सुप्रीम कोर्ट ने लगाई SSC 2017 परीक्षा के नतीजे पर रोक

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विभागों और मंत्रालयों के लिये कर्मचारियों के चयन हेतु 2017 में आयोजित परीक्षाओं (एसएससी) कंबाइंड ग्रैजुएट लेवल एग्जामिनेशन 2017 और कंबाइंड सीनियर सेकंड्री लेवल एग्जाम 2017 के रिजल्ट जारी करने पर रोक लगा दी है। रिजल्ट पर रोक लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि  पहली नजर में ऐसा लगता कि परीक्षा की पूरी प्रक्रिया ही दूषित थी।वह किसी को एसएससी एग्जामिनेशन स्कैम का फायदा उठाने और नौकरी हासिल करने की अनुमति नहीं देगा। 

स्टूडेट्स ने की थी सीबीआई जांच की मांग 
गौरतलब है  कि फरवरी में आयोजित एसएससी कंबाइंड ग्रैजुएट लेवल एग्जाम में कई तरह की अनियमितताओं के आरोप लगे थे। छात्रों ने पेपर लीक और परीक्षा में नकल के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी किया था। छात्रों की मांग थी कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाए। छात्रों ने अपनी मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरना दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए सहमति जताई थी, इसके बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी थी। सीबीआई ने पेपर लीक के संबंध में मई में 17 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी जिनमें सिफी टेक्नॉलजी प्राइवेट लिमिटेड के 10 कर्मचारी भी शामिल थे। 
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इससे पहले, पीठ ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो की स्थिति रिपोर्ट का अवलोकन किया जिसमे कर्मचारी चयन आयोग के अनेक अधिकारियों और परीक्षा के प्रश्न पत्र के संरक्षक पर आक्षेप लगाये गये थे। पीठ ने कहा, ‘‘पहली नजर में ऐसा लगता है कि समूची एसएससी प्रणाली ही दूषित है और सारी परीक्षा (2017) दूषित है। यह विश्वास नहीं किया जा सकता कि परीक्षा के प्रश्न का संरक्षक स्वंय ही प्रश्नपत्र लीक कर रहा है।’’ न्यायालय ने एसएससी अधिकारियों के बचाव करने के लिये जांच ब्यूरो की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसीटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी को भी आड़े हाथ लिया।पीठ ने बनर्जी से कहा, ‘‘यह बेहद आश्चर्य की बात है कि आप यह रवैया अपना रहे हैं। आप जांच ब्यूरो की ओर से पेश हो रहे हैं, ऐसे में आपको तो कहना चाहिए था कि परीक्षा रद्द की जानी चाहिए। आपकी स्थिति रिपोर्ट में अनेक व्यक्तियों पर आक्षेप लगाया गया है और आप एक अलग रूख अपना रहे हैं।’’ 

एेसी हुआ पेपर लीक
क्राइम ब्रांच ने एसएससी पेपर लीक से जुड़े केस में कई लोगों को गिरफ्तार भी किया था। गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ में इस बात का खुलासा हुआ कि उसने कैंडिडेट से मोटी रकम लेने के बाद कंप्यूटर पर खास तरह के सॉफ्टवेयर को डाउनलोड किया था। उस सॉफ्टवेयर की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि कैंडिडेट एग्जाम सेंटर पर सिर्फ सिस्टम खोलकर बैठ जाता। वह ऑनलाइन क्वेश्चन के आंसर नहीं देता। उसकी जगह कोई दूसरा व्यक्ति वहां से कहीं दूर बैठकर उसी सिस्टम को अपने कंप्यूटर पर खोलकर पेपर सॉल्व कर रहा होता था। एग्जाम सेंटर पर एग्जाम देने वाले की भूमिका डमी कैंडिडेट की तरह होती थी। इतना ही नहीं, पूछताछ में इसका खुलासा भी हुआ कि जिनसे सेटिंग हो गई थी, उसने उन कैंडिडेट्स की सीट भी बदल दी थी
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लाखों उम्मीदवारों ने लिया था हिस्सा 
याचिकाकर्ता शांतनु कुमार की ओर से वकील प्रशांत भूषण और गोविन्द जी ने आरोप लगाया कि सीबीआई ने अपनी पहली स्थिति रिपोर्ट में ही स्वीकार किया था कि प्रश्न पत्र के संरक्षक ने खुद ही पर्चा लीक किया था। भूषण ने परीक्षा के नतीजे की घोषणा पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुये कहा कि यह एक दो दिन में ही घोषित होने वाला है। सरकार में ‘सी’ और ‘डी’ वर्ग की नौकरियों के लिये होने वाली इस परीक्षा में लाखों अभ्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। 

 

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