Kundli Tv- शिव जी से सीखें ये 5 बातें, फिर देखें कैसे Married Life में बरसेगा प्यार ही प्यार

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सावन में हर कुंवारी व शादीशुदा महिला भगवान शंकर का बहुत श्रद्धा भाव से पूजन करती है। क्योंकि मान्यता है कि इस माह में शिव जी का पूजन करने से अच्छा वर मिलने की इच्छा पूरी होती है। लेकिन इस मान्यता के मुख्य कारण है, भोलेनाथ को गृहस्थ जीवन का देवता कहा जाता है। इसलिए कुवांरी लड़कियों के साथ-साथ शादीशुदा महिलाओं के लिए भी सावन में व्रत व पूजन का बहुत महत्व है। ज्योतिष के अनुसार महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु के लिए श्रावण सोमवार के व्रत का पालन करती हैं। कहा जाता है कि भगवान शंकर ने मां पार्वती के साथ इसी माह यानि सावन में ही विवाह किया था। इसलिए श्रावण के महीने को इतना पावन व उनके प्यार भरे रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। तो आईए जानते हैं कि कुछ एेसी बातें जो हर शादीशुदा को इस महीने में शिव-पार्वती को ज़रूर सीखनी चाहिए और अपने जीवन में उतारनी चाहिए। 

समानता 
ज्यादातर लोगों को पता होगा कि भगवान शिव को अर्धनारीश्वर कहा जाता है क्योंकि पुराणों के अनुसार शिव ही एकमात्र ऐसे देवता है जिनमें आधा पुरुष का और आधा नारी का रूप है, जिस कारण इनको अर्धनारीश्वर कहा जाता है। इस शब्द का मतलब है कि शंकर की आधी प्रतिमा पुरुष की है और आधी स्त्री की। अपने इस स्वरूप से वो शादीशुदा लोगों को ये समझाते हैं कि पति-पत्नी भले ही शरीर से अलग क्यों न हो  लेकिन मन से दोनों एक ही हैं। आपने अक्सर देखा होगा कि पति-पत्नी के बीच कई झगड़े तो सिर्फ खुद को बड़ा दिखाने की वजह से हो जाते हैं। तो अगर आपके घर में एेसा कुछ हो रहा है तो शुव जी की इस सीख को अपने जीवन में अपनाें कि शादीशुदा जोड़ा शरीर से चाहे अलग हो लेकिन उनमें समानता का अधिकार एक समान होना चाहिेए। 

प्रेम
भगवान शिव और माता पार्वती का साथ आज कल के उन सभी लोगों के लिए एक उदाहरण है जो विवाह करते समय बैंक बैलेंस और खूबसूरती को पहली अहमियत देते हैं। माता पार्वती ने भस्मधारी, गले में सर्प की माला वाले शिव को पसंद करके ऐसे लोगों को बताया है कि एक अच्छे गृहस्थ जीवन के लिए दोनों के बीच प्यार और समर्पण जरूरी है न कि पैसा और खूबसूरती।   

ईमानदार
हर लड़की का ये सपना होता है कि उसका जीवनसाथी भोले बाबा जैसा सीधा और प्यार करने वाला हो जो उसकी किसी बात को अनसुना न करें। भगवान शिव माता पार्वती से कितना प्यार करते थे ये इसी बात से पता चलता है कि जब माता पार्वती भगवान शिव के हुए अपमान से दुखी होकर सती हो गई थीं तो भगवान ने रौद्र रूप धारण करके दुनिया का विनाश करना शुरू कर दिया था। हालांकि बाद में वो देवताओं के समझाने के बाद शांत भी हो गए थे।  

मुखिया
जिस तरह परिवार का मुखिया अलग-अलग विचार होने के बावजूद अपने पूरे घर को एक साथ लेकर चलता है ठीक उसी तरह भगवान शिव भी अपने परिवार को एक साथ रखते हैं। उदाहरण के लिए भगवान शिव के गले में सांप की माला है जो कि उनके पुत्र गणेश के वाहन चूहे का शत्रु होता है। बावजूद इसके दोनों में कोई बैर नहीं देखा जाता। ठीक उसी तरह मां गौरी का वाहन का शेर और भगवान शिव का वाहन है बैल वो भी एक दूसरे के शत्रु होते हैं बावजूद इसके दोनों मिलकर रहते हैं। भगवान शिव ऐसे गृहस्थ के देवता हैं जो विषम परिस्थितियों में भी अपने परिवार को साथ लेकर चलते हैं।
 


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