ऑफ द रिकॉर्डः राज्यसभा में उपसभापति अभी नहीं

नेशनल डेस्कः अब यह बात स्पष्ट हो गई है कि भाजपा की राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए चुनाव करवाने में अभी कोई रुचि नहीं। बीजू जनता दल, अन्नाद्रमुक और अन्य छोटी पार्टियों ने लोकसभा में कुछ विधेयकों पर राजग के पक्ष में वोट दिए थे, मगर राज्यसभा में इन पार्टियों ने अपना सुर बदल लिया और कांग्रेस के साथ जा मिलीं। राज्यसभा में जिस ढंग से मोटर व्हीकल्स और अन्य 2 विधेयक पारित नहीं हो पाए, उसके परिणामस्वरूप सरकार को अब उप-सभापति का चुनाव स्थगित करने को बाध्य होना पड़ा। सरकार की इस पद पर आम सहमति बनाने में रुचि थी। यह पद 2 जुलाई को रिक्त हुआ था। राज्यसभा में सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के साथ अनौपचारिक बातचीत की गई।

244 सदस्यीय ऊपरी सदन में सरकार के पास बहुमत नहीं है। इसलिए सरकार ने यह पद तृणमूल कांग्रेस (टी.एम.सी.) और बीजद को देने का मन बनाया था। मगर दोनों पार्टियों ने इस पद को लेने से इंकार कर दिया और कहा कि सरकार किसी ऐसे व्यक्ति का चयन करे जो समूचे सदन को स्वीकार्य हो। इस पद के लिए कई नाम सामने आए और अकाली दल के नरेश गुजराल का नाम सबसे आगे है। मगर भाजपा नेतृत्व इस पद पर अपने किसी एक नेता का चयन करने का इच्छुक था क्योंकि उसका विचार है कि सदन हमेशा विवादित रहता है। भाजपा अपने वरिष्ठ नेता भूपिन्द्र यादव को इस पद पर बिठाना चाहती है मगर पार्टी के पास सदस्यों की संख्या कम थी। इस संदर्भ में सत्तारूढ़ सरकार ने संसद के मानसून सत्र दौरान इस पद के लिए चुनाव न करवाने का निर्णय लिया।

संसद के कामकाज के लिए अब 8 दिन बाकी बचे हैं। वरिष्ठ भाजपा नेताओं का कहना है कि ऐसे कई उदाहरण हैं जब इस पद के चुनाव में विलम्ब हुआ है। अप्रैल 2012 में उप-सभापति का पद यू.पी.ए.-2 सरकार दौरान बजट सत्र में रिक्त हुआ था जब ए. रहमान खान सेवानिवृत्त हुए थे। मगर यह चुनाव संसद के मानसून सत्र दौरान हुआ। वर्ष 2004 दौरान यह चुनाव विलम्ब से हुआ क्योंकि 10 जून को यह पद रिक्त हुआ था और 2 जुलाई को इसका चयन किया गया। भाजपा सूत्रों का कहना है कि प्रिजाइडिंग अफसरों का एक पैनल पहले ही तैयार है। इसलिए सदन उप-सभापति के बिना भी काम कर सकता है।

Related Stories:

RELATED तृणमूल कांग्रेस अन्य राज्यों में भी लड़ेगी लोकसभा चुनाव : ममता