B''Day Special: जब राहुल ने 6 हफ्ते में की 125 रैलियां, पहचान छुपा लंदन में की थी जॉब

नेशनल डेस्क:कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज अपना 48वां जन्मदिन मना रहे हैं। 19 जून 1970 को जन्मे राहुल ने 2004 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। 2013 में कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने राहुल को 11 दिसंबर 2017 को निर्विरोध पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। कांग्रेस अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद राहुल के तेवर बदले-बदले से हैं। उनकी अध्यक्षता में कांग्रेस ने गुजरात और कर्नाटक में पार्टी को एक अलग स्तर पर पहुंचाया है। कांग्रेस में इन दिनों नया जोश है। राहुल की आलोचना करने वाले आज उनकी प्रशंसा करने से भी नहीं चूकते हैं। राहुल ने अभी से मिशन 2019 के लिए कमर कस ली है।
PunjabKesari
2009 में जीत का सेहरा बंधा राहुल के सिर
राहुल को 2009 के आम चुनावों में कांग्रेस को मिली बड़ी जीत का श्रेय दिया गया था।गौरतलब है कि 2009 के लोकसभा चुनावों में, उन्होंने उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 3,33,000 वोटों क अंतर से पराजित करके अपना अमेठी निर्वाचक क्षेत्र बनाए रखा था। इन चुनावों में कांग्रेस ने कुल 80 लोकसभा सीटों में से 21 जीतकर उत्तर प्रदेश में खुद को पुनर्जीवित किया था और इस बदलाव का श्रेय राहुल गांधी को दिया गया। उस दौरान उन्होंने 6 सप्ताह में देशभर में 125 रैलियों में भाषण दिया था।
PunjabKesari
पहचान छुपा की थी लंदन में जॉब
1995 में राहुल ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज से एमफिल की डिग्री ली। ग्रैजुएशन के बाद उन्होंने तीन साल तक लंदन में मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म मॉनिटर ग्रुप में काम किया। तब किसी को नहीं पता था कि राहुल भारत के पीएम के बेटे हैं क्योंकि सुरक्षा के लिहाज से उनकी पहचान को छुपाया गया था। राहुल ने कंपनी में रॉल विंसी के नाम से काम किया था।
PunjabKesari
ऐसे हुई राजनीति में एंट्री
2002 में राहुल वापिस भारत लौटे और मुंबई बेस्ड टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग कंपनी बैकअप्स सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड में डायरेक्टर बने। इसके बाद राहुल ने राजनीति में कदम रखा और मार्च 2004 में अपने पिता राजीव गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता भी।
PunjabKesari
जब रात 10 बजे चक चला चुनावी काफिला
अमेठी चुनाव लड़ने के लिए राहुल ने जी तोड़ मेहनत एक कर दी थी। बहन प्रियंका गांधी ने इसकी कमान संभाली। दोनों ने एक रोड शो निकाला। राहुल रोड शो के दौरान ज्यादा भीड़ देख वाहन से नीचे उतर लोगों के बीच जाकर हालचाल पूछते थे। राहुल कई बार चुनाव प्रचार के दौरान दलितों के घरों में अचानक पहुंच कर चाय पीते भी दिखे। चुनाव प्रचार के दौरान दोपहर में संजय गांधी के नाम पर बने गेस्ट हाउस से आए भोजन को उन्होंने बाग में बैठ कर सबके साथ खाया था। उसके बाद उनका काफिला रात 10 बजे तक चलता रहा।
PunjabKesari
बदले-बदले से राहुल
राजनीति के शुरुआती दिनों से लेकर अब तक राहुल में काफी बदलाव आए हैं। अगर कहा जाए कि वे एक मंझे हुए राजनीतिज्ञ बनने की ओर अग्रसर है तो ये गलत न होगा। उनमें एक ठहराव-सा आ गया है। किस मौके पर क्या कहना है और किस पर कैसी चोट मारनी है वे समझ गए हैं। राहुल के इस नए अंदाज को लेकर उनके आलोचक भी उनकी प्रशंसा करने से नहीं चूक रहे हैं। 2014 में लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस में अब राहुल ने नई जान फूंकी है। राहुल 2019 के लिए प्रधानमंत्री पद के लिए खुद का नाम भी आगे कर चुके हैं। भाजपा को शिकस्त देेने के लिए कांग्रेस सहित अन्य दलों को अब राहुल से उम्मीदें हैं। देखना दिलचस्प होगा कि राहुल का जादू 2019 में क्या कमाल दिखाता है।

यहाँ आप निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, भारत मॅट्रिमोनी के लिए!