सुखबीर बादल की कैप्टन को चेतावनी-कट्टरपंथियों के प्रभाव में आग से न खेलें

जालंधरः पूर्व उपमुख्यमंत्री और अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने मुख्यमंत्री कै. अमरेंद्र सिंह को चेतावनी दी है कि वह राज्य में कट्टरपंथियों को समर्थन देकर आग से खेलने का काम न करें। कांग्रेस द्वारा 20 साल पहले किए गए ऐसे प्रयास के कारण ही पंजाब 15 साल तक आतंकवाद की भट्ठी में जलता रहा था। सुखबीर के साथ पंजाब केसरी के संवाददाता रमनदीप सिंह सोढी ने जस्टिस रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट, विधानसभा में अकाली दल के स्टैंड और रिपोर्ट के बाद सिख संगठनों में अकाली दल के प्रति पाए जा रहे गुस्से के साथ-साथ उनकी जायदाद को लेकर भी सवाल किए। सुखबीर ने सारे सवालों का बेबाकी से उत्तर दिया। पेश है सुखबीर बादल का पूरा इंटरव्यू:-

प्र. : आप कैप्टन अमरेंद्र सिंह पर राजनीति करने के आरोप किस आधार पर लगा रहे हैं?
उ.
: दरअसल कैप्टन अमरेंद्र सिंह और कांग्रेस ने चुनाव से पूर्व लोगों से बड़े-बड़े वायदे किए थे। घर-घर में नौकरी देने के अलावा 51000 रुपए शगुन स्कीम और 2500 रुपए पैंशन देने का वायदा किया गया था। गुटका साहिब की सौगंध खाकर पंजाब को नशा मुक्त करने की बात की गई थी। अब कांग्रेस सारे वायदे पूरे नहीं कर सकी और फेल हो गई है तो ऐसे में जनता का ध्यान बांटने के लिए श्री गुरू ग्रंथ साहिब का राजनीतिक इस्तेमाल करके रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट पर हल्ला करवाया जा रहा है। इस पर सियासत हो रही है। इस मामले में एस.आई.टी. बनाने का मकसद भी राजनीतिक है क्योंकि आने वाले दिनों में जब भी कांग्रेस राजनीतिक रूप से कमजोर होगी तो वह इसी रिपोर्ट के आधार पर अकाली दल पर उंगली उठाएगी। 

प्र. : कांग्रेस का आरोप है कि विधानसभा चुनाव से पूर्व मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए अकाली दल ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करवाई, आपका क्या कहना है?
उ. :
आप यह देखिए कि यह आरोप लगा कौन रहा है। वह कांग्रेस जिसने इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते श्री दरबार साहिब पर टैंकों से हमला करवाया। गोलियों से श्री गुरु ग्रंथ साहिब को छलनी करवाया, कितने सिखों की जानें लीं। वह पार्टी आज उस अकाली दल पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का आरोप लगा रही है, जिसने गुरुद्वारों की महंतों से आजादी के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। हजारों कार्यकर्ताओं की कुर्बानियां दीं। पंजाब के हितों की रक्षा के लिए उनकी पार्टी खड़ी रही। वह पार्टी श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की बात भी कैसे सोच सकती है। मेरे पिता पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पंजाब के हितों के लिए वर्षों तक जेल में रहे। ऐसे में वह इतना घिनौना काम सोच भी नहीं सकते। 

प्र. : यदि अकाली दल सच्चा था तो विधानसभा सत्र के दौरान पार्टी भगौड़ी क्यों हुई?
उ.
: हमने विधानसभा में पीठ नहीं दिखाई। जस्टिस रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट झूठ का पुलिंदा थी। इसका खुलासा हमने एक हफ्ता पहले ही तथ्यों के साथ कर दिया था। जस्टिस रणजीत सिंह आम आदमी पार्टी के विधायक सुखपाल खैहरा के जीजा और कैप्टन के खास दोस्त हैं। कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने चुनाव से पहले ही कमीशन स्थापित करके अकालियों को अंदर करने का बयान दिया था जिससे साफ है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह पहले ही यह तय करके बैठे थे कि बेअदबी अकाली दल ने ही करवाई है। हमने इस पूरे मामले में जस्टिस रणजीत सिंह, सुखपाल सिंह खैहरा, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा व बलजीत सिंह दादूवाल की आपसी बातचीत और बैठकों का ब्यौरा सार्वजनिक कर दिया था। लिहाजा सदन में जाने का सवाल ही नहीं था। 

