राफेल मामलाः केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में सौंपी रिपोर्ट, कल होगी सुनवाई

नई दिल्लीःकेंद्र ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि राफेल मामले की सुनवाई के दौरान कथित तौर पर अदालत को गुमराह करने के लिये अज्ञात लोकसेवकों के खिलाफ शपथभंग की कार्रवाई को लेकर दायर याचिका पूरी तरह गलत विचार पर टिकी है क्योंकि मीडिया में आई खबरें और कुछ “अपूर्ण आंतरिक फाइल टिप्पणियां” ऐसी कार्यवाही का आधार नहीं हो सकतीं।

केंद्र ने क्या कहा
पूर्व केंद्रीय मंत्रियों यशवंत सिंह और अरूण शौरी तथा वकील प्रशांत भूषण की तरफ से दायर याचिका पर दिये गए जवाबी हलफनामे में केंद्र ने कहा कि अदालत में झूठे बयान देने और तथ्यों को दबाने के आरोप “पूर्णतया गलत” और “निराधार” हैं। अदालत ने कहा कि अदालत में उसके प्रतिवेदन रिकॉर्ड पर आधारित थे जबकि याचिकाकर्ता रक्षा मंत्रालय की फाइलों पर एक अधिकारी या अधिकारियों के समूह द्वारा व्यक्त की गई राय पर मीडिया में हुई “चुनिंदा लीक” पर भरोसा कर रहे हैं और यह राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से संबंधित मामले में “अधूरी तस्वीर” पेश करता है।


आरोपों को बताया गलत और निराधार
केंद्र ने कहा कि तथ्यों के साथ-साथ याचिकाकर्ताओं की यह दलील कि (केंद्र की तरफ से) जवाब देने वाले अधिकारियों ने 'निर्णय लेने की प्रक्रिया', 'ऑफसेट' और 'मूल्य निर्धारण' के बारे में जानकारी देते हुए झूठे बयान दिए और सबूतों को दबा दिया यह पूरी तरह से गलत, निराधार है और सरकारी कर्मचारियों को अपना कर्तव्य निभाने से डराने का प्रयास है, अकेले इसी आधार पर याचिका खारिज किये जाने योग्य है।

कल सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ राफेल मामले में पिछले साल 14 दिसंबर के उसके आदेश पर पुनर्विचार से जुड़ी याचिकाओं और अज्ञात सरकारी अधिकारियों के खिलाफ शपथ भंग के आवेदन और अदालत के समक्ष कुछ तय दस्तावेज पेश करने के संबंध में दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई करेगी।

उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल 14 दिसंबर को सिन्हा, शौरी और भूषण द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें राफेल लड़ाकू विमान सौदों में हुई कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई थी। शपथभंग की कार्रवाई को लेकर दायर याचिका के जवाब में केंद्र ने कहा कि “मुख्य रिट याचिका को खारिज किये जाने के मद्देनजर, दायर की गई नई याचिका स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है।”

 

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