राफेल डील मामलाः मोदी सरकार ने क्यों नहीं किया एक समान नियमों का पालन!

जालंधर(धवन): कांग्रेस ने केन्द्र की मोदी सरकार पर राफेल विमान समझौते को लेकर सियासी हमला और तेज कर दिया है। उसने मोदी सरकार पर आरोप लगाया  कि वह रक्षा समझौतों के मामलों में दोहरे मापदंडों की पालना करने में लगी हुई है। कांग्रेस ने सवाल किया है कि फ्रांस के साथ राफेल समझौता करते समय उन नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया जिनका रूस के साथ ए.के.-103असाल्ट राइफलों का समझौता प्राइवेट फर्म को देते समय किया गया था।
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राफेल विमान समझौते में हुए घोटाले को लेकर कांग्रेस हमलावर रुख में आ चुकी है तथा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के निर्देशों पर देशभर में कांग्रेस द्वारा राफेल विमान समझौते में हुए घोटाले को उजागर किया जा रहा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि राफेल समझौता एक सरकार से दूसरी सरकार के बीच हुआ समझौता है। मोदी सरकार को 30,000 करोड़ रुपए के इस ठेके को प्राइवेट कम्पनी को अलाट करने में भूमिका नहीं होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने रूस को ए.के.-103 असाल्ट  राइफल के समझौते के तहत एक अन्य प्राइवेट भारतीय कम्पनी अडानी ग्रुप को इसमें पार्टनर बनाने की मांग को रद्द कर दिया था। भारत ने ए.के.-103 असाल्ट राइफलें लेने के लिए रूस के साथ समझौता किया है तथा ये राइफलें भारतीय सेना को दी जानी हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत सरकार ने रूस को सुझाव दिया है कि उसकी फर्म कालाशिनिकोव द्वारा रा’य की आयुद्ध फैक्टरी के साथ मिलकर कार्य किया जाएगा।
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आयुद्ध फैक्टरी सरकार द्वारा संचालित है। कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि ऐसे ही नियमों की पालना राफेल विमान समझौते के मामले में भारत सरकार ने क्यों नहीं की? मोदी सरकार ने क्यों नहीं कहा कि इस समझौते में सरकार द्वारा संचालित हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ही भागेदार बनेगी। इसमें अम्बानी की प्राइवेट कम्पनी को शामिल क्यों किया गया? दूसरी ओर केन्द्रीय मंत्री अरुण जेतली ने यह कहा कि फ्रांस से 36 विमान सीधे निर्मित होकर भारत को मिल रहे हैं। भारत में कुछ भी किया नहीं जाना है, जबकि रूस के साथ हुए गन समझौते के तहत सभी राइफलें भारत में निर्मित की जाएंगी। इसलिए दोनों समझौतों में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने कहा कि सरकार की यह नीति है कि भारत में रक्षा उपकरणों के निर्माण को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत ने फ्रांस के साथ 36 राफेल विमानों को लेकर 8.7 बिलियन डालर में समझौता किया है। पूर्व यू.पी.ए. सरकार के तहत 126 राफेल विमान खरीदने का निर्णय हुआ था, जिसके तहत 108 विमान सरकार द्वारा संचालित हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड में बनाए जाने थे। 
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कांग्रेस ने भाजपा के सस्ते विमान खरीदने के तर्कों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। कांग्रेस का कहना है कि भारत अब राफेल विमान 1670 करोड़ रुपए प्रति विमान के हिसाब से खरीद रहा है। यह कीमत पूर्व कांग्रेस सरकार के समय तय कीमत 526 करोड़ की तुलना में तीन गुना अधिक है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार के समय होने जा रहे समझौते के तहत फ्रांस ने राफेल विमान निर्मित करने की तकनीक भी भारत को ट्रांसफर करनी थी। केन्द्र की मौजूदा राजग सरकार ने अभी तक राफेल विमान की कीमत का ऐलान सार्वजनिक रूप से नहीं किया है। राफेल विमान समझौता विवादों के घेरे में आ चुका है, क्योंकि दसाल्ट द्वारा समझौते में अनिल अम्बानी के रिलायंस ग्रुप को शामिल किया गया है। कांग्रेस का कहना है कि पुराने समझौते को रद्द कर नया समझौता करते हुए मोदी सरकार ने अम्बानी को इसमें अवसर दे दिया । 

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