नजरिया: सर्जिकल स्ट्राइक और कांग्रेस का दर्द

नेशनल डेस्क (संजीव शर्मा): आखिर भारतीय फौज द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर में  की गयी सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो सामने आ ही गया.  ये वीडियो किसने जारी किया, या कैसे लीक हुआ इसकी कोई अधिकृत जानकारी नहीं है। लेकिन इस वीडियो के जारी होने के बाद  सियासी हलचल बढ़ गयी है। खासकर 2019 के चुनावी रण पर नजऱ गड़ाए कांग्रेस इससे खासी विचलित है। कांग्रेस की बेचैनी इसी से  मापी जा सकती है कि  आधी रात सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो सोशल मीडिया पर आया और अल सुबह  कांग्रेस ने प्रेस कांफ्रेंस में इस मसले पर बीजेपी को घेर लिया।  कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा की बीजेपी सेना के पराक्रम का सियासत के लिए इस्तेमाल कर रही है। यानी स्पष्ट है कि कांग्रेस को वीडियो से ज्यादा इस वजह से बीजेपी को मिलने वाली माइलेज की फिक्र है कि कहीं ये उसका गणित न गड़बड़ा दे। यह काफी दिलचस्प है। हालांकि 2016 में जब सर्जिकल स्ट्राइक पर हो हल्ला मचा था और केजरीवाल ने सबूत मांगे थे तब कांग्रेस ने सरकार के साथ होने का दम भरा था। 


संसद में खुद कांग्रेस अध्यक्ष(तत्कालीन ) सोनिया गांधी ने इस मसले पर सरकार के साथ होने वाला ब्यान दिया था। हालांकि बाद में जब पाकिस्तान ने भी सर्जिकल स्ट्राइक से मना किया  तो वक्त बीतने के साथ साथ कांग्रेस भी दबी जुबान में इसपर सवाल उठाने से नहीं चूकी थी, लेकिन खुले आम वह ऐसा इसलिए नहीं कर पाई क्योंकि उसे  मुद्दे के बूमरैंग होने का डर था। लेकिन जब बीजेपी के अपने ही नेताओं खासकर अरुण शौरी ने इसे फर्जीकल स्ट्राइक का नाम देना शुरू किया तो उस बहाने कांग्रेस ने भी खुलकर तंज कसे थे। बहरहाल आज केजरीवाल इस स्थिति में नहीं है कि केंद्र सरकार से कोई सबूत मांगें। अलबत्ता उनको तो खुद सबूत देना पड़  रहा है की उनकी आम आदमी पार्टी में सब ठीक है।  ऐसे में कांग्रेस ही है जिसे सर्जिकल स्ट्राइक के वीडियो के जारी होने से  ज्यादा  तकलीफ होनी थी। 

भारत में पाकिस्तान और उसकी भारत के खिलाफ चालबाजियां हमेशा से बड़ा मुद्दा रही हैं। यह अकेला मुद्दा जनमानस की बड़ी से बड़ी धारणा को प्रभावित करने और उसके ध्रुवीकरण की ताकत रखता है। वास्तव में यह मंदिर-मस्जिद , हिन्दू-मुस्लमान से भी अधिक धृवीकरणीय शक्ति लिए हुए है। अब जबकि कश्मीर में एक  तय रणनीति के तहत बीजेपी पीडीपी से किनाराकशी कर चुकी है तो उसने इसी मसले को भुनाने का काम किया है। घाटी में ब्लैक कैट कमांडोज की तैनाती ,छत्तीसगढ़  से दो आतंकविरोधी अभियानों के विशेषज्ञ अफसरों की राज्यपाल शासन में नियुक्ति (सर्जिकल स्ट्राइक इंचार्ज जनरल हुड्डा के गवर्नर बनाये जाने के चर्चे भी ) ये सब चीजें साफ करती हैं कि बीजेपी कश्मीर के नाम पर भारत में एक बार फिर से राज करना चाहती है।  लेकिन फिर बड़ा सवाल यह भी है कि अगर बीजेपी कश्मीर में आतंक का खात्मा करती है। 
पाकिस्तानी सेना की नकेल कस सकती है , तो फिर वो ऐसा क्यों न करे?  परमाणु बम तो  कांग्रेस के जमाने से तैयार था , पर परीक्षण तो अटल बिहारी वाजपेयी ने किया। क्यों कांग्रेस नहीं कर पायी? कांग्रेस करती तो  क्या वो ऐसी चीजों का लाभ नहीं उठाती ? कल तक बीजेपी पर कश्मीर में फेल होने के आरोप लगाए जा रहे थे। जवानों की शहादत पर कांग्रेस बीजेपी को कोस रही थी... यह सब भी तो इन स्थितियों का सियासीकरण ही था। तो फिर अब जब सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत सामने आ गया है तो कांग्रेस का दम क्यों घुट रहा है  ? 

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