अब राजधानी में करिए 7 अजूबों का एक साथ दीदार

नई दिल्ली (प्रगनेश सिंह):विश्व के सातों अजूबों के आकर्षक मॉडल राजधानी में बनकर तैयार हैं। कबाड़ से बनाई गई इन अनूठी कलाकृतियों का दीदार करना अपने आप में अलग ही अनुभव होगा। दक्षिणी नगर निगम ने सराय काले खां स्थित मिलेनियम पार्क में अजूबों के मॉडल बनाए हैैं। मंगलवार को इन अजूबों का औपचारिक लोकार्पण किया जाना था, लेकिन फिलहाल यह कार्यक्रम टाल दिया गया है।

अजूबों को निगम के स्टोर रूम में रखे कबाड़ जैसे स्ट्रीट लाइट के खंभे, नट बोल्ट, टीन आदि से तैयार किया गया है। दक्षिणी निगम के आयुक्त डॉ. पुनीत कुमार गोयल ने बताया कि यह पार्क दिल्ली के बेहतरीन पर्यटन स्थलों में शुमार होगा। टिकट खरीदकर लोग अजूबों के मॉडल देख सकेंगे।

 

70 फुट ऊंचा है एफिल टॉवर
निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मॉडलों को तैयार कराने में करीब 7.5 करोड़ रुपए की लागत आई है। पहले 19 करोड़ रुपए की लागत से ईंट- पत्थरों की मदद से मॉडल बनाने की योजना थी, लेकिन निगम ने कबाड़ का उपयोग करके इसे पूरा किया। निगम के मुताबिक प्रत्येक अजूबे की ऊंचाई 20 से 25 फुट है। वहीं एफिल टॉवर की ऊंचाई 70 फुट है। यहां पर दर्शकों की सुविधा के लिए फूड स्टॉल भी खोले जाएंगे। 

 

पीसा की मीनार की बात ही क्या!
लीनिंग टावर ऑफ पीसा यानी पीसा की मीनार के मॉडल को बनाने में भी साइकिल के रिंग, ऑटो मोबाइल पार्ट, मेटल शीट, इलेक्ट्रिक केबल रोल का इस्तेमाल किया गया है। वास्तविकता में इटली में बनी लीनिंग टावर ऑफ पीसा नामक मीनार निर्माण के बाद से ही लगातार नीचे की ओर झुकी है। इसकी ऊंचाई 183.3 फीट है। निर्माण में काले संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है।

 

ताजमहल का दीदार तो देखने लायक

ताजमहल के निर्माण में दक्षिणी नगर निगम ने करीब 1600 साइकिल के रिंग के अलावा पाइप, एंगल, नट बोल्ट, मेटल शीट, स्प्रिंग, ऑटोमोबाइल पार्ट, बिजली के खंभे, खाना बनाने की कढ़ाई, पार्क की बेंच आदि का इस्तेमाल किया है। वास्तविकता में ताजमहल का निर्माण सन 1648 में आगरा में पूरा किया गया था। 


कोलोसियम को देखते रह जाएंगे
फ्लावियन एम्फीथिएटर यानी इटली का कोलोसियम के मॉडल को बनाने में कार की रिम, बच्चों के झूलों के पाइप, झूलों का स्लाइडर, साइकिल के रिम, ऑटोमोबाइल पार्ट, ट्रक की मेटल शीट और बिजली के खंभे का इस्तेमाल किया गया है। वास्तव में यह रोमन साम्राज्य का सबसे विशाल फ्लावियन एम्फीथिएटर है। इसका निर्माण तत्कालीन शासक वेस्पियन ने 70.72 ईस्वी के मध्य प्रारंभ किया और 80 ईस्वी में सम्राट टाइटस ने इसे पूरा कराया था।


न्यूयार्क का स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी
स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के मॉडल का निर्माण रेहड़ी की कमानी, बाइक की चेन, ऑटो मोबाइल पार्ट्स जैसे, गियर, चेन, गाड़ी की रिम की प्लेट, एंगल आदि से किया गया है। वास्तविकता में यह मूर्ति न्यूयार्क में बनाई गई है। जिसकी ऊंचाई 151 फिट लंबी है। 22 मंजिला इस मूर्ति के ताज तक पहुंचने के लिए 354 घुमावदार सीढिय़ां चढऩी पड़ती हैं।


खूबसूरत है क्राइस्ट दी रिडीमर प्रतिमा
क्राइस्ट दी रिडीमर प्रतिमा के मॉडल को बनाने में भी ट्रक की मेटल शीट, ऑटोमोबाइल पाट्र्स, रेहड़ी की कमानी, रिक्शों की स्प्रिंग, बाइक की चेन, गार्डन की बेंच आदि का प्रयोग किया गया है। वास्तविकता में क्राइस्ट द रिडीमर को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आर्ट डेको स्टैच्यू माना जाता है। ब्राजील के रियो डी जेनेरो में यह प्रतिमा 9.5 मीटर आधार सहित 39.6 मीटर ऊंची और 30 मीटर चौड़ी है।


एफिल टॉवर की ऊंचाई सबसे ज्यादा
पार्क में तैयार किए गए मॉडल में सबसे ऊंचा है एफिल टॉवर। इसके निर्माण में एंगल, डील टैंक, पहिये के नट, बोल्ट, साइकिलों के रिम, पार्क में लगी रेलिंग, पार्क के गेट के सरिये से किया गया है। वास्तविकता में इसका निर्माण 1887-1889 में शैपदेमार्स में सीन नदी के तट पर पेरिस में हुआ है। इसकी ऊंचाई 300 मीटर है।


मिस्र के गीजा के पिरामिड
गीजा पिरामिड के निर्माण में करीब 20 हजार फीट की लंबाई में बिजली के खंभों का इस्तेमाल किया गया है। वास्तविकता में यह पिरामिड 450 फुट ऊंचा है। 
इसका आधार 13 एकड़ में फैला है जो करीब 16 फुटबाल मैदानों जितना है। यह 25 लाख चूना पत्थरों के खंडों से निर्मित है, जिनमें से हर एक का वजन 2 से 30 टनों के बीच है।
 

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