यह क्या हो रहा है, यह क्यों हो रहा है,कहीं गिरती बिजली, कहीं भूचाल, कहीं सूखा, कहीं बाढ़

2021-07-04T04:38:03.783

हम अक्सर लिखते रहते हैं, कुछ समय से विश्व के हालात देखते हुए अनेक लोगों का कहना ठीक ही लगता है कि विश्व पर साढ़ेसाती का प्रकोप जारी है। कोरोना महामारी प्राण ले रही है, दूसरी ओर प्रकृति का प्रकोप लगातार जारी है। 

कहीं भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं, कहीं भारी वर्षा और बाढ़ से विनाश हो रहा है, कहीं आसमानी बिजली गिरने, हिमखंड टूटने, जंगलों में आग लगने आदि से भारी तबाही हो रही है और कहीं ठंड तो कहीं भीषण गर्मी पड़ रही है, जिसके चंद ताजा उदाहरण निम्र में दर्ज हैं :  
* 14 जून को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में आंधी-तूफान से कम से कम 9 लोगों की मौत और 17 लोग घायल हो गए।
* 16 जून को भूटान में भारी वर्षा और बाढ़ में एक पर्वतीय शिविर बह जाने से 10 लोगों की मौत हो गई।
* 17 जून को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया।
* 18 जून को असम में 4.2 तीव्रता का 24 घंटों में पांचवां भूकंप आया। 

* 19 जून तक नेपाल में 1 सप्ताह की अवधि के दौरान आई बाढ़ और भूस्खलन के परिणामस्वरूप कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई ।
* 20 जून को अमरीका के अलबामा में 137 कि.मी. प्रतिघंटा की र तार से आए ‘क्लाऊडेट’ तूफान से 50 मकान ढह गए और 10 लोग मारे गए।
* अलबामा में तबाही मचाने के बाद ‘क्लाऊडेट तूफान’ ने 21 जून को अमरीका के शिकागो में 100 से अधिक मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया।
* 21 जून को जापान के ‘होकाइडो’ प्रांत में 5.4 तीव्रता का भूकंप आया।
* 24 जून को महाराष्ट्र के पालघर जिले में 3.7 तीव्रता का भूकंप आया। 

* 25 जून को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में आकाशीय बिजली गिरने से एक सैनिक की मौत व 2 अन्य घायल हो गए।
* 26 जून को झारखंड के पलामू जिले में आकाशीय बिजली गिरने से 3 किसानों की जान चली गई तथा 2 अन्य घायल हो गए।
* 28 जून को लद्दाख में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। इसी दिन उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में भी 3.7 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए।
* 28 जून को बिहार में सहरसा जिले के ‘ब ितयारपुर’ में आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला और 4 बच्चों की झुलसने से मृत्यु हो गई, जिन्होंने वर्षा से बचने के लिए एक पेड़ के नीचे शरण ले रखी थी। 

* 1 जुलाई को उत्तर प्रदेश में हमीरपुर के ‘राठ’ गांव में आसमानी बिजली गिरने से एक महिला मारी गई।
* 1 जुलाई को महाराष्टï्र के पालघर जिले में 12 घंटे से भी कम अंतराल में भूकंप के दो झटके महसूस किए गए।
* 1 जुलाई को ब्रिटिश कोल िबया के गांव ‘लिटन’ में पड़ रही गर्मी के कारण तापमान इतना बढ़ गया कि समूचा गांव आग की लपटों से घिर गया और लोग अपना घरबार छोड़ कर भागने के लिए मजबूर हो गए। 

* 3 जुलाई को जापान में टोक्यो के निकट अतामी शहर में भारी वर्षा से जमीन धंसने से कई मकान जमींदोज हो जाने से 2 लोगों की मौत तथा कम से कम 19 लोग लापता हो गए।
उक्त आपदाओं के अलावा मौसम भी तरह-तरह के रंग दिखा रहा है। इन दिनों कुछ राज्यों में जहां वर्षा न होने से सूखे की स्थिति बनी हुई है, वहीं कुछ राज्यों में अतिवर्षा ने बाढ़ की स्थिति पैदा कर रखी है। बिहार के 16 जिलों में आई बाढ़ के चलते 27 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। 

न्यूजीलैंड में इन दिनों भीषण सर्दी पडऩे का 55 वर्षों का रिकार्ड टूट गया है। बर्फीले तूफान के कारण राजधानी वेङ्क्षलगटन में स्थानीय आपातकाल घोषित कर दिया गया है और कई उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं। न्यूजीलैंड के कुछ शहरों में एक दशक के बाद बर्फबारी हुई है और जून का महीना न्यूजीलैंड में पिछले 55 वर्षों में सबसे ठंडा रहा। यहीं पर बस नहीं, इन दिनों अनेक यूरोपीय, अमरीकी तथा एशियाई  देश रिकार्ड गर्मी से त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। कनाडा में गर्मी का 84 वर्षों का रिकार्ड टूट गया है। एक सप्ताह में वहां लगभग 500 लोगों तथा अमरीका में लगभग 100 लोगों की मौत हो चुकी है। 

भारत में भी गर्मी से त्राहि-त्राहि मची हुई है। हालांकि 29 जून को मौसम विभाग ने चेतावनी दी थी कि 8 जुलाई से पहले भारत में मानसून के आगे बढऩे की संभावना नहीं है, पर 2-3 जुलाई को ही मध्य रात्रि को उत्तरी भारत में कई जगह भारी वर्षा ने मौसम विभाग के अनुमान झुठला दिए। शायद प्रकृति समूचे विश्व को चेतावनी दे रही है कि अभी भी संभल जाओ और मुझसे छेड़छाड़ करना बंद कर दो, वर्ना तु हें विनाशलीला वर्तमान से भी अधिक देखने को मिलेगी।—विजय कुमार 


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Chief Editor

vijay kumar

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