शुक्रवार को व्रत करने वाले इस विधि से पूजन कर, देवी संतोषी को करें प्रसन्न

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्रवार के दिन आदि शक्ति की पूजा का विधान रहता है। इसलिए इस दिन देवी के मंदिरों में बहुत भीड़ देखी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन संतोषी माता का व्रत रखने से कई तरह के शुभ फल प्राप्त होते हैं। कहने का भाव है कि शुक्रवार का दिन शास्त्रों में खास माना गया है। और इस खास दिन की अहमियत आज और भी बढ़ हई है क्योंकि आज हिंदू धर्म का प्रमुख त्यौहार नृसिंह जंयती भी मनाया जा रहा है। इसलिए इस दिन की विशेषता अधिक मानी जा रही है। तो आइए आपको बताते हैं शुक्रवार को किए जाने वाले संतोषी व्रत से जुड़ी कुछ खास बातें-
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माना जाता है इस दिन मां संतोषी की साधना-आराधना और व्रत करने से साधक को चमत्कारिक लाभ प्राप्त होते हैं और समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ग्रंथों में किए उल्लेख के मुताबिक मां संतोषी के पिता भगवान गणेश और माता रिद्धि-सिद्धि हैं।

यहां जानें इस व्रत के पूजा के विधान के बारे में-
सूर्योदय से पहले उठकर घर को साफ़ कर लें। फिर स्नान आदि करने के बाद पूजा प्रारंभ करें। घर में पवित्र स्थान पर माता संतोषी की मूर्ति रखें। प्रतिमा के पास किसी बड़े बर्तन में जल भरकर उसमें गुड़ और चने डाल दें।

अब प्रतिमा के समक्ष गाय के घी का दीपक जलाकर मां को भोग लगाएं फिर माता संतोषी का कथा सुनें या पढ़ें। पूजा सम्पन्न होने के बाद अन्य भक्तों में गुड़ और चने का प्रसाद बांटे। फिर रखा हुआ जल घर के कोने-कोने में छिड़कें।
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कहा जाता है कि इस व्रत को नियम अनुसार कुल 16 शुक्रवार व्रत रखना चाहिए। इसके बाद ही विसर्जन करें। जिस दिन व्रत का उद्यापन करें उस दिन 8 बच्चों को खीर-पूरी का भोजन ज़रूर कराएं। इसके अलावा बच्चों को दक्षिणा के साथ केले का प्रसाद वितरण करें।

शुक्रवार के दिन व्रत रखने वाले इस बात का ध्यान रखें कि कोई भी खट्टी सब्जी या फल का सेवन नहीं करना चाहिए।
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