ऑफ द रिकॉर्डः मणिपुर हत्याओं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से PMO चिंतित

नेशनल डेस्कः प्रधानमंत्री कार्यालय (पी.एम.ओ.) सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से चिंतित है कि विद्रोहियों विरुद्ध अभियानों के दौरान मणिपुर में हुई हत्याओं के लिए सेना के अधिकारियों और सुरक्षा बलों के खिलाफ आपराधिक मामले दायर किए जाएं। सरकार सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अवकाश याचिका (एस.एल.पी.) दायर करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। जुलाई 2017 में न्यायाधीश मदन बी. लोकुर के नेतृत्व में उच्चतम न्यायालय की पीठ के आदेश से पैदा हुई स्थिति की पी.एम.ओ. समीक्षा कर रहा है। पीठ ने सी.बी.आई. को निर्देश दिया था कि वह मणिपुर में सुरक्षाबलों द्वारा किए गए कथित फर्जी मुठभेड़ों की जांच के लिए एक एस.आई.टी. गठित करे। सुप्रीम कोर्ट के 2 जजों की पीठ के फैसले ने मणिपुर में सेना के लिए एक संकटपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है।

सेना मणिपुर में अति गंभीर स्थिति में बागियों के खिलाफ लड़़ाई लड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का प्रभाव उपद्रव ग्रस्त जम्मू और कश्मीर में भी आतंकवादी विरोधी अभियानों पर पड़ सकता है जहां बड़े पैमाने पर अभियान जारी है। मगर सुरक्षाबलों ने कहा कि उनके लिए ये अभियान जारी रखने बहुत ही कठिन हो जाएंगे अगर आपराधिक मामले दर्ज करने की तलवार उनके सिरों पर लटकी रहेगी। उच्चतम न्यायालय की पीठ ने सी.बी.आई. के निदेशक को सुरक्षाबलों के खिलाफ जांच की धीमी गति के लिए उनका स्पष्टीकरण लेने के बाद जाने दिया।

मगर केंद्र इस बात को लेकर चिंतित है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के संदर्भ में ऐसी कुछ याचिकाएं जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में भी लम्बित हैं। सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने पी.एम.ओ. के समक्ष स्थिति की गंभीरता को रखा है और साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी दलील दी है कि उच्चतम न्यायालय के फैसले की तुरन्त समीक्षा किए जाने की जरूरत है। पी.एम.ओ. में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई और ङ्क्षचतित पी.एम.ओ. अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा करवाना चाहता है। 

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