तो इस कारण हुआ था भगवान शिव का माता पार्वती से मिलन

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हिंदू धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह से जुड़ी बहुत सारी कथाएं प्रचलित हैं। लेकिन जैसा कि सब जानते हैं कि भगवान के हर कार्य के पीछे कोई न कोई कारण जरूर रहा है। ठीक वैसे ही उनके विवाह के पीछे भी वजह थी और वह वजह थी तारकासुर के वध की, क्योंकि उसे ब्रह्मा जी से वरदान मिला था कि उसका वध केवल शिव पुत्र के हाथ से होगा। तो चलिए इसके पीछे जुड़ी कथा के बारे में जानते हैं। 


एक पौराणिक मतानुसार तारकासुर ने अन्न-जल त्याग कर ब्रह्मा जी के प्रसन्न करने के लिए बहुत कठोर तप किया और इस तपस्या के पीछे वजह थी कि वह तोनों लोको में अमर होना चाहता था। उसके तप से खुश होकर ब्रह्मा प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा। तारकासुर ने मांगा कि मुझे ऐसा वरदान दें जिससे कि मेरी मृत्यु कभी न हो और न मुझे कोई मार सके। लेकिन ब्रह्मा जी ने यह वर देने को मना कर दिया और अंर्तध्यान हो गए। तारकासुर ने भी अपना तप नहीं छोड़ा और वापिस से ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने में लग गया। 

बहुत समय बीत जाने के बाद ब्रह्मा जी फिर तारकासुर के सामने प्रकट हुए और वर मांगने को कहा। तब तारकासुर ने भी अपनी सुझ-बुझ से वरदान मांगा कि मेरी मृत्यु केवल भोलेनाथ के पुत्र का हाथों ही है, वरना नहीं। क्योंकि वे जानता था कि भगवान शिव तो योगी हैं वे विवाह कभी नहीं करवाएंगे और न कोई उनका पुत्र पैदा होगा। इससे वह खुद भई अमर हो जाएगा। ब्रह्मा जी उसे तथास्तु कहकर अंर्तध्यान हो गए। 

ब्रह्मा जी से वर पाने के बाद तारकासुर ने तीनों लोको में आंतक मचाना शुरु कर दिया। सभी देव उससे बहुत परेशान हो गए और मिलकर भोलेनाथ के पास गए। वहीं दूसरी ओर माता पार्वती भी भगवान को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप में लीन थी। तभी भगवान ने लोक कल्याण के लिए माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया और बाद में उनके पुत्र कार्तिकेय ने जन्म लिया और उसी ने राक्षय तारका का वध किया और सब को उसके अत्याचारों से बचाया। 

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