प्र. क्या आपको लगता है कि आपने बेअदबी के मामले में सदन में हुई बहस का बहिष्कार करके राजनीतिक गलती की है?
उ.
यह फैसला पार्टी की कोर कमेटी का था। अकाली दल की कोर कमेटी में सभी वरिष्ठ नेता हैं और किसी भी मुद्दे पर पार्टी का स्टैंड तय करने का फैसला कोर कमेटी ही लेती है। कोर कमेटी का यह मानना था कि जस्टिस रणजीत सिंह की रिपोर्ट झूठ का पुलिंदा है इसलिए सदन के बहिष्कार का फैसला हुआ। 

प्र. कांग्रेस का कहना है कि अकाली दल के मन में चोर है लिहाजा वह बहस से भागे।
उ.
पहली बात तो अकाली दल किसी से डरता नहीं है। हम तो जेलों से नहीं डरे, इस झूठी रिपोर्ट से क्या डरेंगे। चोर तो इनके मन में है। रिपोर्ट तो इन्होंने फर्जी तरीके से तैयार की है। हम कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से पूरे मामले की जांच करवा लो। हम इस जांच के लिए तैयार हैं। 

प्र. : आपने अपनी सरकार में बेअदबी का मामला सुलझाने के लिए क्या प्रयास किए?
उ.
: यह बहुत बड़ा प्रश्र था। बरगाड़ी के साथ-साथ आसपास के इलाकों के 5 से 6 हजार लोगों के फिंगर प्रिंट लिए गए और उन पोस्टरों पर छपे फिंगर प्रिंट से उनकी मैचिंग करवाई गई, जो पोस्टर डेरा प्रेमियों ने लगाए थे। इस मैचिंग के काम में हमें केंद्र के सहयोग की जरूरत थी। पुणे स्थित लैब में लम्बी वेटिंग लिस्ट चलती है। मेरी पत्नी हरसिमरत कौर बादल ने गृहमंत्री के साथ बात करके समय से फिंगर  प्रिंट की रिपोर्ट ली। उस समय घटनास्थल पर मौजूद करीब 500 पुलिस वालों के पास मौजूद हथियारों और वहां पर चली गोली का रिकार्ड मैच किया गया। करीब अढ़ाई से तीन लाख लोगों के फोन कॉल ट्रैक किए गए। हम इस मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर थे लिहाजा गलती की कोई गुंजाइश नहीं थी। 

प्र. पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के बारे में कहा जाता है कि उनको सड़क पर जाती चींटी की भी जानकारी होती है मगर बरगाड़ी में आक्रोश की सूचना से वह कैसे चूक गए?

उ. इसके लिए पूरे मामले की तह तक जाना पड़ेगा। दरअसल ये 2 मामले हैं। पहला  मामला कोटकपूरा से जुड़ा है। यहां भारी संख्या में संगत जुटी थी और यह मामला शांतिपूर्वक निपट गया था। सारा टकराव बहबलकलां में अचानक हुआ जिसका किसी को अंदाजा तक नहीं था। उस समय भी तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रशासन के साथ सम्पर्क में थे और उन्होंने पुलिस को प्रदर्शकारियों के साथ शांति से पेश आने के आदेश भी दिए थे। 

प्र. गोली चलाने का फैसला सी.एम. का नहीं था लेकिन धरना उठाने का फैसला तो सी.एम. का था। 
उ.
जस्टिस रणजीत सिंह रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने उस समय प्रशासन को आदेश दिए थे कि धरनाकारियों को शांति से बैठने दिया जाए। रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट में डी.जी.पी. सुमेर सिंह सैनी के बयान का भी जिक्र है जिसमें उन्होंने कहा है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री रात 2 बजे तक पूरे घटनाक्रम को लेकर उनसे अपटेड लेते रहे। 

