नजरिया : पाक आवाम की आतंक को ना, विकास को हां

नेशनल डेस्क (संजीव शर्मा ): पाकिस्तान का नया निजाम तय हो गया है। क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान अब पड़ोसी मुल्क के प्रधानमंत्री होंगे। उनकी पार्टी तहरीक -ए -इन्साफ को आलमी इन्तखाबात में सबसे अधिक सीटें मिली हैं। सत्ताधारी नवाज शरीफ मुस्लिम लीग दूसरे नंबर पर रही है और भुट्टो खानदान की पार्टी पीपीपी तीसरे स्थान पर। खास बात यह कि शाहबाज शरीफ और बिलावल भुट्टो चुनाव हार गए हैं। यानी पूरा मैदान साफ है।



इमरान खान ने इस बार नया पाकिस्तान बनाने का नारा दिया था जिसे लोगों ने हाथों हाथ लिया। इस नारे ने इमरान खान और पाकिस्तान की सियासत की तासीर भी बदल डाली। इमरान को अब तक भारत विरोधी और कटटरवादी तथा आतंकी संगठनों के करीब माना जाता था। विरोधी तो उन्हें पाकिस्तान का तालिबान भी कहते थे। लेकिन ऐन मौके पर इमरान खान ने भ्ष्र्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद की और विकास की बात छेड़ी। तब इसे उनका यू टर्न कहा गया, लेकिन बाद में पकिस्तान का सारा चुनाव इन्हीं मसलों के इर्द-गिर्द हो गया। यहां तक की इमरान खान को  मिली सफलता में भी इस बात को अहम माना जा रहा है। क्योंकि जबतक वे कटटरवादी और भारत विरोधी थे तब उनकी पार्टी के तमाम उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई थी। पिछले चुनाव में भी वे महज 34 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर थे।  


चुनाव प्रचार से कश्मीर गायब 
अब तक पाकिस्तान के जितने भी चुनाव हुए हैं उनमे कश्मीर मुख्य मुद्दा रहा है।  कमोबेश हर सियासी दल ने इस मसले पर लोगों की भावनाओं को भड़काकर  वोट हासिल किए हैं, लेकिन इस बार पहली दफा पाकिस्तान के चुनाव में कश्मीर राग नहीं सुनाई दिया। उलटे इमरान खान ने तो नरेंद्र मोदी का उदाहरण देकर लोगों को कहा कि वे भी  इसी तरह पाकिस्तान की तस्वीर बदलेंगे जैसे मोदी ने भारत में भ्ष्र्टाचार पर हमला बोलकर  किया है। साफ है कि लोग अब कश्मीर नहीं  विकास चाहते हैं. उन्हें पता चल गया है कि असली जरूरत क्या है।  



आतंक को नकारा 
पाकिस्तानी चुनाव का सबसे बड़ा नतीजा यह रहा है कि वहां की जनता ने जम्हूरियत को तरजीह दी है और आतंक और आतंकी संगठनों को नकार दिया है। इस चुनाव में आतंकी हाफिज सईद ने अल्लाह-हू-अकबर तहरीक नाम की पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा था। उसने 265 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई। यहां तककि हाफिज सईद का बेटा तलाह सईद और दामाद हाफिज वलीद भी बुरी तरह हार गए। यह एक बड़ा और कडा सन्देश है जो पाकिस्तान के आवाम ने दिया है। सन्देश यह कि  वे आतंक  को नहीं चाहते उसे बुरी तरह से नकार दिया गया है।



फिर से जगी नई उम्मीदें 
पाकिस्तान के चुनाव की इन सब बातों ने इस बात की उम्मीदें जगा दी हैं कि पाकिस्तान अपने आतंक के पोषक राष्ट्र की छवि से बाहर आने की कोशिश करेगा और नई शुरुआत करेगा। इमरान खान का अपने विचारों में तब्दीली करना , लोगों का विकास के नाम पर वोट देना और आतंक को नकारना। यह सब इंगित करता है कि पाकिस्तानी भी दुनिया की मुख्यधारा के साथ बेहतर जीवन की कामना करते हैं। ऐसे में हिंदुस्तान के साथ  उसके रिश्तों पर भी नए सिरे से बातचीत का रास्ता खुलने के आसार बढ़ गए हैं। शेष इमरान खान की लाइन ऑफ एक्शन पर तय करेगा जो जल्द ही सामने आ जाएगी।  

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