Kundli Tv- आज रात होगा नक्षत्रों की चाल में बदलाव, 20 नवंबर तक रहें सावधान !

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सनातन धर्म में कोई भी मंगलसूचक काम करने से पहले शुभ और अशुभ मुहूर्त पर विचार किया जाता है। ज्योतिष गणना हिंदू पंचांग के अधार पर काम करती है। मान्यता है की शुभ ग्रह-नक्षत्रों को ध्यान में रखकर किया गया काम कभी भी असफल नहीं होता लेकिन अशुभ वक्त में किया गया काम पूरा होने में संशय रहता है। ज्योतिष प्रणाली में पंचक को अशुभ दौर माना जाता है। इसमें कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता। आज रात यानि 15 नवंबर, बृहस्पतिवार को लगभग 10.17 से पंचक शुरू होगा, जो 20 नवंबर, मंगलवार की शाम लगभग 06.34 तक रहेगा।


वीरवार के दिन से शुरू होने वाले पंचक को सोमवार और मंगलवार के प्रभाव, शुभता और अशुभता के जैसा ही समझना चाहिए। पंचक वैसे तो अशुभता दर्शातें हैं किन्तु सगाई, विवाह आदि मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। पंचक के दौरान कुछ कार्यों को छोड़कर बाकी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

पंचक नक्षत्रों के समय अलग-अलग प्रभाव होता है जैसे धनिष्ठा नक्षत्र में अग्रि का भय हो सकता है, शतभिषा नक्षत्र के समय घर में अनावश्यक लड़ाई-झगड़ा, पूर्वाभाद्रपद में व्यक्ति को रोग लग सकता है, उत्तराभाद्रपद और रेवती में धन की हानि हो सकती है अथवा आर्थिक नुक्सान हो सकता है।

पंचक का अधिकतर विचार मृत्यु के समय किया जाता है जैसे अगर किसी की मृत्यु पंचक के दौरान हो गई तो उसके परिवार के 5 सदस्यों पर मृत्युतुल्य कष्ट आता है या कहा जा सकता है कि परिवार में 5 लोगों की भी मृत्यु होगी इसलिए अगर किसी की मृत्यु पंचक में हो जाए तो उसके दाह संस्कार के दौरान चावल और आटे को मिलाकर अथवा कुश घास के पांच पुतले बनाकर उनका भी शव के साथ दाह संस्कार किया जाए तो पंचक का दोष नष्ट हो जाता है।
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