प्र. तो क्या उस समय सुमेध सिंह सैनी ने अपनी मर्जी से गोली चलाई, बतौर गृह मंत्री क्या आपको इसकी जानकारी नहीं थी?
उ.
मैं उस समय पंजाब में नहीं था और मुझे घटना की जानकारी नहीं थी लेकिन मुझे इतना जरूर पता था कि कोटकपूरा से शांतिपूर्वक तरीके से प्रदर्शनकारियों को हटा दिया गया है। उनमें से 500 के करीब प्रदर्शनकारी ही बचे थे लेकिन इनके साथ ही पुलिस का टकराव हो गया था। 

प्र. बेअदबी के दोषियों की पहचान में अकाली दल फेल क्यों हुआ? 
उ.
हमने उस समय तुरंत कार्रवाई की। पूरे मामले की जांच सिख संगठनों की मांग पर सी.बी.आई. को सौंपी गई। इसके बावजूद हमने खुद एस.आई.टी. बनाकर मामले की जांच जारी रखी। उसी एस.आई.टी. के काम की तारीफ मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने खुद की है। एस.आई.टी. की रिपोर्ट में लिखा गया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री घटनाक्रम को लेकर चिमतित थे और उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों को हर हाल में गिरफ्तार करने की बात कही थी। 

प्र. अगर पुलिस ने गोली अपनी मर्जी से चलाई तो आपने बतौर गृहमंत्री क्या एक्शन लिया?
उ.
हमने इस मामले में तुरंत पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया लेकिन कैप्टन अमरेन्द्र सिंह की सरकार आते ही हरजीत गिल और परमजीत पन्नू जैसे उन पुलिस अधिकारियों का नाम एफ.आई.आर. में से निकाल दिया गया जो तृप्त राजिंद्र सिंह बाजवा के चहेते थे। तृप्त राजिंद्र सिंह बाजवा ने खुद लंदन में जाकर कट्टरपंथियों के साथ मुलाकात की और उनके कहने पर ही इन अफसरों के नाम एफ.आई.आर. से निकाले गए।

दरबार साहिब पर टैंक चढ़वाने वाली इंदिरा को ‘इंदिरा जी’ कहकर तलवे चाटते हैं कैप्टन

प्र. कैप्टन ने आपके पिता पर बुजदिल होने का आरोप लगाते हुए कहा कि 1984 के हमले के समय वह भाग गए थे और आपको भी कैलिफोर्निया भेज दिया था। 
उ.  कै. अमरेन्द्र सिंह को शर्म आनी चाहिए। वह उस इंदिरा को इंदिरा जी कहकर बुलाते हैं जिसने दरबार साहिब पर टैंकर चढ़वाए, कै. अमरेन्द्र उसकी चमचागिरी कर रहे हैं। रही बात 1984 की तो जिस दिन दरबार साहिब पर सेना ने हमला किया उस दिन प्रकाश सिंह बादल अमृतसर में नहीं थे। मैं उस समय पंजाब यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र विभाग में एम.ए. कर रहा था। मैं विदेश 1986 में गया हूं। जब 1984 का कत्लेआम हुआ उस समय भी मैं भारत में था और दिल्ली के रास्ते में ही था। कै. अमरेन्द्र सिंह सिरे का झूठा है, इसने पहले भी हम पर 3500 करोड़ रुपए के घपले के आरोप लगाए थे लेकिन साबित कुछ नहीं हुआ। कै. अमरेन्द्र सिंह 20 साल पुरानी आग न लगाएं, उस समय भी ऐसा ही हुआ था।

