आपके सहयोग से ‘जग बाणी’ 44वें वर्ष में प्रवेश

2021-07-21T05:42:50.52

आज 21 जुलाई का दिन ‘पंजाब केसरी पत्र समूह’ के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि 43 वर्ष पूर्व आज के ही दिन आपके प्रिय पंजाबी दैनिक ‘जग बाणी’ के प्रकाशन का श्रीगणेश जालंधर से हुआ था और अब यह अपने 44वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। 

‘हिंद समाचार’ (उर्दू) और ‘पंजाब केसरी’ (हिन्दी) के बाद ‘पंजाब केसरी पत्र समूह’ द्वारा पंजाबी भाषा में प्रकाशित किया जाने वाला ‘जग बाणी’ हमारे पत्र समूह का तीसरा अखबार था। ‘पंजाब केसरी पत्र समूह’ को यह श्रेय जाता है कि हम उत्तर भारत की तीनों लोकप्रिय भाषाओं में समाचारपत्र प्रकाशित कर रहे हैं। जिस समय ‘जग बाणी’ का प्रकाशन आरंभ हुआ, उस समय पंजाबी के 5-6 समाचारपत्र पहले ही प्रकाशित हो रहे थे लेकिन  ‘जग बाणी’ किसी पार्टी और विचारधारा से जुड़े बगैर पूर्णत: स्वतंत्र और निष्पक्ष समाचारपत्र के रूप में आरंभ किया गया जो आज भी जारी है। 

उर्दू पढऩे वाले ‘हिंद समाचार’ के पाठक, जिन्होंने 1948 में इसे पढऩा शुरू किया था, आज वे एक-एक करके हमसे बिछुड़ते जा रहे हैं और उनकी सं या भी कम हो रही है परंतु जब ‘पंजाब केसरी’ और ‘जग बाणी’ पढऩे वाले हमारे उन बुजुर्ग पाठकों के बच्चे हमें मिलते हैं तो वे बड़े गर्व से बताते हैं कि उनके माता-पिता ‘हिंद समाचार’ पढ़ा करते थे। वरिष्ठ अकाली नेता श्री प्रकाश सिंह बादल के छोटे भाई स्व. गुरदास सिंह बादल के सुपुत्र मनप्रीत सिंह बादल, जो पंजाब सरकार में आजकल वित्त मंत्री हैं, ने एक बार मुझे बताया था कि वह अपने पिता जी को प्रतिदिन ‘हिंद समाचार’ लाकर दिया करते थे। 

आदरणीय पिता लाला जगत नारायण जी ने 1978 में जब पंजाबी दैनिक ‘जग बाणी’ का प्रकाशन शुरू करने की बात की तो हम दोनों भाइयों, श्री रमेश जी और मैंने उनसे कहा कि इसे चलाना मुश्किल होगा। हमने स्थान की कमी, स्टाफ और छपाई की समस्या आदि का उल्लेख किया क्योंकि उन दिनों ‘हिन्द समाचार’ और ‘पंजाब केसरी’ लगातार शिखर की ओर बढ़ रहे थे। ‘हिंद समाचार’ भारत में न बर एक उर्दू दैनिक बन चुका था तथा ‘पंजाब केसरी’ की प्रसार सं या भी क्षेत्र के अन्य हिन्दी दैनिकों की तुलना में कई गुणा बढ़ रही थी। 

हमारी शंकाओं का निराकरण करके पिता जी ने हमें प्रोत्साहित करते हुए कहा, ‘‘सब कुछ हो जाएगा।’’  पिता जी का कहना सच सिद्ध हुआ और उनकी दूरदृष्टिï व दृढ़ निश्चय की बदौलत ही तब  ‘जग बाणी’ का प्रकाशन संभव हो पाया। ‘हिंद समाचार’ का प्रकाशन 4 मई, 1948 को 1800 प्रतियों तथा  ‘पंजाब केसरी’ का 13 जून, 1965 को 3500 प्रतियों से शुरू हुआ था जबकि ‘जग बाणी’ का प्रकाशन 21 जुलाई, 1978 को मात्र 8000 प्रतियों के साथ शुरू हुआ। आज ‘जग बाणी’ जालंधर के अलावा तीन अन्य केंद्रों लुधियाना, चंडीगढ़ और बठिंडा से भी प्रकाशित हो रहा है तथा आई.आर.एस. 2019 के अनुसार इसकी पाठक सं या 39.77 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है।

‘जग बाणी’ की पृष्ठ संख्या 6-8 हुआ करती थी। विभिन्न विशेष एडीशनों का मुखपृष्ठï नीला प्रकाशित होता था। इसके सामान्य संस्करण का मूल्य 30 पैसे तथा रविवारीय संस्करण का मूल्य 35 पैसे होता था। अब  इसकी दैनिक पृष्ठ संख्या 16 से 18 तक हो गई है और हर पृष्ठ चार रंगों का होता है। प्रत्येक जिले के लिए अलग ‘पुल आऊट’ प्रकाशित किया जाता है। 

कुल मिला कर पूज्य पिता लाला जगत नारायण जी के आशीर्वाद, श्री रमेश जी तथा परिवार के अन्य सदस्यों चिरंजीव अविनाश और अमित की मेहनत, बेहतरीन छपाई तथा साजसज्जा, अच्छे लेखकों के योगदान और विज्ञानपनदाताओं के सहयोग से ही ‘जग बाणी’ का सफलता के शिखर तक पहुंचना संभव हो सका है। प्रैस लोकतंत्र का चौथा स्तभ है और लोकतंत्र प्रैस तथा न्यायपालिका के दम पर ही टिका हुआ है। लोकतंत्र के अन्य स्त भों के बारे में तो लोग सब कुछ जानते ही हैं। अत: हमारी प्रभु से यही प्रार्थना है कि हमें अपने आदर्शों पर अडिग रहने की शक्ति दें। 

हम आशा करते हैं कि भविष्य में भी सबका सहयोग इसी प्रकार मिलता रहेगा जिससे हम ‘जग बाणी’ को और अधिक ऊंचाइयों तक ले जाने में सफल होंगे। हम आगे भी निष्पक्ष रहते हुए आपके प्रिय समाचारपत्र को पहले से बेहतर बनाने के लिए सतत प्रयत्नशील रहने का संकल्प दोहराते हैं।—विजय कुमार


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Chief Editor

vijay kumar

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