कश्मीर में आतंकियों का बंद होने लगा जन समर्थन ‘ग्रामीणों ने 2 खूंखार आतंकी पकड़ पुलिस हवाले किए’

punjabkesari.in Tuesday, Jul 05, 2022 - 03:53 AM (IST)

आतंकवाद पीड़ित जम्मू-कश्मीर को 5 अगस्त, 2019 को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली धाराएं 370 और 35-ए रद्द कर तब यह आशा बनी थी कि कश्मीर घाटी में व्याप्त हिंसा कम होगी तथा स्थिति बदलेगी परंतु पिछले कुछ समय से एक बार फिर वहां आतंकी घटनाएं बढऩे लगी हैं। आतंकवादियों ने घाटी में लोगों को चुन-चुन कर और लक्षित करके हत्याएं शुरू कर दी हैं जिनमें अध्यापक, मुस्लिम पुलिस कर्मी, प्रवासी अल्पसंख्यक तथा कश्मीरी पंडित शामिल हैं। 

घाटी में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए जहां पहले सीमा पार युवकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा था वहीं अब इसके लिए उन्हें ऑनलाइन ट्रेनिंग देने के अलावा ड्रोन आदि से हथियारों की सप्लाई की जा रही है। ऐसे हालात में घाटी में बदलाव का एक संकेत 3 जुलाई, 2022 को मिला, जब रियासी जिले की माहौर तहसील से लगभग 25 किलोमीटर दूर तुकसिन ढोक नामक गांव के निवासियों ने गांव के जंगल में छिपने पहुंचे लश्कर-ए-तैयबा के 2 वांछित आतंकवादियों को पकड़कर रस्सों से बांध कर माहौर क्षेत्र की पुलिस के हवाले कर दिया। इन दोनों आतंकवादियों की पहचान भगौड़ा घोषित तालिब हुसैन व फैसल अहमद डार के रूप में हुई है। जम्मू क्षेत्र के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह के अनुसार इनके कब्जे से 2 ए.के. 47 राइफलें, 7 ग्रेनेड, 1 पिस्तौल और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद हुआ। 

इसके अगले दिन 4 जुलाई को तालिब हुसैन की निशानदेही पर आतंकवादियों के ठिकाने से 6 स्टिकी बम, एक पिस्तौल, पिस्तौल की 3 मैगजीनें, पिस्तौल के कारतूस, एक अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर, इसके 3 ग्रेनेड, ए.के. असाल्ट राइफल के 75 कारतूस तथा एंटीना के साथ एक आई.ई.डी. रिमोट बरामद किया। अनेक आई.ई.डी. धमाकों का मास्टर माइंड तथा लश्कर का पीरपंजाल क्षेत्र का एरिया कमांडर तालिब हुसैन राजौरी के दराज, कोटरंका का रहने वाला है। दोनों गिरफ्तार आतंकवादी पाकिस्तान स्थित एक हैंडलर सलमान के संपर्क में थे जबकि तालिब हुसैन लगातार पाकिस्तान में लश्कर के एक अन्य हैंडलर कासिम के संपर्क में भी था। 

तालिब ने राजौरी और पुंछ के क्षेत्र में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से इस वर्ष मार्च-अप्रैल में कोटरंका, शाहपुर बुद्धल मेें आई.ई.डी. से अनेक धमाके किए थे। गत मंगलवार को उसके 2 साथियों मोहम्मद शब्बीर और मोहम्मद सादिक को सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार कर उनके कब्जे से भी बड़ी संख्या में शक्तिशाली विस्फोटक (आई.ई.डी.) पकड़ा था।

जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने ग्रामीणों को उनके साहस के लिए 5 लाख रुपए का नकद ईनाम देने की घोषणा की तथा कहा कि ग्रामीणों द्वारा दिखाए गए दृढ़ संकल्प से वह दिन दूर नहीं जब जम्मू-कश्मीर आतंकवाद मुक्त होगा। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने भी ग्रामीणों को 2 लाख रुपए ईनाम देने की घोषणा की है। जम्मू स्थित सेना के लोक संपर्क अधिकारी लैफ्टिनैंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने कहा कि ‘‘सुरक्षा बल ग्रामीणों को देहाती सुरक्षा कमेटियां कायम करने में सहायता दे रहे हैं, जिसके अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं।’’ 

‘‘क्षेत्र में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने की लगातार कोशिशों के बावजूद अब लोग ऐसी कोशिशों को नाकाम करके आतंकवाद के काले दौर की वापसी रोकने के लिए दृढ़ संकल्प हैं और खुद आतंकवादियों के विरुद्ध उठ खड़े हुए हैं।’’ हालांकि पकड़े गए आतंकवादियों में से एक तालिब को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है, जो इसी वर्ष मई में भाजपा का सदस्य बना था और 27 मई को उसने पार्टी छोड़ दी। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र रैना ने दावा किया है कि पाकिस्तान द्वारा रची गई साजिश के अंतर्गत ही भाजपा नेताओं को निशाना बनाने के लिए तालिब पार्टी में शामिल हुआ था। 

जो भी हो, ग्रामीणों द्वारा अपनी जान की परवाह न करते हुए 2 खतरनाक आतंकवादियों को पकड़ कर पुलिस के हवाले करना जम्मू-कश्मीर के लोगों में बढ़ रही जागरूकता और आतंकवादियों के विरुद्ध नफरत का परिणाम है। इसके लिए ये ग्रामीण साधुवाद के पात्र हैं और आतंकवादियों के विरुद्ध जम्मू-कश्मीर के लोगों का जुडऩा प्रदेश में आतंकवाद का दौर समाप्त होने का संकेत है। इतिहास साक्षी है कि आतंकवाद की समाप्ति केवल सेना की कार्रवाई से संभव नहीं है बल्कि इस संग्राम में आम लोगों का जुडऩा भी जरूरी है।—विजय कुमार 


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