैं। पूरे संसार को रोशनी देने वाले सूर्यदेव के रथ पर सात घोड़े दिखाई देते हैं। लेकिन क्या किसी को पता है कि इन सात घोड़ों के पीछे क्या वजह है। तो चलिए जानते हैं आज इस पौराणिक कथा के बारे में-

कहा जाता है कि ये सात घोड़े एक रोशनी को दर्शाते हैं। एक ऐसी रोशनी जो स्वयं सूर्य देवता यानि कि सूरज से ही उत्पन्न होती है। इस बात से तो सब वाकिफ ही होंगे कि सूर्य के प्रकाश में सात विभिन्न रंग की रोशनी पाई जाती है जो इंद्रधनुष का निर्माण करती है। यह रोशनी एक धुर से निकलकर फैलती हुई पूरे आकाश में सात रंगों का भव्य इंद्रधनुष बनाती है। सूर्यदेव के सात घोड़ों को इंद्रधनुष के सात रंगों से जोड़ा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि हम अगर इन घोड़ों को ध्यान से देखें तो हर घोड़े का रंग अलग है। उनका रंग एक-दूसरे से ज़रा भी मेल नहीं खाता।

शास्त्रों में इसका एक और कारण भी बताया गया है कि सूर्य भगवान के रथ को चलाने वाले सात घोड़े स्वयं सूरज की रोशनी का ही प्रतीक हैं। यदि आप किसी मंदिर या पौराणिक गाथा को दर्शाती किसी तस्वीर को देखेंगे तो आपको एक अंतर दिखाई देगा। कई बार सूर्य भगवान के रथ के साथ बनाई गई तस्वीर या मूर्ति में सात अलग-अलग घोड़े बनाए जाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे पौराणिक चीज़ों के बारे में बताया जाता है लेकिन कई बार मूर्तियां इससे थोड़ी अलग भी बनाई जाती हैं। कई बार सूर्य भगवान की मूर्ति में रथ के साथ केवल एक घोड़े पर सात सिर बनाकर मूर्ति बनाई जाती है। इसका यह होता है कि केवल एक शरीर से ही सात अलग-अलग घोड़ों की उत्पत्ति होती है। 
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