महाराष्ट्र में ‘ठाकरे’ और ‘शिंदे’ गुट अब ‘खुले आम सड़कों पर’ उतरे

punjabkesari.in Sunday, Jun 26, 2022 - 05:07 AM (IST)

महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक संग्राम और गहरा हो गया है तथा लड़ाई राजभवन और विधानसभा तक पहुंच गई है। एक ओर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ‘शिवसेना’ तथा ‘महा विकास अघाड़ी’ की सरकार बचाने के प्रयास में जुटे हुए हैं तो दूसरी ओर शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे की बगावत से नाराज उद्धव समर्थक शिवसैनिक सड़कों पर अब उतर आए हैं। 

उद्धव समर्थकों ने 25 जून को बागी विधायक तानाजी सावंत के पुणे स्थित कार्यालय में भारी तोडफ़ोड़ कर डाली। पुणे शिवसेना के प्रमुख ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि ‘‘सभी गद्दारों और बागी विधायकों, जिन्होंने पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे को संकट में डाला है, को इसी प्रकार की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।’’ 

एकनाथ शिंदे तथा उनके बेटे श्रीकांत शिंदे द्वारा ‘ठाणे’ में शुरू किए गए मैडीकल हैल्थ कैम्प के बोर्ड तथा अन्य पोस्टरों पर कालिख पोतने के अलावा श्रीकांत शिंदे के उल्हास नगर स्थित दफ्तर में भी तोड़-फोड़ की गई।

एकनाथ शिंदे, जो किसी समय ठाणे में आटो रिक्शा चलाते थे और बीयर फैक्टरी में मजदूरी करते थे, के विधानसभा क्षेत्र ठाणे में 8 जुलाई तक निषेधाज्ञा लगाकर तलवार, भाला, बंदूक, लाठी या शरीर को चोट पहुंचाने वाला कोई भी अन्य हथियार लेकर चलने और रखने तथा पत्थर जमा करने तक पर भी रोक लगा दी गई है। मुम्बई पुलिस ने हाई अलर्ट जारी करके सभी पुलिस थानों से सभी राजनीतिक कार्यालयों में सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है तथा 5 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने और किसी भी तरह का प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी है। 

एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र के गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल व डी.जी.पी. को पत्र लिख कर आरोप लगाया है कि 38 नाराज विधायकों के परिवारों की सुरक्षा दुर्भावनापूर्ण तरीके से वापस ले ली गई है परंतु दिलीप वालसे पाटिल ने इससे इंकार किया है। नवीनतम घटनाक्रम के अनुसार शिंदे गुट 37 विधायकों की महत्वपूर्ण संख्या तक पहुंच चुका है, जो दल बदल विरोधी कानून का उल्लंघन किए बिना पार्टी को विभाजित करने के लिए काफी है। इसके साथ ही अब शिंदे गुट में 42 विधायक हो गए हैं। हालांकि शुक्रवार को उन्होंने 50 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा किया था। 

दूसरी ओर उद्धव ठाकरे गुट ने डिप्टी स्पीकर को 16 विधायकों की सदस्यता समाप्त करने का अनुरोध किया है तथा शिवसेना प्रवक्ता संजय राऊत ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस (भाजपा) को चेतावनी दी है कि ‘‘उन्हें इस झमेले से बाहर रहना चाहिए, नहीं तो वह फंस सकते हैं।’’ इसके साथ ही उन्होंने बागियों को चेतावनी दी है कि ‘‘हम नामर्द नहीं हैं और पार्टी को हाईजैक करने की कोशिश से स्थिति बिगड़ेगी। आप लोग विधानसभा के फ्लोर पर आइए, देखते हैं किसमें कितना दम है। मैं हवा में बात नहीं करता। जो उद्धव जी कहते हैं मैं वही कहता हूं, जो बगावत कर रहे हैं वे अपनी विधायकी बचाएं। शिवसेना आग है, आग से मत खेलो।’’ 

फिलहाल शिंदे की बगावत से शिवसेना में ‘उद्धव ठाकरे’ तथा ‘एकनाथ शिंदे’ के दो अलग-अलग गुट बन गए हैं। दोनों ही स्वयं को बाला साहेब ठाकरे का सच्चा सारथी बता रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार एकनाथ शिंदे का गुट नई पार्टी बनाने की तैयारी कर रहा है जिसका नाम ‘शिवसेना बाला साहेब ठाकरे पार्टी’ हो सकता है। इस बीच जहां असम शिवसेना के अध्यक्ष ने भी बागियों से उद्धव ठाकरे का साथ देने की अपील की है, वहीं 25 जून को शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह फैसला लिया गया कि कोई भी ‘बाला साहेब’ तथा ‘शिवसेना’ के नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकता। 

इस बीच महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल (राकांपा) ने शिंदे गुट द्वारा उद्धव सरकार के विरुद्ध ई-मेल द्वारा भेजा गया अविश्वास प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया है तथा शिवसेना के 16 बागी विधायकों को नोटिस भेजा है। दूसरी ओर शिंदे गुट ने नरहरि जिरवाल पर उद्धव कैम्प का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग की है। कुल मिलाकर स्वयं को सच्चे शिवसैनिक बताने वाले दोनों ही धड़े इस समय एक-दूसरे से भिडऩे पर आमादा हैं, जिसके कारण राज्य में स्थिति बिगड़ती नजर आ रही है। यदि दोनों गुटों में टकराव और बढ़ा तो यह गड़बड़ समूचे राज्य में फैल जाने से कामकाज ठप्प हो जाएगा और राज्य में अराजकता फैलेगी।—विजय कुमार 


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