इस हफ्ते राम मंदिर पर फैसला सुनाएंगे CJI दीपक मिश्रा!

नेशनल डेस्क (मनीष शर्मा): सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को रिटायर होने जा रहे हैं। बतौर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कई उतार-चढ़ाव देखे। उनकी जगह जस्टिस रंजन गोगोई भारत के मुख्य न्यायाधीश बनेंगे। 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय अवकाश होने के कारण 1 अक्टूबर उनका आखिरी काम का दिन होगा, लेकिन उस दिन कोई फैसला निर्धारित नहीं किया गया है। संभावना है कि मुख्य न्यायाधीश अपने बचे हुए 5 कार्य दिवस में कई महत्वपूर्ण मामलों में फैसला सुना सकते हैं। हाल ही में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने समलैंगिकता को अपराध बताने वाली धारा 377 को हटाने का ऐतिहासिक फैसला दिया था। 



अयोध्या मामला  
सुप्रीम कोर्ट इस बात का निर्णय करेगी कि क्या 1994 के एम इस्माइल फ़ारुक़ी बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया में पांच जजों की संवैधानिक पीठ के आदेश को दोबारा परखा जाएगा या नहीं। इस फैसले के दोबारा परीक्षण के लिए इसे सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच के सामने भेजा जाए या नहीं, इस पर फैसला सुरक्षित रखा गया है।

आधार मामला 
38 दिनों की मैराथन सुनवाई के बाद आधार मामले में फैसला सुरक्षित रखा गया था। निजता को मौलिक अधिकार बताने का फैसला आने के बाद अब इस बारे में फैसला आएगा कि क्या आधार के लिए लिया जाने वाला डाटा निजता का उल्लंघन है या नहीं?

व्यभिचार का मामला
अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी दूसरी शादीशुदा महिला के साथ उसकी सहमति से संबंध बनाता है तो संबंध बनाने वाले पुरुष के खिलाफ उक्त महिला का पति अडल्टरी का केस दर्ज करवा सकता है, लेकिन संबंध बनाने वाली महिला के खिलाफ मामला नहीं बनता। संविधान पीठ ने इस कानूनी और सामाजिक तौर पर पेचीदा माने जा रहे मामले पर फैसला सुरक्षित रख दिया था। 


SC/ST प्रमोशन में आरक्षण  
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, SC/ST आरक्षण के तहत सेवा या नौकरी में लाभ पाने वाला व्यक्ति किसी दूसरे राज्य में उसका फायदा नहीं ले सकता है, जब तक कि वहां उसकी जाति सूचीबद्ध न हो। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले ने 30 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था। मामले को 7 जजों की संवैधानिक बेंच को रेफर किया जाए या नहीं, इस मसले पर भी फैसला आएगा।

कोर्ट में सुनवाई की रिकॉर्डिंग 
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में होने वाले अहम मुद्दों की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग से पारदर्शिता बढ़ेगी। इस मामले में भी फैसला सुरक्षित है। अब कोर्ट यह तय करेगा कि कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग होनी चाहिए या नहीं। 

दागियों के चुनाव लडऩे पर रोक  
सुप्रीम कोर्ट इस बात को तय करेगा कि जिन नेताओं के खिलाफ गंभीर मामले में आरोप तय हो गए हैं, उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए या नहीं? संविधान पीठ में उस याचिका पर सुनवाई हुई थी, जिसमें मांग की गई है कि गंभीर अपराधों में जिसमें सजा 5 साल से ज्यादा हो और आरोप तय होते हैं, तो उसके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए।


सबरीमाला में महिलाओं का प्रवेश 
सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में 10 साल से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को गलत माना है। जस्टिस दीपक मिश्रा का मानना है कि देश में प्राइवेट मंदिर का कोई सिद्धांत नहीं है। ये सार्वजनिक संपत्ति है और इसमें अगर पुरुषों को प्रवेश की इजाजत है तो फिर महिला को भी प्रवेश की इजाजत मिलनी चाहिए। संविधान पीठ ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी के खिलाफ याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। 


नेताओं की बतौर वकील प्रैक्टिस  
क्या एक सांसद या विधायक अपने पद पर रहते हुए अदालत में बतौर वकील प्रैक्टिस कर सकते हैं? इस मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट को फैसला करना है। पीठ इस महीने फैसला सुना सकती है।

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