ऑफ द रिकॉर्डः एकता वार्ता की कमान संभालेंगी सोनिया गांधी

नेशनल डेस्कः समान विचारों वाली पार्टियों के साथ गठबंधन में गड़बड़ी होने और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा उनके साथ गठबंधन करने में अधिक समय लगाने की संभावना को देखते हुए अब सोनिया गांधी इस मामले में आगे आ सकती हैं। उत्तर प्रदेश के ताजा घटनाक्रम, जहां बसपा प्रमुख मायावती बातचीत के लिए किसी भी कांग्रेस नेता को उपलब्ध नहीं हो रहीं, से चिंतित सोनिया गांधी 2004 के अपने पुराने घटनाक्रम को दोहरा सकती हैं। तब सोनिया संसदीय चुनावों से पूर्व बसपा प्रमुख मायावती के निवास तक पैदल गई थीं और वहां हड़कम्प मचा दिया था। मायावती के घर तक कार में जाने की बजाय वह अपने 10 जनपथ निवास से पैदल गईं। बाद में वह कार में राकांपा प्रमुख शरद पवार के निवास पर गईं जिन्होंने उनके नेतृत्व के खिलाफ कांग्रेस को अलविदा कहा था।


सोनिया गांधी के फिर से आगे आने का कारण यह है कि राहुल गांधी को प्रधान का नया पद मिला है और विपक्ष के वरिष्ठ नेता खुल कर उनके साथ बातचीत करने में संकोच करते हैं। ममता बनर्जी ने हाल ही में राहुल गांधी को ‘जूनियर लीडर’ बताया। यद्यपि राहुल गांधी हाल ही के वर्षों में कुछ परिपक्व हुए हैं मगर नेता सोनिया गांधी के साथ जुडऩे में खुद को सुखद महसूस करते हैं। कांग्रेस नेता इस बात को लेकर चिंतित हैं कि मायावती उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को 8-10 से अधिक लोकसभा सीटें देने की इच्छुक नहीं। उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश सिंह को बता दिया है कि बसपा राज्य में कम से कम 40 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी, अगर कांग्रेस और रालोद को सीटें दी जानी हैं तो वे सपा के कोटे से दी जा सकती हैं। 

यह बात स्पष्ट है कि मायावती प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में लोकसभा की अधिक सीटों पर नजर रखे हुए हैं। वह इसलिए भी कड़ा रुख अपना रही हैं ताकि कांग्रेस पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात में भी बसपा को अधिक सीटें देना स्वीकार कर ले। अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव अशोक गहलोत ने कहा है कि यू.पी.ए. की चेयरपर्सन सोनिया गांधी भविष्य में इस पहलू पर नजर रखेंगी।

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