समर्थन मूल्य के लिए अब दो विकल्प

नई दिल्लीः केंद्र सरकार की कोशिश है कि फसल सत्र 2018-19 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी का लाभ ज्यादा से ज्यादा किसानों को मिले। सरकार यह सुनिश्चित के लिए दो योजनाओं पर ध्यान दे रही है। सूत्रों ने कहा कि वर्तमान मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) मोटे अनाज और दलहन के लिए जारी रखी जा सकती है, जबकि तिलहन के लिए राज्य सरकार पीएसएस या मध्य प्रदेश भावांतर भुगतान योजना (बीबीवाई) में किसी को भी अपनाने के लिए स्वतंत्र होंगी। मूल्य समर्थन योजना के तहत गेहूं एवं चावल से इतर फसलों की कीमतों में गिरावट के समय राज्य सरकार नेफेड जैसी केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर खरीदारी करती हैं। इसका खर्च केंद्र सरकार वहन करती हैं। 

अधिकारियों ने कहा कि पिछले साल केंद्र सरकार ने मूल्य समर्थन योजना के तहत करीब 290 अरब रुपए के दलहन एवं तिलहनों की खरीदारी की थी। यह एक नया रिकॉर्ड था। अधिकारियों ने कहा कि पीएसएस और भावांतर के अलावा तिलहन एवं दलहन की खरीदारी के लिए निजी उद्यमियों को मंजूरी का प्रायोगिक परीक्षण भी किया जा सकता है। इसे मिलने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर इसका विस्तार किया जा सकता है।  एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'गेहूं और चावल के अलावा अन्य फसलों की किसानों से खरीद के लिए वर्तमान उपलब्ध विकल्पों से ही कोई अपनाया जाएगा। हम ऐसी कोई प्रणाली शुरू नहीं कर सकते, जिसे लंबी अवधि में बनाए रखना मुश्किल हो।'

उन्होंने कहा कि इसके लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है और खरीद प्रणाली का अंतिम फैसला चालू खरीफ सीजन की फसलें बाजार में आने से पहले लिया जाएगा। दोनों प्रस्तावों के वित्तीय असर का आकलन किया जा रहा है। नीति आयोग ने कुछ महीनों पहले एक प्रस्ताव में खरीद के तीन मॉडल सुझाए थे। पहला, मार्केट एश्योरेंस स्कीम (एमएएस) है, जिसके तहत केंद्र सरकार राज्यों को फसलों की कीमतें एमएसपी से नीचे आने पर बाजार में हस्तक्षेप करने की स्वतंत्रता देेती है और खुद नुकसान का एक हिस्सा वहन करती है। 

दूसरा मॉडल कीमत अंतर भुगतान है, जो मध्य प्रदेश की भावांतर भुगतान योजना पर आधारित है। तीसरा मॉडल सरकार के पक्ष में खरीदारी की निजी उद्यमियों को मंजूरी देना है। तीनों मॉडलों को लेकर विभिन्न मंचों और राज्य सरकारों के साथ व्यापाक चर्चा हुई है। हालांकि ऐसा लगता है कि केंद्र ने कुछ समय तक मूल्य समर्थन योजना पर ही निर्भर रहने का फैसला किया है। वहीं राज्यों को तिलहनों के लिए भावांतर भुगतान योजना को अपनाने का विकल्प दिया है।  मध्य प्रदेश सरकार और कुछ अन्य राज्यों ने पहले ही खरीफ 2018 के लिए इन योजनाओं में किसानों को पंजीकृत करना शुरू कर दिया है। केंद्र ज्यादा से ज्यादा किसानों को एमएसपी का लाभ सुनिश्चित करने के लिए इन योजनाओं का मिलाजुला स्वरूप इस्तेमाल कर सकता है। 

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