अॉफ दि रिकार्ड: अखिलेश-माया ने कांग्रेस में पैदा की कंपकंपी

लखनऊ: भाजपा नेतृत्व इस बात को यकीनी बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है कि उत्तर प्रदेश में सपा, बसपा, रालोद और कांग्रेस का महागठबंधन किसी भी सूरत में कामयाब न हो पाए। इस संबंध में विभिन्न स्तरों पर बहुत-सी ताकतें काम कर रही हैं। इन्हीं प्रयासों के कारण ही विपक्षी पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे की औपचारिक घोषणा रोक दी गई है।

ऐसी चर्चा है कि सपा-बसपा ने कांग्रेस को केवल 5 लोकसभा सीटों की पेशकश की है। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने वार्तालाप के दौरान उत्तर प्रदेश में 10 सीटों पर सहमति दिखाई है मगर जब मायावती ने यह शर्त लगाई कि कांग्रेस अन्य राज्यों में बसपा के साथ लोकसभा सीटों की सांझेदारी करे जहां उसका प्रभाव है तो कांग्रेस बैकफुट पर हो गई। बसपा महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब और हरियाणा में 35 सीटें चाहती है और वह 30 सीटों पर सहमत हो सकती है।

सीटों का बंटवारा अभी तक नहीं सुलझ पाया क्योंकि कांग्रेस केवल उत्तर प्रदेश तक ही गठबंधन चाहती है जबकि मायावती दूसरे राज्यों में भी गठबंधन के पक्ष में हैं। सपा और बसपा अपनी कीमत पर कांग्रेस को अधिक सीटें देने के पक्ष में नहीं क्योंकि राष्ट्रीय पार्टी की अपर कास्ट के वोट अतीत में कभी भी उनके पक्ष में स्थानांतरित नहीं हुए मगर कांग्रेस को विश्वास है कि सपा, बसपा स्थिति को पहचानेंगी और उसे सम्मानजनक सीटें देने को राजी हो जाएंगी। कांग्रेस उत्तर प्रदेश के बाहर बसपा को 15-16 और सपा को 2-3 सीटें देने पर सहमत हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में सपा और बसपा कांग्रेस के उम्मीदवार अजय राय का समर्थन करने को राजी हैं।

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