जब भक्त के लिए स्वयं झुके श्रीनाथ

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वैसे तो वृंदावन में सारे मंदिर ठाकुर जी को समर्पित हैं और उनसे जुड़ी बहुत सारी कथाएं भी प्रचलित हैं। आज हम बात करेंगे श्री नाथ जी के बारे में। श्रीनाथ जी का मंदिर पुरे विश्वभर में अपनी एक अलग छवि रखता है। हर साल लाखों-करोड़ो लोग श्रीनाथ जी के दर्शन के लिए नाथद्वारा आते हैं। श्रीनाथ जी को लेकर एक कथा काफी प्रचलित है या यूं कहे कि एक अनोखी परंपरा है कि जब वहां कोई भक्त मंदिर के विग्रह के लिए माला लेकर जाता है तो वहां के पुजारी उस माला को विग्रह से स्पर्श कराकर उसी भक्त के गले में पहना देते हैं। तो चलिए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा के बारे में- 


किंवदंतियों के अनुसार ये बात अकबर के समय की है कि एक बार एक वैष्णव भक्त प्रतिदिन श्रीनाथ जी के लिए माला लेकर जाता था। एक दिन अकबर का सेनापति भी ठीक उसी समय माला लेने माली के पास पहुंचे तो वहां देखा कि उस समय केवल एक ही माला बची थी। वैष्णव भक्त और अकबर के सेनापति दोनों ही माला खरीदने के लिए अड़ गए। इस धर्मसंकट से मुक्ति पाने के लिए माली ने कहा कि जो भी अधिक दाम देगा उसी को मैं यह माला दूंगा। दोनों ओर से माला के लिए बोली लगनी शुरु हो गई।

जब माला की बोली अधिक दाम पर पहुंची तो अकबर के सेनापति ने बोली बंद कर दी। लेकिन अंतिम बोली की कीमत बहुत ज्यादा थी जोकि उस वैष्णव भक्त के लिए देना असंभव था। लेकिन फिर भी उस ब्राह्मण के पास जो कुछ भी था, अपना धन और घर बेचकर उसे जो पैसे मिला उसने उस माला को खरीद लिया।

माला को लेकर वह श्रीनाथ जी के मंदिर पहुंचा और जैसे ही उसने वह माला श्रीनाथ जी की गले में डाली वैसे ही भगवान की गर्दन झुक गई। श्रीनाथ जी को झुके देख उनके सेवा में लगे पुजारी भयभीत हो गए। ऐसा कहा जाता है कि वहां श्रीनाथ जी खुद प्रकट हुए थे और पुजारी को सारी बात बताई था ताकि उस उस भक्त की सहायता हो सके। जब पुजारियों ने उस भक्त का घर सहित सब व्यवस्थाएं कर दी तब जाकर श्रीनाथ जी सीधे हुए। तब से आज तक ब्रज में यह परंपरा है कि भक्त की माला श्रीविग्रह को स्पर्श कराकर उसे ही पहना दी जाती है। 
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