निशंक के मेडिकल कॉलेज को जमीन आवंटन के मामले में फैसला सुरक्षित

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं लोकसभा सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल‘निशंक’के आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज को निशुल्क भूमि आवंटन के मामले में सुनवाई पूरी हो गयी है। न्यायालय ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।  इस मामले में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने सुनवाई पूरी कर ली है और न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

दरअसल यह मामला वर्ष 2005 का है जब पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के शासनकाल में हिमालयन आयुर्वेदिक सोसाइटी को श्यामपुर ऋषिकेश में सरकार ने 10 एकड़ जमीन आवंटित कर दी थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के एल वर्मा ने बताया कि निशुल्क जमीन के आवंटन के इस मामले में प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। श्री वर्मा के अनुसार तत्कालीन सरकार ने निशुल्क भूमि का आवंटन राजस्व विभाग की आपत्ति के बावजूद कर दिया, जो कि गलत है। 


भूमि का निशुल्क आवंटन मंत्रिमंडल की अनुमति के बगैर नहीं हो सकता और सरकार ने भूमि आवंटन के लिये तत्कालीन मंत्रिमंडल की अनुमति नहीं ली थी। याचिकाकर्ता ने इस मामले को एक जनहित याचिका के माध्यम से वर्ष 2013 में उच्च न्यायालय में चुनौती दी और कहा कि यह सोसाइटी पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता डॉ. निशंक की है। उनके निकट संबंधी एवं बेहद नजदीकी लोग इस सोसाइटी के कर्ताधर्ता हैं।  
 

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