श्रीलंका की बिगड़ रही स्थिति ‘महिलाएं वेश्यावृत्ति को मजबूर’

punjabkesari.in Wednesday, Aug 03, 2022 - 03:29 AM (IST)

1948 के बाद से अब तक के सर्वाधिक खराब दौर से गुजर रहे श्रीलंका में हालात दिन-प्रति-दिन खराब हो रहे हैं। आॢथक संकट ने वहां के लोगों की कमर तोड़ कर रख दी है और वे भारी गरीबी में जीवन बिताने को विवश हैं। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और पर्यटन उद्योग सहित अधिकांश उद्योग-धंधे बंद हो जाने से खाद्य पदार्थों, र्ईंधन और दवाओं  का भारी अभाव पैदा होने से इनकी कीमतें आकाश छूने लगी हैं। 

‘गोटबाया राजपक्षे सरकार’ द्वारा रासायनिक खादों पर प्रतिबंध लगा देने के कारण पिछले साल किसानों द्वारा देश की कृषि भूमि के बड़े हिस्से पर फसल की बिजाई न करने के परिणामस्वरूप देश की कृषि पैदावार में 50 प्रतिशत तक की कमी आ जाने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। देश में लगभग 60 लाख लोगों के सामने भारी खाद्य संकट पैदा हो गया है, जिन्हें भोजन के लिए दूसरों के आगे हाथ पसारने पड़ रहे हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने दिन में सिर्फ एक बार ही खाना शुरू कर दिया है। मजबूरी में बड़ी संख्या में लोग गलत कार्यों में भी संलिप्त हो रहे हैं। 

हालांकि पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के देश छोड़ कर भाग जाने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे देश के राष्ट्रपति बन गए हैंं, परन्तु हालात ज्यों के त्यों हैं। देश में जून की 54.6 प्रतिशत की तुलना में जुलाई महीने में महंगाई बढ़कर 60.8 प्रतिशत हो गई है तथा श्रीलंका के केन्द्रीय बैंक ने चेतावनी दी है कि यह बढ़ कर 75 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। देश में आर्थिक संकट का सर्वाधिक प्रभाव टैक्सटाइल उद्योग पर पड़ा है। देश के ‘ज्वाइंट अपैरल एसोसिएशन फोरम’ के अनुसार श्रीलंका के टैक्सटाइल उद्योग से खरीदारों का विश्वास उठ गया है और 10 से 15 प्रतिशत तक आर्डर रद्द हो जाने के कारण बड़ी संख्या में इनमें काम करने वाली महिलाएं नौकरी से निकाल दी गई हैं। 

इस कारण वे अपने परिवारों का पेट पालने के लिए वेश्यावृत्ति करने को विवश हो गई हैं। श्रीलंका में सैक्स वर्करों के अधिकारों और बेहतरी के लिए काम करने वाली ‘स्टैंडअप मूवमैंट लंका’ (एस.यू.एम.एल.) नामक  एन.जी.ओ. की कार्यकारी निदेशक अशीला दांडेनिया के अनुसार : 

‘‘नौकरी से निकाल दिए जाने के कारण अनेक महिलाओं, जिनमें से अधिकांश टैक्सटाइल इंडस्ट्री से संबंध रखती थीं, ने अस्थायी रूप से वेश्यावृत्ति का धंधा अपना लिया है जिस कारण वहां वेश्याओं की संख्या में 30 प्रतिशत की वृद्धि हो गई है तथा यह संख्या अभी और बढऩे की आशंका है।’’ देश में केवल सैक्स इंडस्ट्री में ही कम समय में अधिक धन मिल रहा है। एक युवती ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि नौकरी से निकाल दिए जाने के बाद 7 महीनों तक जब उसे कोई काम नहीं मिला तो वह देह व्यापार का धंधा अपनाने को विवश हो गई। एक महिला के अनुसार सैक्स वर्क से वह एक दिन में 15000 रुपए तक कमा सकती है, जबकि सामान्य नौकरी में पूरा महीना काम करके 28,000 रुपए के आस-पास व ओवर टाइम करके 35,000 रुपए मासिक तक ही कमा पाती थी। 

अब तो हालत यह हो गई है कि अनिवार्य जीवनोपयोगी वस्तुओं की भारी कमी के कारण स्थानीय दुकानदार भी महिलाओं को राशन और दवाओं के बदले में सैक्स करने के लिए मजबूर करने लगे हैं। अवैध रूप से चलाए जा रहे वेश्यावृत्ति के अड्डों में पुलिस से बचने के लिए कई बार इन महिलाओं को पुलिस कर्मचारियों तक के साथ सोने के लिए विवश होना पड़ता है और ऐसा न करने पर पुलिस वाले उन्हें जेल में डाल देते हैं। अनेक मौकों पर महिलाओं की मजबूरी का लाभ उठाते हुए ग्राहक उनके साथ असुरक्षित सैक्स संबंध बनाते हैं और यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक होती जा रही है क्योंकि अब माफिया भी इसमें शामिल हो गया हैै। 

कुल मिला कर आज श्रीलंका की जनता और विशेषरूप से महिलाएं तथा बच्चे अपने पूर्व शासकों की करतूतों का खमियाजा भुगतने के लिए विवश हैं। ये उस ‘अपराध’ की सजा भुगत रहे हैं जो उन्होंने किया ही नहीं। श्रीलंका से मिलने वाले संकेत बताते हैं कि यदि शासक इस संकट से जल्दी मुक्ति न पा सके तो वर्ष के अंत तक वहां स्थिति और भी विस्फोटक हो सकती है।—विजय कुमार


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