सर्वेः कांग्रेस को 140 सीटें मिलने की उम्मीद

नई दिल्ली: केंद्र और राज्यों की भाजपा व गैर कांग्रेसी सरकारों के प्रति लोगों में बढ़ रही निराशा कांग्रेस को उत्साहित करने वाली है। हाल के कुछ सर्वे और चुनावी डाटा के विश्लेषण से 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 140 सीटों पर जीत के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे ही एक सर्वे के आधार पर पार्टी दिल्ली की 7 में से 5 लोकसभा सीटों पर अपनी जीत देख रही है। कांग्रेस का डाटा विश्लेषण प्रकोष्ठ वर्ष 2009 से लेकर 2014 के लोकसभा और हाल के कुछ चुनावों के डाटा का विश्लेषण कर रहा है। इसके साथ ही पार्टी हाल के दिनों में कई राज्यों में आंतरिक सर्वे करवा चुका है।


सूत्रों की मानें तो पार्टी राज्यवार आंतरिक सर्वे हर दो-दो महीने के अंतराल पर करवा रही है। सर्वे के लिए कुछ प्रोफेशनल्स और पार्टी के कार्यकर्ता लगाए गए हैं। वे कुछ सवालों के साथ लोगों से मिलते हैं और उनकी राय जानने की कोशिश करते हैं। ऐसा ही एक सर्वे दो महीने पहले दिल्ली में कराया गया था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सर्वे में कांग्रेस को 7 में से 5 सीटों पर जीत के संकेत मिले हैं।

54 फीसदी लोगों ने कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार के कार्यकाल को याद किया और उसे बेहतर बताया। उनके कार्यों की सराहना की। जबकि राज्य की केजरीवाल सरकार और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज से लोग बहुत संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि कांग्रेस ऐसे किसी भी सर्वे से इनकार कर रही है। कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बड़ा डाटा बैंक जुटाकर उसका विश्लेषण शुरू किया है। डाटा इशारा कर रहे हैं कि कांग्रेस धीरे-धीरे अपना वोट प्रतिशत बढ़ा रही है। यही ट्रेंड बना रहा तो आने वाले चुनाव में पार्टी 140 सीटों तक जा सकती है। 2009 में 206 सीट पर रही कांग्रेस 2014 में 44 पर सिमट गई थी। लेकिन गुजरात समेत बीते कुछ चुनावों और हाल में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वोट प्रतिशत में जिस तरह से इजाफा दिखता है, वह 2019 का ट्रेंड दिखाता है। इसी विशेषण से यह भी पता चलता है कि 2014 में 272 सीट पाने वाली भाजपा उसके बाद हुए तमाम चुनावों में नीचे जाती दिख रही है।

डाटा विशेषक मान रहे हैं कि जो ट्रेंड दिख रहा है, उसके मुताबिक 2019 में भाजपा घट कर 160 सीटों तक सिमट सकती है और कांग्रेस की सीटें बढ़ कर 140 तक पहुंच सकती है। विपक्षी गठबंधन को लेकर भी डाटा का विशेषण अलग ट्रेंड दे रहे हैं। कांग्रेस सीधे एनडीए से मुकाबला करे, तो उसे 120 सीटों तक पहुंचने की संभावना है। कांग्रेस बड़े पार्टनर के तौर पर कुछ दलों के साथ रणनीतिक रूप से गठबंधन करके एनडीए का सामना करे तो भी उसे 120 सीट मिलने की संभावना है और एनडीए के खिलाफ बन रहे विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस एक छोटा पार्टनर रहते हुए चुनाव लड़ती है तो वह अपने वर्तमान स्थिति से भी नीचे जा सकती है।

पिछले दिनों हुए कैराना लोकसभा उपचुनाव के डाटा विशेषण से ऐसे संकेत मिले हैं कि गठबंधन के साथ चुनाव लडऩे से कांग्रेस का 8 फीसदी वोट भाजपा को शिफ्ट हो रहा है। यह वोट अगर विपक्ष के साझा उम्मीदवार को मिलते तो कैराना में हार-जीत का अंतर और बढ़ जाता। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव के भी डाटा विशष से यह संकेत मिले हैं कि कई सीटों पर सपा से गठबंधन के चलते कांग्रेस का वोट भाजपा को शिफ्ट हो गया। डाटा विशेषण के संकेतों को माने तो कांग्रेस को 2019 में बड़े स्तर की बजाए रणनीतिक रूप से गठबंधन करना होगा, ताकि उसका वोट भाजपा को शिफ्ट होने से बचे।

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