सरकार को अंतरिम लाभांश के तौर पर 28,000 करोड़ रुपए देगा रिजर्व बैंक

बिजनेस डेस्कः  रिजर्व बैंक ने सोमवार को कहा कि वह अंतरिम लाभांश के रूप में सरकार को 28,000 करोड़ रुपए देगा। आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की बैठक में यह निर्णय किया गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) ने इस महीने की शुरूआत में नीतिगत दरों में की गई कटौती का लाभ ग्राहकों को नहीं मिलने पर सख्त रुख अपनाया है। आर.बी.आई. नीतिगत दरों में इस महीने के आरंभ में उसके द्वारा की गई कटौती का लाभ ग्राहकों को देने के लिए बैंकों से कहेगा।

आर.बी.आई. गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि ब्याज दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों को देना महत्वपूर्ण है और केंद्रीय बैंक इस सप्ताह यानी 21 फरवरी को वाणिज्यिक बैंक प्रमुखों के साथ होने वाली बैठक में उनसे ऐसा करने के लिए कहेगा। यदि ऐसा होता है तो अगले महीने से आपके मकान और गाड़ी की किस्त की राशि में कमी आ सकती है। वह बजट के बाद रिजर्व बैंक के बोर्ड की बैठक में बोल रहे थे। उनसे पूछा गया था कि आर.बी.आई. की मौद्रिक नीति समिति द्वारा चालू वित्त वर्ष की अंतिम समीक्षा में नीतिगत दरों में की गई 0.25 प्रतिशत की कटौती का पूरा लाभ बैंकों ने ग्राहकों को नहीं दिया है। बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेतली भी शामिल हुए। 


 आंकड़ो के अनुसार
आरबीआई ने 2017-18 में केंद्र के अनुरोध पर उसे पहली बार 10,000 करोड़ रुपए का अंतरिम लाभांश दिया था। 2017-18 में सरकार को आरबीआई की ओर से 50,000 करोड़ रुपए लाभांश मिला था। 2016-17 में यह राशि 65,876 करोड़ रुपए थी। 2019-20 में सरकार केंद्रीय बैंक से 69,000 करोड़ रुपए का लाभांश मांग रही है। सरकार ने इस दौरान आरबीआई, राष्ट्रीय बैंकों और वित्तीय संस्थानों से 82,911 करोड़ रुपए का संयुक्त लाभांश हासिल करने का लक्ष्य रखा है। बैठक के बाद आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि रीपो दर में कटौती का फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए वह 21 फरवरी को सरकारी और निजी बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक करेंगे। उन्होंने कहा, 'केंद्रीय बैंक के दरों में कटौती के बाद इसका फायदा उपभोक्ताओं को मिलना बहुत जरूरी है।' 

साल रूपए
2017-1810,000 रुपए
2016-1765,876 रुपए
2017-1850,000 रुपए
2019-2069,000 रुपए

क्या होगा अधिक डिविडेंड मिलने का फायदा
अधिक डिविडेंड मिलने से सरकार को गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स कलेक्शन में हुई कमी की भरपाई करने में मदद मिलेगी। 1 फरवरी को पेश बजट में सरकार ने इसके 1 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान लगाया था। केंद्र को कॉर्पोरेट टैक्स से 50 हजार करोड़ रुपए मिलने की भी उम्मीद है। वहीं, इस वित्त वर्ष में छोटे और सीमांत किसानों को कैश ट्रांसफर स्कीम पर उसे 20 हजार करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे। सरकार ने वित्त वर्ष 2019 के संशोधित अनुमान में फिस्कल डेफिसिट के जीडीपी के 3.4 पर्सेंट रहने की बात कही थी, जबकि बजट में इसके लिए 3.3 पर्सेंट का लक्ष्य तय किया गया था। 



देश में कम लेकिन बड़े बैंकों की जरूरत
बैंकों के विलय की भविष्य की योजनाओं पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक और उसके सहयोगी बैंकों का विलय हो चुका है। दूसरा विलय (विजया बैंक और देना बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में) प्रक्रियाधीन है। हमारे अनुभव कहते हैं कि देश में कम संख्या में लेकिन बड़े बैंकों की जरूरत है। रिजर्व बैंक द्वारा सरकार को लाभांश के मुद्दे पर जेतली ने कहा कि इसका फैसला पूरी तरह आर.बी.आई. के बोर्ड को करना है। सूत्रों ने बताया कि बोर्ड की बैठक में आज शाम तक लाभांश पर कोई फैसला हो जाएगा।

 

 

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