‘विजयदशमी’ पर्व और ‘गरबा’ के दौरान भी हुईं दुखद घटनाएं

punjabkesari.in Friday, Oct 07, 2022 - 03:08 AM (IST)

देश में इस समय उत्सवों का महीना चल रहा है। हाल ही में गणेशोत्सव और नवरात्रि के बाद विजयदशमी का पावन पर्व सम्पन्न हुआ है। उल्लास के इस पर्व पर विभिन्न कारणों से होने वाली दुखद घटनाएं हर्ष को विषाद में बदल रही हैं। इनमें से हुई चंद घटनाएं निम्र में दर्ज हैं : 

* 2 अक्तूबर को भदोही (उत्तर प्रदेश) में दुर्गा पूजा पंडाल में भीषण आग लग जाने से 8 लोगों की मौत हो गई जबकि 42 को गंभीर हालत में वाराणसी के अस्पताल में भर्ती करवाया गया। 
* 4 अक्तूबर रात को इंदौर (मध्य प्रदेश) के मां शारदा नगर में एक हैरान करने वाली घटना में अपनी मां की गोद में बैठकर गरबा देख रही 11 वर्षीय बच्ची के सिर में अचानक गोली लग जाने से उसकी मौत हो गई। 

* 5 अक्तूबर को बेगूसराय में दुर्गा पूजा के बाद सामान को विसर्जन के लिए ले जाते समय 2 मोटरसाइकिल सवार चचेरे भाइयों को तेज रफ्तार ट्रक ने कुचल दिया जिससे दोनों की मृत्यु हो गई। 
* 5 अक्तूबर को ही पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में मूर्ति विसर्जन के समय अचानक आई बाढ़ में 8 लोगों की मौत हो गई।

* 5 अक्तूबर को राजस्थान में अजमेर के नसीराबाद के नांदला गांव में 6 लोगों की माता की मूर्ति विसर्जन के दौरान गहरे पानी वाली खाई में उतरने के कारण डूब जाने से मौत हो गई। 
* 5 अक्तूबर को ही चित्तौडग़ढ़ में 3 तथा धौलपुर में मूर्ति विसर्जन के दौरान पानी में डूबने से 1 बच्चे की जान चली गई। 
* 5 अक्तूबर को ही यमुनानगर (हरियाणा) स्थित माडल टाऊन की दशहरा ग्राऊंड में रावण दहन के दौरान जलता हुआ रावण का पुतला लोगों के पास आ गिरा। 

सरकार द्वारा ऐसे उत्सवों आदि पर किसी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए किए जाने वाले ‘प्रबंधों’ के बावजूद ऐसी घटनाएं किसी सीमा तक प्रबंधकीय त्रुटियों और लोगों की लापरवाही का ही परिणाम हैं। हर्ष और उल्लास के पर्वों का इस प्रकार शोक पर्व में बदल जाना अत्यंत दुखद है परंतु इसके लिए हमारी जल्दबाजी, हड़बड़ी, सब कुछ फटाफट निपटाने की प्रवृत्ति ही जिम्मेदार है जबकि ऐसे आयोजनों में जोश के साथ-साथ होश और स्वयं पर नियंत्रण व धैर्य रखना बहुत जरूरी है।—विजय कुमार 


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