UT के सभी विभागों से मांगा जा सकता है पौधों का सर्वाइवल पर्सेंटेज

चंडीगढ़(विजय) : यू.टी. प्रशासन द्वारा अपने सभी विभागों से ग्रीनिंग चंडीगढ़ एक्शन प्लान 2019-20 के लिए डाटा मांगा जा रहा है। मॉनसून से पहले प्रशासन की ओर से यह प्लान रिलीज किया जाएगा। लेकिन यह भी जानकारी मांगी जा सकती है कि किस विभाग ने पिछले साल कितने पौधे लगाए और उनमें से कितने अभी भी मौजूद हैं? 

दरअसल हर साल यू.टी. के फॉरैस्ट एंड वाइल्ड लाइफ डिपार्टमैंट की ओर से यह प्लान तो तैयार किया जाता है। लेकिन इसमें यह जानकारी नहीं मिलती कि पिछले साल लगाए गए कितने पौधे अभी भी कायम हैं। 2018-19 के एक्शन प्लान के तहत पूरे चंडीगढ़ में मॉनसून सीजन के दौरान 2,43,000 पौधे लगाए गए थे। इनमें नीम, जामुन, अर्जुन, आम, कुसुम, पीपल, कचनार, अमलतास के साथ-साथ कईं औषधीय और हर्बल प्लांट्स भी शामिल थे। 

यू.टी. के फॉरैस्ट एंड वाइल्ड लाइफ डिपार्टमैंट ने फैसला लिया था कि अब सभी विभागों से फीडबैक भी लिया जाएगा कि कितने पौधे अभी भी कायम हैं? बात की जाए पिछले वर्षों की तो फॉरैस्ट डिपार्टमैंट प्रशासन का ऐसा विभाग है जो दावा कर रहा है कि 2017 में 75000 पौधों में से 80 प्रतिशत इस साल भी मौजूद हैं। इनमें से अधिकांश पौधे सुखना वाइल्ड लाइफ सैंक्चुरी में लगाए गए हैं। दूसरी ओर नगर निगम और प्रशासन के हॉर्टिकल्चर विभागों द्वारा पौधे शहर में खाली जगहों पर लगाए जाते हैं।

ग्रीन कवर एरिया में थोड़ा सुधार :
जिस तरह से शहर में हर साल लाखों पौधे लगाए जाते हैं, उसी तरह शहर का ग्रीन कवर एरिया भी तेजी से बढऩा चाहिए। लेकिन स्थिति इतनी अच्छी नहीं है। फॉरैस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफ.एस.आई.), देहरादून की इंडिया स्टेट ऑफ फॉरैस्ट रिपोर्ट (आई.एस.एफ.आर.) रिपोर्ट के अनुसार 2015 के मुकाबले शहर का 

ग्रीन कवर एरिया नाममात्र का बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार 2015 में चंडीगढ़ का ग्रीन कवर एरिया 57.03 स्क्वेयर किलोमीटर दर्ज किया गया था। जबकि 2017 में यह बढ़कर 57.56 स्क्वेयर किलोमीटर रिकॉर्ड हुआ है।

यहां लगाए गए पौधे :
सुखना वाइल्ड लाइफ सैंक्चुरी, रिजर्व फॉरैस्ट, रोड साइड और सैंट्रल वर्ज, पार्क, ग्रीन बैल्ट, कम्यूनिटी लैंड, सरकारी ऑफिस, रैजिडैंशियल कांप्लैक्स, मार्कीट और अन्य ओपन स्पेस।

इनकी मुख्य जिम्मेदारी :
फॉरैस्ट डिपार्टमैंट            63000
हॉर्टिकल्चर डिवीजन, निगम    40000
हॉर्टिकल्चर डिवीजन, यू.टी.    20000

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