ऑफ द रिकॉर्डः प्रशांत किशोर फिर नीतीश के साथ

नेशनल डेस्कः प्रशांत किशोर को बाहर का रास्ता दिखाने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव नीतिकार को फोन किया कि वह फिर से उनके लिए काम करें। ऐसी चर्चा है कि अलग-थलग हुए नीतीश कुमार खुद के लिए कठिन स्थिति महसूस कर रहे हैं क्योंकि भाजपा नेतृत्व 2019 के लोकसभा चुनावों के अभियान का नेतृत्व उनको सौंपने का इच्छुक नहीं लगता। बिहार में सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ बातचीत 12 जुलाई को होगी। नीतीश को उम्मीद है कि परिणाम कोई वांछित नहीं निकलने वाले। उन्होंने हताश होकर राजद को साथ मिलाने की कोशिश की और लालू प्रसाद यादव को फोन कर उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ की मगर लालू के दोनों पुत्रों ने नीतीश के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया की और कहा कि उनके लिए राजद के दरवाजे स्थायी रूप से बंद हो गए हैं।
PunjabKesari
इस पृष्ठभूमि में नीतीश ने फिर से प्रशांत किशोर को वापस बुलाने का फैसला किया है। यह प्रशांत किशोर ही थे जिन्होंने 2015 में जद (यू)-राजद, कांग्रेस महागठबंधन के लिए चुनावी रणनीति बनाई और उनको बड़ी जीत दिलाई। बाद में नीतीश की छुट्टी कर दी। जद (यू) के दो वरिष्ठ नेता के.सी. त्यागी और पवन वर्मा अब फिर से प्रशांत किशोर को नीतीश के खेमे में लौट आने के लिए राजी करने हेतु कड़ी मेहनत कर रहे हैं। प्रशांत किशोर भाग्यशाली रहे हैं कि अतीत में उन्होंने जिसका भी साथ दिया वह विजयी हुआ।
PunjabKesari
2014 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी के साथ थे तो वह जीत गए और 2015 के विधानसभा चुनावों में नीतीश को विजय दिलाई। 2014 में ऐतिहासिक जीत प्राप्त करने के तुरंत बाद मोदी कैम्प ने प्रशांत किशोर को बाहर का रास्ता दिखा दिया। प्रशांत किशोर अब अपने राजनीतिक प्रोजैक्ट पर काम कर रहे हैं लेकिन इस बार भी वह नीतीश के साथ काम करेंगे, यह यकीनी है।

PunjabKesari

यहाँ आप निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, भारत मॅट्रिमोनी के लिए!
× RELATED चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के राजनीतिक सफर की हुई शुरुआत, JDU में हुए शामिल