‘इलैक्ट्रिक कारों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना’ समय की जरूरत!
punjabkesari.in Monday, Sep 21, 2026 - 02:35 AM (IST)
इन दिनों सारी दुनिया में ही इलैक्ट्रिक वाहनों (ई.वी.) का प्रचलन बढ़ रहा है। भारत में भी इन्हें बढ़ावा दिया जा रहा है तथा देश में इलैक्ट्रिक वाहनों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। देश के प्रमुख नीति-निर्माण थिंक टैंक ‘नीति आयोग’ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में ई.वी. की पहुंच 2018 में मात्र 0.5 प्रतिशत थी जो 2025-26 में बढ़कर 8.25 प्रतिशत पर पहुंच गई है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 तक भारत की सड़कों पर 87 लाख से अधिक इलैक्ट्रिक वाहन दौड़ रहे थे।
‘नीति आयोग’ द्वारा जारी ‘इंडिया इलैक्ट्रिक मोबिलिटी इंडैक्स (आई.एम.आई. 2025)’ में महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक, चंडीगढ़ और गोवा ने इलैक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में देश में सर्वश्रेष्ठï प्रदर्शन करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में अपना स्थान बनाया है। इलैक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल में दिल्ली ने 84 अंकों के साथ पहला स्थान प्राप्त किया है। महाराष्ट्र 78 अंकों के साथ दूसरे और कर्नाटक 73 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। इसके बाद चंडीगढ़ (71), गोवा (65) और मणिपुर (46) रहे।इलैक्ट्रिक वाहनों को अपनाना आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक आवश्यकता है।
यदि लोगों ने इलैक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल की ओर रुख न किया तो पैट्रोल-डीजल कार रखने वालों की संख्या बढऩे के साथ ही कच्चे तेल की लगभग 89 प्रतिशत जरूरतों के लिए भारत की ईंधन आयात पर निर्भरता बढ़ जाने की संभावना है।
भारत के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 29 ने अब ई.वी. पॉलिसी लागू कर दी है। पहले की तुलना में कुल स्कोर में भी सुधार हुआ है। इस मामले में सरकार इलैक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए दूसरे देशों द्वारा अपनाए गए उपायों से ‘टिप’ ले सकती है। उदाहरण के लिए लंदन (इंगलैंड) में इलैक्ट्रिक वाहनों के लिए फाइनैंशियल इंसैटिव, कड़े नियमों और पब्लिक चाॄजग ढांचे में बड़े निवेश के लिए इलैक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया गया।
लंदन में कई वर्षों तक इलैक्ट्रिक वाहनों को वहां के कंजैशन चार्ज से पूरी छूट मिली जिससे इलैक्ट्रिक वाहनों द्वारा रोजाना का सफर काफी सस्ता हो गया और अब इस स्थिति में बदलाव करके पूरे ट्रैफिक को मैनेज किया जा रहा है जिसके अंतर्गत इलैक्ट्रिक वाहनों के लिए रियायती दरें लागू की गई हैं। यही नहीं, वहां इलैक्ट्रिक कारें खरीदने के इच्छुक लोगों को इनकी कीमतों में विशेष छूट देने के अलावा स्थान-स्थान पर इलैक्ट्रिक कारों के चाॄजग प्वाइंट लगाए गए। अभी भी लंदन में हवाई अड्डे की ओर जाने वाले वाहनों के लिए वहां अलग लेन बनाई गई है जिस पर इलैक्ट्रिक कारों के चालक अन्य वाहनों की तुलना में अधिक तेजी से जा सकते हैं।
‘इंटरनैशनल एनर्जी एजैंसी’ (आई.ई.ए.) की ‘ग्लोबल ई.वी. आऊटलुक-2025’ के अनुसार चीन दुनिया में सर्वाधिक इलैक्ट्रिक वाहनों वाला देश है जहां 2024 तक 2 करोड़ से अधिक इलैक्ट्रिक गाडिय़ां सड़कों पर दौड़ रही थीं। इसके बाद अमरीका (70 लाख),जर्मनी (14 लाख), फ्रांस (13-14 लाख), इंगलैंड (13 लाख) का स्थान है। चीन ने इलैक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए और भी आक्रामक तरीका अपनाया है, जहां अन्य प्रकार के ईंधन से चलने वाले वाहनों पर टैक्स बढ़ा दिया गया है तथा इलैक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स में छूट दी गई है। पैट्रोल से चलने वाली कारों पर दी जाने वाली पारंपरिक आर्थिक सबसिडी समाप्त करने के साथ-साथ पैट्रोल कारों पर कई पाबंदियां भी लगा दी हैं।
हवा की गुणवत्ता सुधारने के जरूरी लक्ष्यों को देखते हुए बीजिंग में बाजार में पैट्रोल से चलने वाले वाहन के लिए लाइसैंसिंग प्लेटों की कमी का फायदा उठाया ताकि लाखों लोगों के लिए इलैक्ट्रिक कार खरीदना ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प रह जाए। पैट्रोल कारों की तुलना में इलैक्ट्रिक कारों की लाइसैंस प्लेट प्रणाली भी आसान कर दी गई है। इससे चीन में पैट्रोल कारों की तुलना में इलैक्ट्रिक कारों की बिक्री को बढ़ावा मिला है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल रूस से खरीद रहा है, अत: अमरीकी सीनेट द्वारा भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का बिल पास होने तथा ईरान में जारी युद्ध के कारण ईंधन की कीमतें बढऩे से भारत के लिए इसकी क्षतिपूर्ति करना कठिन होगा, जिससे महंगाई भी बढ़ेगी। अत: आर्थिक व पर्यावरणीय कारणों के लिहाज से अब और भी जरूरी हो गया है कि भारत इलैक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल की ओर तेजी से बढ़े लेकिन इसके लिए ई.वी. वाहन खरीदने के इच्छुक लोगों को कुछ रियायतें व सुविधाएं देने की जरूरत है।
