''राज्यपाल जगदीप धनखड़'' और ''मुख्यमंत्री ममता बनर्जी'' के बीच बढ़ता ''टकराव''

2021-07-03T03:23:53.537

भारत के प्रांतों में राज्यपाल केंद्र सरकार के एक प्रतिनिधि के रूप में काम करता है और उसके तथा राज्य सरकार के बीच सुचारू रूप से सरकार चलाने के लिए दोनों के बीच संबंध मधुर होना अत्यंत आवश्यक है। परंतु 30 जुलाई, 2019 को पं. बंगाल के राज्यपाल की शपथ लेने के पहले दिन से ही जगदीप धनखड़ व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार में टकराव की स्थिति बनी हुई है। 

दोनों ओर से एक-दूसरे के विरुद्ध राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार जारी है जो बंगाल के चुनावों के बाद और तेज हो गया। जहां राज्यपाल जगदीप धनखड़ बंगाल में चुनावों के बाद हुई ङ्क्षहसा के मुद्दे पर राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं, वहीं उन्होंने ममता सरकार पर लाखों लोगों को विस्थापित करने का आरोप भी लगाया है। 

21 जून को जगदीप धनखड़ ने ममता सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में आजादी के बाद ऐसी हिंसा कहीं नहीं हुई। चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के विरुद्ध वोट डालने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। करोड़ों रुपए की स पत्ति नष्ट कर दी गई है। डर के मारे असहाय लोग मुंह नहीं खोल रहे तथा अराजक तत्वों द्वारा बलात्कार और हत्या की अनेक घटनाएं हुई हैं। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी जगदीप धनखड़ पर आरोप लगाए जा रहे हैं। गत 6 जून को तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि जगदीप धनखड़ के परिवार के सदस्यों और अन्य परिचितों को राजभवन में विशेष कार्याधिकारी (ओ.एस.डी.) नियुक्त किया गया है। 

इसके साथ ही महुआ मोइत्रा ने कहा, ‘‘अंकल जी, पश्चिम बंगाल की चिंताजनक स्थिति सुधर जाएगी, यदि आप माफी मांग कर वापस दिल्ली चले जाएं तथा कोई दूसरी नौकरी तलाश लें।’’

21 जून को ही बंगाल विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी ने लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला के पास जगदीप धनखड़ पर विधानसभा के कामकाज में हस्तक्षेप करने और विधेयकों को दबाने का आरोप लगाया। 28 जून को ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘राज्यपाल धनखड़ एक भ्रष्ट व्यक्ति हैं। उनका नाम 1996 में सामने आए हवाला जैन केस की चार्जशीट में था।’’ पश्चिम बंगाल में सामने आए फर्जी कोविड टीकाकरण मामले में केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब करने के एक दिन बाद 30 जून को ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल को बदनाम करने के लिए भाजपा नीत केंद्र सरकार कुछ एजैंसियों का इस्तेमाल कर रही है।’’ 

तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर ने आरोप लगाया है कि धनखड़ और फर्जी टीकाकरण शिविरों का आयोजन करने के आरोपी देबांजन देब के बीच संबंध हैं। सुखेंदु ने ऐसे चित्र जारी किए जिसमें जगदीप धनखड़ एक व्यक्ति के निकट खड़े दिखाई दे रहे हैं जो देबांजन देब का सिक्योरिटी गार्ड है। तृणमूल द्वारा पिछले 4 दिनों में राज्यपाल धनखड़ पर लगाया गया यह दूसरा बड़ा आरोप था। तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि जगदीप धनखड़ हर मुद्दे पर बात करते हैं पर नकली टीकों के मुद्दे पर चुप क्यों हैं? 

राज्यपाल धनखड़ और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच नवीनतम विवाद विधानसभा के बजट सत्र में पढ़े जाने वाले राज्यपाल के अभिभाषण को लेकर पैदा हुआ। वर्षों से चली आ रही पर परा के अनुसार कैबिनेट द्वारा स्वीकृत अभिभाषण को हूबहू पढऩे से इंकार करके उन्होंने 28 जून को यह कह कर विवाद पैदा कर दिया कि वह इसके लिए बाध्य नहीं हैं। इसके विपरीत संविधान विशेषज्ञ एवं कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि राज्यपाल राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत अभिभाषण को पढऩे के लिए ही बाध्य हैं। धनखड़ ने कहा कि राज्य सरकार ने उन्हें जो अभिभाषण पढऩे के लिए दिया है, उसमें कई बातें आपत्तिजनक हैं। 

गत वर्ष फरवरी में भी धनखड़ ने कैबिनेट द्वारा स्वीकृत अभिभाषण को संपादित करने की इच्छा जताई थी, जिससे राज्य सरकार ने इंकार कर दिया था और अंतत: धनखड़ ने पर परा के अनुसार कैबिनेट द्वारा स्वीकृत अभिभाषण ही पढ़ा था, जिसमें अनेक मुद्दों पर केंद्र सरकार की आलोचना की गई थी। जैसी कि आशंका व्यक्त की जा रही थी, 2 जुलाई को नवगठित राज्य विधानसभा में राज्यपाल जगदीप धनखड़ को भाजपा सदस्यों के हंगामे के कारण अपना भाषण संक्षिप्त करना पड़ा और वह केवल 3-4 मिनट ही बोल सके। भाजपा सदस्यों के हंगामे के कारण अभिभाषण पूरी तरह पढ़े बिना ही उसे मेज पर रख कर सदन से चले गए और इसके साथ ही सदन उठा दिया गया। 

हालांकि इससे पहले भी पश्चिम बंगाल में राज्यपालों और राज्य सरकारों में टकराव होता रहा है परंतु इस बार यह टकराव लंबा खिंचता दिखाई पड़ रहा है, जिसके निकट भविष्य में थमने के कोई आसार नहीं लग रहे, जो निश्चय ही केंद्र और राज्य सरकार के संबंधों के लिए अच्छा नहीं है। दोनों ही पक्ष यदि सद्भावनापूर्वक परस्पर सहमति से अपना दायित्व निभाएं तो उसी में दोनों पक्षों का और राज्य का हित है।—विजय कुमार


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Chief Editor

vijay kumar

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