श्रीलंका में राजनीतिक दल संसदीय कार्यों के लिए प्रवर समिति गठित करने को राजी

कोलंबो: श्रीलंका में राजनीतिक दल संसदीय कार्यों को संचालित करने के लिए एक प्रवर समिति गठित करने के लिए सोमवार को राजी हुए। वहीं संसद की बैठक आज सिर्फ 10 मिनट तक चली, जिसके बाद यह 23 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई। दरअसल, पिछले महीने रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से हटाने के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के विवादास्पद फैसले के बाद से देश में सत्ता संघर्ष चल रहा है। इस संकट का हल करने के लिए राष्ट्रपति सिरिसेना द्वारा बुलाई गई एक सर्वदलीय बैठक बेनतीजा रहने के एक दिन बाद समिति गठित करने का यह फैसला किया गया।

श्रीलंकाई संसद की बैठक विवादित प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के खिलाफ सदन में तीसरे शक्ति परीक्षण के लिए सोमवार को बुलाई गई लेकिन बैठक शुरू होने के सिर्फ 10 मिनट बाद यह स्थगित कर दी गई। हालांकि, समिति के सदस्यों के बारे में फैसला नहीं हो सका। सोमवार का सत्र शांतिपूर्वक चला। सदन की कार्यवाही 23 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई है। देश में मौजूदा संकट उस वक्त पैदा हुआ था, जब सिरिसेना ने अचानक ही 26 अक्टूबर को विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया और उनकी जगह महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बिठा दिया।

सिरिसेना ने इसके बाद संसद भंग कर दी और मध्यावधि चुनाव कराने का आदेश दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने संसद भंग करने संबंधी सिरिसेना के फैसले को पलट दिया और मध्यावधि चुनाव की तैयारियों पर रोक लगा दी। सदन ने राजपक्षे और उनकी सरकार के खिलाफ अब तक ध्वनिमत से दो अविश्वास प्रस्ताव पारित किए हैं। इस बीच, श्रीलंकाई सांसदों ने संसद को एक प्रस्ताव सौंप कर प्रधानमंत्री राजपक्षे को आवंटित सरकारी कोष रोकने की मांग की। कोलंबो गजट ने सोमवार को यह खबर दी कि विक्रमसिंघे की यूनाइटेड नेशनल पार्टी के सांसद नवीन दिशानायके ने कहा कि यूनाइटेड नेशनल फ्रंट के छह सांसदों ने इस सिलसिले में संसद में चर्चा कराने के लिए एक प्रस्ताव सदन को सौंपा है। 

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