पंजाब-हरियाणा के भूमिगत जल में विषैले पदार्थों की मात्रा बढ़ी

2021-07-31T05:34:49.15

हाल ही में किए गए कुछ अध्ययनों में बताया गया है कि उत्तर-पश्चिम  भारत, विशेषकर पंजाब और हरियाणा में न सिर्फ भूजल चिंताजनक स्तर तक गिर गया है, बल्कि अनेक स्थानों पर इसमें हानिकारक रासायनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ जाने से उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और कृषि के लिए गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।

जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार इन दोनों राज्यों में कुछ स्थानों पर भूमिगत जल में लवणता (खारापन), लोराइड,  आर्सेनिक, लोहा, सिक्का, कैडमियम और क्रोमियम इंसानी उपयोग के लिए भारतीय मानक संस्थान द्वारा तय की गई मात्रा से अधिक बढ़ गए हैं। 

हरियाणा के 15 जिलों में कैंसर कारक आर्सेनिक, 7 जिलों में क्रोमियम और एक जिले में अधिक मात्रा में कैडमियम पाया गया जबकि पंजाब के 10 जिलों के भूमिगत पानी में आर्सेनिक और क्रोमियम तथा 8 जिलों में कैडमियम पाया गया है। हरियाणा के 17 और पंजाब के 9 जिलों में अनेक स्थानों पर भूजल में सिक्के की अधिक मात्रा का भी पता चला है। पंजाब के 10 और हरियाणा के 18 जिलों में लवणता की मात्रा कृषि के लिए खतरनाक हद तक बढ़ जाने से न सिर्फ भूमि की उपजाऊ शक्ति घट  रही है बल्कि इससे पर्यावरण को भी क्षति पहुंच रही है। 

इस स्थिति से लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण की रक्षा और कृषि को पहुंचने वाली क्षति से बचाने के लिए किसानों द्वारा अधिक उपज के लालच में फसलों में रासायनिक कीटनाशकों और रासायनिक खादों का अधिक इस्तेमाल न करने, कारखानों और चमड़ा शुद्ध करने वाले संयंत्रों व शराब डिस्टिलरियों आदि द्वारा इस्तेमाल किए गए गंदे पानी को शुद्ध करके ही जलस्रोतों में छोडऩा अनिवार्य करने के नियम स ती से लागू करने की जरूरत है।

इसके साथ ही सामुदायिक जलशुद्धिकरण संयंत्र लगाने की भी आवश्यकता है, ताकि विषैले पानी से होने वाली हानियों से बचने के लिए घरों में इस्तेमाल किए जाने वाले पानी को पूर्णतया शुद्ध किया जा सके।—विजय कुमार 


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Chief Editor

vijay kumar

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