उस समय कांग्रेस ने अकाली दल को कमजोर करने के लिए एक ग्रुप खड़ा करके उसे ताकत देने की कोशिश की थी। वह ताकत इतनी बढ़ गई कि पंजाब की अमन-शांति भंग हो गई। उस समय कांग्रेस की लगाई आग 15 साल तक नहीं बुझी थी। बरगाड़ी में जो ध्यान सिंह मंड धरने पर बैठा है उसके इतिहास पर भी कै. अमरेन्द्र सिंह को नजर मारनी चाहिए। उसका भाई फिरोजपुर जिले का सबसे बड़ा आतंकी था जिसने न जाने कितने लोगों की जानें लीं। बलजीत सिंह दादूवाल भी सिरे का फ्रॉडिया है। आज कैप्टन के मंत्री इन लोगों से मिले हुए हैं। ये लोग देशद्रोही हैं। जब तक हमारी सरकार थी इन लोगों की हिम्मत नहीं थी कि ये लोग हमारे घर आ जाएं लेकिन कांग्रेस के खडूर साहिब के विधायक रमनजीत सिंह सिक्की न केवल इनके मंच पर जाते हैं बल्कि मंच पर लगाए गए खालिस्तान के नारों का परोक्ष रूप से समर्थन भी करते हैं। 

आई.एस.आई. का एजैंट है दादूवाल, विदेशों से हो रही फंडिंग 

प्र. दादूवाल ने तो आपको चुनौती दी है कि वह उनके साथ मुख्यमंत्री की हुई बैठक के प्रमाण दें। 
उ. दादूवाल तो संत के चोले में ठग है। वह विदेशों से फंड ले रहा है और आई.एस.आई. का एजैंट बना हुआ है और उसे जर्मनी व फ्रांस से 16 करोड़ रुपए की फंडिंग हुई है। उसकी मीटिंग के प्रमाण तो हमने सार्वजनिक कर दिए, दादूवाल की गाड़ी सी.एम. हाऊस गई थी और दादूवाल उस गाड़ी में थे और उनके मोबाइल नम्बर की लोकेशन सी.एम. हाऊस बता रही थी, उनकी गाड़ी को बकायदा फॉलो किया गया है। बाद में वह खुद सफाइयां देते रहे कि वह चंडीगढ़ में न होकर मुक्तसर में थे लेकिन उनकी गाड़ी चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री के घर पर क्या कर रही थी? 

प्र. मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि वह दादूवाल को पहचानते ही नहीं, क्या कहेंगे?
उ.
मैंने तो मुख्यमंत्री और दादूवाल की एक साथ फोटो मीडिया में सार्वजनिक कर दी है। फोन नं. की डिटेल भी सार्वजनिक की गई है, मुख्यमंत्री के पास तमाम तरह के स्रोत हैं और पुलिस है, वह मेरे द्वारा दी गई जानकारी को झुठला सकते हैं तो झुठला दें क्योंकि मेरी जानकारी तथ्यों पर आधारित है। 

प्र. कांग्रेस का आरोप है कि जो आपके खिलाफ जाता है उसे आप आई.एस.आई. का एजैंट बता देते हो। 
उ.
यदि वह आई.एस.आई. का एजैंट नहीं हो तो उसके पास विदेशों से करोड़ों की फंङ्क्षडग क्यों आ रही है, वह कारसेवा का ढोंग करता है। उसके खिलाफ पंजाब पुलिस ने भी विदेशों से पैसा लेने को लेकर मामला दर्ज किया था और अब केन्द्र की एजैंसी, डायरैक्टोरेट ऑफ रैवेन्यू इंटैलीजैंस की नजरें उस पर हैं। वह हर रोज अपने बयान बदलता है। 

प्र. क्या आपने दादूवाल को श्री अकाल तख्त साहिब का जत्थेदार लगवाने की पेशकश की थी?
उ.
यह सरासर झूठ है, ऐसे व्यक्ति को किसी प्रकार का पद देने की पेशकश पाप करने के बराबर है। 

प्र. परंतु यह चर्चा है कि सरबत खालसा के आयोजन से पहले आप और बिक्रम मजीठिया दादूवाल के घर गए थे। 
उ.
न मैं उसके घर गया था और न ही मेरी उसके घर जाने की कोई इच्छा है, मैंने तो उसके खिलाफ पर्चा दर्ज करवाया था। लोग उसकी ठगी से तंग आ चुके थे और हमारे पास इसी ठगी को लेकर दर्जनों शिकायतें आई थीं। 

