SC/ST एक्ट पर बुरी फंसी सरकार

जालंधर (डैस्क): एस.सी./ एस.टी. एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए कैबिनेट में मंजूर किए गए विधेयक को लेकर सरकार बुरी तरह से घिर गई है। कांग्रेस की तरफ से मल्लिका अर्जुन खडग़े द्वारा इस मुद्दे पर सरकार से अध्यादेश लाने और एक मत से इसे पास करवाने की पेशकश के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह को इस मुद्दे पर सफाई देनी पड़ी और यह साफ  करना पड़ा कि सरकार इसी सत्र के दौरान इस कानून को पास करवाएगी लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लाए गए विधेयक के पास होने या न होने दोनों स्थितियों में सरकार को नुक्सान का अंदेशा है।


 संसद के मौजूदा कार्यकाल की अवधि महज एक सप्ताह बची है और इस एक सप्ताह में दो छुट्टियां होने वाली हैं, ऐसे में यदि इस सत्र में विधेयक पास न हुआ तो शीतकालीन सत्र में इसे पास करवाना मुश्किल होगा क्योंकि उस दौरान मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में चुनाव चल रहे होंगे और संसद में सक्रियता काफी कम रहेगी। वैसे भी सरकार का आखिरी सत्र कामकाजी लिहाज से ज्यादा फलदायक नहीं रहता। यदि यह कानून पास न हुआ तो दलित समुदाय को सरकार की राजनीतिक इच्छा शक्ति में कमी का सन्देश जाएगा और यदि कानून पास हो गया तो जनरल कैटेगरी सरकार से नाराज हो सकती है। 

3 साल में महज 16 फीसदी मामलों में सजा 
एस.सी., एस.टी. उत्पीडऩ़ रोकथाम कानून के तहत दर्ज होने वाले मामलों में 2014 से लेकर 2016 के बीच & साल में महज 16 फीसदी मामलों में सजा हुई है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक इस कानून के तहत 2014 में  8ए887 ए 2015 में 6005 और 2016 में 5082 मामले दर्ज हुए थे लेकिन इनमें से महज 16.3 फीसदी मामलों में ही सजा हुई। इससे यह प्रभाव गया कि इस कानून का बेजा इस्तेमाल हो रहा है। 

क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने 
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 20 मार्च को सुनाए गए अपने फैसले में कहा था कि एस.सी., एस.टी. उत्पीड़ऩ रोकथाम कानून के तहत जांच के बिना कोई मामला दर्ज नहीं होगा। यह कानून नागरिकों के मूल अधिकार की उल्लंघना करता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने इस मामले में अदालत में पुर्नविचार याचिका दायर की थी और उस पर फैसला नहीं हुआ है। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने के लिए सरकार कानून पास करवाने की तैयारी कर रही है। 

इसलिए झुकी सरकार 
दरअसल एस.सी./एस.टी. उत्पीडऩ रोकथाम कानून के कुछ प्रावधानों में हुए बदलाव के विरोध में 9 अगस्त को देश भर में दलित संगठनों ने आंदोलन का ऐलान किया है। इस तरह का एक आंदोलन 2 अप्रैल को हुआ था। पंजाब, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में इस दौरान भारी हिंसा हुई थी। इस बीच एस.सी., एस.टी. उत्पीडऩ रोकथाम कानून पर फैसला सुनाने वाले जज जस्टिस आदर्श कुमार गोयल को सरकार ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण का अध्यक्ष बना दिया था और उनकी नियुक्ति से दलित संगठन और भाजपा के साथ जुड़े दलित नेता नाराज हैं और जस्टिस गोयल को हटाने की मांग कर रहे हैं। भाजपा की असली चिंता इसलिए बढ़ी थी कि उसकी सहयोगी पार्टियों ने चेतावनी दीथी। रामविलास पासवान ने तेवर दिखाए थे और उनके बेटे ने लगातार 2 दिन इस पर बयान दिया था। सरकार द्वारा 8 अगस्त तक कोई पहल नहीं किए जाने की स्थिति में रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान संसद से इस्तीफा देने की तैयारी कर रहे थे उससे पहले सरकार ने खुद ही बदलाव का फैसला कर लिया। एस.सी., एस.टी. उत्पीडऩ रोकथाम कानून में बदलाव के विधेयक को सरकार ने मंजूरी दी गई। 

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