राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासत गर्माई

जालंधर(नरेश कुमार) : राजस्थान में विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से 3 माह पूर्व ही राजस्थान कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासत तेज हो गई है। राजस्थान में कांग्रेस के चुनाव जीतने की स्थिति में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ-साथ सचिन पायलट और सी.पी. जोशी को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है लेकिन हाईकमान ने पार्टी में एकजुटता बनाने के लिए फिलहाल किसी नाम की घोषणा नहीं की है लेकिन पद के सारे दावेदार किसी न किसी रूप में अपनी दावेदारी पेश करने में लग गए हैं। मुख्यमंत्री पद के एक दावेदार सचिन पायलट इन दिनों विदेश में हैं और उनकी अनुपस्थिति में गहलोत समर्थक नेता लालचंद कटारिया ने राजस्थान में कांग्रेस को बचाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने की मांग कर डाली। कटारिया के बयान के बाद खुद अशोक गहलोत ने भी पत्रकारों के सवालों के जवाब में अपनी दावेदारी ठोक दी। गहलोत ने उदयपुर में उनकी दावेदारी को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि राजस्थान के लोग एक चेहरे से परिचित हैं जो 10 वर्षों तक मुख्यमंत्री रह चुका है। मुख्यमंत्री के इस चेहरे पर इससे अधिक और क्या स्पष्टीकरण हो सकता है।


कांग्रेस के सामने पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती 
दरअसल राजस्थान में कांग्रेस द्वारा हाल ही में अजमेर और अलवर के उप-चुनाव में जीत दर्ज किए जाने के बाद पार्टी का हौसला बुलंद हुआ है और पार्टी को लगता है कि इस विधानसभा चुनाव में राज्य में सोयासी बाजी पलट सकती है और वसुंधरा राजे सरकार के खिलाफ  लोगों में नाराजगी के चलते पार्टी एक बार फिर सत्ता में आ सकती है। लिहाजा यहां मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के बीच मुकाबला शुरू हो गया है जिससे पार्टी में एकजुट होकर चुनाव न लड़ने का खतरा भी सताने लगा है और पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती है।

पार्टी ने बयानबाजी से दूर रहने की दी चेतावनी
राजस्थान में कांग्रेस के मुख्यमंत्री उम्मीदवार को लेकर जारी विवाद के बीच पार्टी महासचिव और राज्य के पार्टी प्रभारी अविनाश पांडेय ने शनिवार को कहा कि चुनाव पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। राज्य में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होना है। पांडेय ने पार्टी नेताओं से कहा कि वे ऐसा कोई भी बयान जारी न करें जिससे पार्टी का अनुशासन भंग होता हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व इस तरह की किसी भी टिप्पणी को गंभीरता से लेगा। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में और वरिष्ठ नेताओं के सामूहिक योगदान के साथ लड़ा जाएगा और गैर जरूरी टिप्पणियां करने वाले नेताओं को टिकट नहीं दिया जाएगा।

कांग्रेस के पक्ष में क्या 

  • वसुंधरा राजे की सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं का जमीनी स्तर पर लोगों को लाभ नहीं मिल रहा जिस से लोगों में नाराजगी है। 
  • भाजपा का वोट बैंक समझा जाने वाला राजपूत और मीणा समुदाय सरकार द्वारा नजर अंदाज किए जाने से निराश है 
  • 1993 के बाद राजस्थान में हर पांच साल बाद सरकार बदलने का रुझान है


कांग्रेस के खिलाफ  क्या 

  • मुख्य मंत्री पद को लेकर अशोक गेहलोत और सचिन पायलट के धड़ों में आपसी खींच तान 
  • सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल के कारण कांग्रेस अति आत्म विश्वास की शिकार है और भाजपा के मुकाबले कम सक्रिय है 
  • पार्टी भाजपा के मुकाबले बूथ स्तर पर कमजोर है एहालाँकि इस मामले में कांग्रेस मेहनत कर रही है 

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