प्र. कांग्रेस का आरोप है कि अकाली नेताओं पर सिख धर्म को नुक्सान पहुंचाने के लिए संगत का गुस्सा निकल रहा है। आप क्या कहेंगे? 
उ.
दरअसल कांग्रेस का आतंकियों के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर है। अमरीका में जिन लोगों ने मंजीत सिंह जी.के. पर हमला किया है उनका इतिहास सबको पता है। वे विदेश में बैठ कर पंजाब को नुक्सान पहुंचाने का काम करते हैं। मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह की खालिस्तानियों के साथ पुरानी सहानुभूति है और अपने पिछले कार्यकाल के दौरान कनाडा के उस डिक्सी गुरुद्वारे में गए थे जहां से खालिस्तान की मुहिम चलती है और पंजाब में अलगाववाद की आग लगाने वालों में इस गुरुद्वारे के प्रबंधक शामिल हैं। इसी कारण कै. अमरेन्द्र सिंह और उनके नेता ऐसे हमलावरों को शाबाशी दे रहे हैं, कायदे से जी.के. पर हुए हमले की निंदा की जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया और कांग्रेस के नेता इसका राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं। 

हां, मेरे होटल हैं, पी.टी.सी. मेरा है लेकिन सब पारदर्शी है

प्र. : आप पर आरोप है कि सत्ता में रहते हुए आपने ट्रांसपोर्ट, होटल, केबल और रेत के कारोबार से करोड़ों रुपए कमाए?
उ. : पहली बात तो जो मेरा है, वह मेरा है और वह सरेआम है। यह खुली किताब है। मैंने किसी से कुछ नहीं छिपाया। हमारे परिवार की ट्रांसपोर्ट कम्पनी उस वक्त से काम कर रही है, जब पंजाब सांझा था। हमारी ट्रांसपोर्ट 1944 से राज्य के ट्रांसपोर्ट विभाग के पास पंजीकृत है। जब हरियाणा व हिमाचल पंजाब के साथ थे, उस वक्त भी हमारी कम्पनी का हैड आफिस सिरसा में हुआ करता था। जब हरियाणा अलग हुआ तो वहां ट्रांसपोर्ट सैक्टर को नैशनलाइज कर दिया गया और प्राइवेट आप्रेटरों की बस छीन ली गई थी, उसमें हमारी बसें भी शामिल थीं।

प्र. : यह कहा जाता है कि आपको विरासत में बहुत कम जमीन मिली थी लेकिन आपने महल खड़े कर लिए?
उ. : मेरे दादा जी 5 भाई थे और बादल गांव में हमारा 2500 एकड़ का खेत था। इसके अलावा भी तीन अन्य गांवों में हमारी जमीनें थीं। राजस्थान में चक बादल गांव में भी हमारे परिवार के पास 2500 एकड़ के खेत थे। बालासर में हमारे ननिहाल के पास भी 2500 एकड़ के खेत थे। उत्तर प्रदेश में हमारा संयुक्त परिवार का 1000 एकड़ का फार्म हाऊस था।

यह सारा रिकार्ड आधिकारिक तौर पर सरकार के पास मौजूद है। कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने 2002 से 2007 के अपने कार्यकाल के दौरान हमारे खिलाफ भ्रष्टाचार को साबित करने में एड़ी-चोटी का जोर लगाया और हमारे बच्चों के कपड़े तक गिन लिए लेकिन एक भी बात साबित नहीं हुई। अब भी मेरी चुनौती है कि मेरे खिलाफ भ्रष्टाचार का एक भी मामला साबित करके दिखाए। पी.टी.सी. में मेरा शेयर है लेकिन फास्टवे से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। 

