भारत में राजनीतिक भ्रष्टाचार अब एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में

punjabkesari.in Sunday, May 29, 2022 - 04:10 AM (IST)

जैसा कि हम समय-समय पर लिखते रहते हैं, देश में भ्रष्टाचार का महारोग इस समय अपने चरम पर पहुंचा हुआ है, जिसमें नीचे से लेकर ऊपर तक के लोग संलिप्त पाए जा रहे हैं। हाल ही में 2 और मामले सामने आए हैं जिनमें सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े वर्तमान और भूतपूर्व सत्ताधारियोंं के नाम विभिन्न घोटालों में शामिल पाए गए हैं। 

पहला मामला पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री परेश चंद्र अधिकारी की बेटी अंकिता अधिकारी को अनुचित तरीके से नौकरी देने से संबंधित है। राज्य में कुछ समय पूर्व हुए एस.एस.सी. भर्ती घोटाले के मामले में 20 मई को कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में परेश चंद्र अधिकारी की बेटी अंकिता अधिकारी की नौकरी समाप्त करने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में एक पीड़ित ने याचिका दायर करके भर्ती परीक्षा में मंत्री अधिकारी की बेटी से अधिक अंक लाने के बावजूद उसे पद से वंचित करने और शिक्षा मंत्री द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से अपनी बेटी को नौकरी दिलवाने का आरोप लगाया था। 

इसके चलते कोर्ट ने पिछले दिनों केंद्रीय जांच ब्यूरो (सी.बी.आई.) को दोनों से पूछताछ करने के आदेश दिए थे। इस बीच परेश चंद्र अधिकारी 21 मई को सी.बी.आई. दफ्तर पहुंचे। उनके विरुद्ध सी.बी.आई. ने वीरवार को ही धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की साजिश रचने के आरोप में एफ.आई.आर. दर्ज की थी। इसके साथ ही जस्टिस अविजीत गंगोपाध्याय ने शिक्षा मंत्री की बेटी अंकिता को नवम्बर 2018 से अब तक बतौर शिक्षक लिए गए वेतन की सारी रकम दो किस्तों में रजिस्ट्रार के पास जमा कराने का आदेश देने के अलावा उसे स्कूल में दाखिल होने से भी रोक दिया है। भ्रष्टाचार का दूसरा मामला पूर्व रेल मंत्री और राजद सुप्रीमो लालू यादव के परिवार से संबंधित है जिनके भ्रष्टाचार की आंच उनकी पांचवीं बेटी हेमा यादव तक पहुंच गई है। 

हाल ही में सी.बी.आई. ने यादव परिवार के 15 ठिकानों पर छापेमारी के बाद लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और मीसा भारती के साथ हेमा यादव के विरुद्ध भी मामला दर्ज किया है। हेमा यादव राजनीति में नहीं है और इससे पहले उसका नाम किसी मामले में नहीं आया था। नौकरी के बदले जमीन घोटाले के इस मामले में कुल 15 लोगों के विरुद्ध मुकद्दमा दर्ज किया गया है। इनमें कुछ ऐसे अपात्र लोग भी शामिल हैं जिन्होंने नौकरी पाने की खातिर लगभग नाममात्र मूल्य पर उन्हें जमीन दी। 

यह मामला 2004-2009 के बीच का है जब लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री रहने के दौरान रेलवे के विभिन्न विभागों में ग्रुप डी की नौकरियां देने के बदले में अपने परिवार के विभिन्न सदस्यों तथा उनके द्वारा संचालित एक प्राइवेट कम्पनी के नाम पर जमीन प्राप्त की। इस मामले में जो तथ्य सामने आए हैं उनके अनुसार कम से कम 7 मामलों में राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव, लालू परिवार द्वारा संचालित एक प्राइवेट कम्पनी के नाम जमीन ट्रांसफर की गई और इसके लिए कोई विज्ञापन आदि भी नहीं दिए गए। 

इससे पहले लालू परिवार के तेजस्वी यादव, तेज प्रताप, मीसा भारती और मीसा के पति शैलेष का नाम विभिन्न मामलों में आ चुका है। हेमा यादव की शादी दिल्ली के एक राजनीतिक परिवार में हुई है। उसका पति भी राजनीति में सक्रिय है। सी.बी.आई. ने इस मामले में लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी की बहन के गांव सेलारकलां में भी छापेमारी की है। बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी (भाजपा) ने लालू परिवार को भ्रष्टाचार का प्रतीक बताते हुए ट्वीट किया है कि ‘‘तुम मुझे जमीन दो, मैं तुम्हें नौकरी दूंगा। यह लालू का नारा था।’’ बताया जाता है कि जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय मंत्री थे उस समय कई लोगों से अत्यंत महंगी जमीन लेकर उन्हें नौकरी दी गई थी। 

ऐसा लगता है कि हमारे देश के राजनीतिज्ञ अपने बच्चों को विरासत में भारी धन सम्पत्ति के साथ-साथ भ्रष्टाचार और सत्ता से चिपक कर रहने का सबक भी दे रहे हैं। लालू यादव की पुत्री मीसा भारती द्वारा राज्यसभा के लिए नामांकन भरवाना इसी का एक हिस्सा है। बंगाल के शिक्षा मंत्री और पूर्व रेल मंत्री की संतानों के भ्रष्टाचार के उक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि देश में भ्रष्टाचार की जड़ें किस कदर गहरी हो चुकी हैं। यदि हमारे राजनीतिज्ञ ही इस प्रकार के उदाहरण पेश करेंगे तो फिर देश के दूसरे लोग भ्रष्ट आचरण में क्यों न संलिप्त होंगे।—विजय कुमार


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