सवर्णों को आरक्षणः सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई एक और याचिका

नेशनल डेस्कः सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर की गई है। कारोबारी तहसीन पूनावाला ने सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण देने संबंधी संविधान संशोधन कानून को न्यायालय में चुनौती दी है। याचिका पर इस सप्ताह के दौरान सुनवाई होने की उम्मीद है।

याचिका में क्या कहा गया
याचिका में कहा गया है कि इस संविधान संशोधन से आरक्षण के बार में इंदिरा साहनी प्रकरणम में सुप्रीम कोर्ट के 1992 के फैसले में प्रतिपादित मानदंड का उल्लघंन होता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस फैसले में स्पष्ट किया गया था कि आरक्षण के लिए पिछड़ेपन को सिर्फ आर्थिक आधार पर परिभाषित नहीं किया जा सकता है।

पूनावाला ने याचिका क्या दलील दी
पूनावाला ने याचिका में कहा है कि संविधान पीठ ने आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फीसदी निर्धारित की थी और आर्थिक आधार पर आरक्षण का प्रावधान इस सीमा को लांघता है। याचिका में इस नए कानून पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।

आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान करने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पारित किया गया था और इसे राष्ट्रपतिकी मजूरी भी मिल चुकी है। सामाजिक न्याय मंत्रालय इस संविधान संशोधन कानून को लागू करने संबंधी अधिसूचना भी जारी कर चुका है।

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