कृषि जिंस डेरिवेटिव बाजारों को किसान कोष बनाने का सेबी का निर्देश

नई दिल्ली: भारतीय प्रतिभूति ने कृषि जिंस डेरिवेटिव अनुबंध कारोबार कराने वाले एक्सचेंजों को किसानों और किसान-उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की मदद के लिए एक कोष बनाने का निर्देश दिया है। इस कोष में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा इन एक्सचेंजों को छोड़ा गया विनियामकीय शुल्क जमा किया जाएगा। सेबी ने इस कोष की कार्ययोजना और इसके धन के उपायोग के दिशा-निर्देशक सिद्धांत भी जारी किए है। गौरतलब है कि सेबी ने ऐसे सक्सचेंजों पर कारोबार के विभिन्न स्लैब पर अलग अलग दर शुल्क लगाने की जगह एक लाख रुपये सालाना का एक नाम मात्र का शुल्क रख दिया था।

उसी समय त्याग किए गए (छोड़े गए) शुल्क से किसानों और एफपीओ की बाजार में मदद के लिए कोष बनाने का प्रस्ताव किया था। सेबी के बेव साइट पर सेबी के इस आदेश की जानकारी दी गयी है। सेबी ने कहा है कि एक्सचेंजों को इस साल 10 अप्रैल तक इस कोष की कार्ययोजना बनानी है और उसकी जानकारी अपनी अपनी बेबसाइट पर चढ़ानी है। इस कोष को किसी अन्य कोष से नहीं जोड़ा जा सकता है। कार्ययोजना तय करते समय एक्चेंज किसानों/एफपीओ को गोदाम खर्च की माफी, बोरी खर्च के भुगतान और दलाल के शुल्क की वापसी जैसे मुद्दों पर विचार करना होगा।

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