प्र. : एक चर्चा यह भी है कि आपने धनौला के दीपक ढाबे व जालंधर की हवेली में भी हिस्सेदारी डाली है?
उ. : मेरी सिक्योरिटी ने एक दिन जाते वक्त मुझे बोला कि दीपक ढाबे पर चाय पीनी है, हम वहां चाय पीने रुक गए और उस ढाबे का नाम मेरे साथ जोड़ दिया गया। इसी तरह हवेली में भी मैं खाना खाने गया था और उसका नाम भी मेरे साथ जोड़ दिया गया। मैंने तो हंसते हुए हवेली के मालिक को कह दिया था कि अब मेरा नाम तो जोड़ ही दिया गया है, हवेली मुझे देनी ही पड़ेगी। 

प्र. : आपके बारे में धारणा है कि आपने पंजाब रोडवेज को नुक्सान पहुंचा कर अपनी ट्रांसपोर्ट को फायदा पहुंचाने का काम किया?
उ.
: मेरे पिता प्रकाश सिंह बादल पांच बार मुख्यमंत्री रहे हैं और 25 साल पंजाब की सत्ता हमारे पास रही है। इन 25 वर्षों में हमने अपनी एक भी बस का परमिट नहीं लिया। यह रिकार्ड सरकार के पास है। यदि मेरे नाम पर या हमारी किसी भी कम्पनी के नाम पर हमारे सत्ता में रहते एक भी बस का परमिट जारी हुआ है तो मैं इसका देनदार हूं। हमने जो भी विकास किया है, वह अन्य ट्रांसपोर्ट कम्पनियों को खरीद कर किया है। मेरे शेयर वाले पी.टी.सी. चैनल पर सरकारी विज्ञापन चला जिसका 7 से 8 करोड़ रुपए का बिल था लेकिन सरकार से एक भी बिल पी.टी.सी. को नहीं गया और न ही पी.टी.सी. ने सरकारी बिल का दावा किया। 

प्र. : दरबार साहिब का लाइव टैलीकास्ट, कबड्डी कप और सरकारी प्रोग्राम आपके चैनल पर क्यों टैलीकास्ट होते रहे?
उ.
: जब कबड्डी कप शुरू हुआ तो यह सवाल था कि सरकार को इसके आयोजन का पैसा कौन देगा? प्रसारक को लेकर बात हुई तो पी.टी.सी. ने एक करोड़ रुपए का आफर किया। हमने इस पर बोली करवा दी और यह बोली तीन बार करवाई गई। पूरे पारदर्शी तरीके के बाद बोली होने के बाद पी.टी.सी. को राइट्स दिए गए। इसके बाद यही कहानी श्री दरबार साहिब के लाइव टैलीकास्ट को लेकर दोहराई गई। कांग्रेस ने यह धारणा गलत बनाई है कि हमने पी.टी.सी. की टी.आर.पी. के लिए ये सारे राइट्स लिए हैं। 

मनप्रीत नालायक पुत्र

प्र. : मनप्रीत बादल कहते हैं कि मेरी जायदाद में इजाफा नहीं हुआ, सुखबीर इतने अमीर कैसे हो गए?
उ. : धीरू भाई अम्बानी ने अपनी जायदाद अपने दोनों बेटों मुकेश व अनिल में समान रूप से बांटी थी। आज अनिल कहां हैं और मुकेश कहां हैं? मुकेश दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार किए जाते हैं जबकि अनिल मनप्रीत की तरह नालायक निकले और उनकी कम्पनियां कंगाली की कगार पर हैं। यह अपनी-अपनी किस्मत है और अपनी-अपनी बिजनैस करने की कला है। 

मैं अमृतधारी सिख हूं
मैं अपनी धार्मिक आस्था को लेकर किसी कांग्रेसी के प्रति जवाबदेह नहीं हूं, मेरी जवाबदेही श्री गुरु ग्रंथ साहिब और अपने गुरुओं के प्रति है। चरणजीत सिंह चन्नी जैसे लोगों को मैं जवाब नहीं दूंगा। मैंने श्री आनंदपुर साहिब जाकर अमृतपान किया है और मैं गुरु का सच्चा अमृतधारी सिख हूं। 

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