इन मंत्रों के जाप से मन की सभी अधूरी इच्छाएं होंगी पूरी

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शुक्रवार का दिन आदि शक्ति का माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन देवी मां को खुश करने के लिए जिस भी तरह का प्रयास किया जाता हो वो सफल हो जाता है। इतना ही नहीं बल्कि कहा जाता इस दिन देवी मां अपने भक्तों पर अधिक प्रसन्न रहती हैं, जिसके चलते इनकी पूजा करने नाले जातकों के मन की हर इच्छा बहुत शीघ्र पूर्ण हो जाती हैं। लेकिन कुछ लोगों इस बात से अंजान होते हैं कि देवी के किस मंत्र का जप किस कामना के लिए किया जाता है। आज हम इसी के बारे में बताने वाले हैं विभिन्न इच्छाओं या कामनाओं की पूर्ति के लिए विभिन्न मंत्रों का जाप किया जाता है। अधिक देर न करते हुऐ आपको बताते हैं माता रानी के उन शक्तिशाली मंत्रों के बारे में जिनके जाप से उस मुश्किल का भी समाधान निकल जाता है जो बहुत कोशिशों के बाद भी हो पाता। बता दें कि इन मंत्रों के अलावा मां भवानी का दुर्गा सप्तशती का पाठ भी हर तरह की विपत्ति से छुटकारा दिला देता है।

भय का नाश
सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्तिमन्विते ।
भये भ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमो स्तुते ॥

पापों का नाश
हिनस्ति दैत्येजंसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ॥

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मुसीबतों से मुक्ति
शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे ।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमो स्तुते ॥


बीमारी महामारी से बचाव 
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥

पुत्र प्राप्ति
देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥

महामारी नाश
जयन्ती मड्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमो स्तुते ॥

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शक्ति और बल प्राप्ति
सृष्टि स्तिथि विनाशानां शक्तिभूते सनातनि ।
गुणाश्रेय गुणमये नारायणि नमो स्तुते ॥


मनचाहे जीवसाथी
पुरुषों के लिए
ॐ कात्यायनि महामाये महायेगिन्यधीश्वरि ।
नन्दगोपसुते देवि पतिं मे कुरु ते नमः ॥

महिलाओं के लिए
पत्नीं मनोरामां देहि मनोववृत्तानुसारिणीम् ।
तारिणीं दुर्गसंसार-सागरस्य कुलोभ्दवाम् ।।

इसके अलावा मां भवानी के नौ शक्ति रुपी देवियों के बीज मंत्रों के जप से नौ के नौ देवियां स्वतः ही प्रसन्न होकर कृपा करने लगती हैं ।
 

नौ देवियों के स्वयं सिद्ध बीज मंत्र
शैलपुत्री :ह्रीं शिवायै नम: ।
ब्रह्मचारिणी :ह्रीं श्री अम्बिकायै नम: ।
चन्द्रघंटा :ऐं श्रीं शक्तयै नम: ।
कूष्मांडा :  ऐं ह्री देव्यै नम: ।
स्कंदमाता :ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम: ।
कात्यायनी : क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम: ।
कालरात्रि :क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम: ।
महागौरी : श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम: ।
सिद्धिदात्री : ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम: ।

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