अब तमिलनाडु की अंदरूनी सियासत गर्माई शशिकला की वापसी पर घमासान

punjabkesari.in Wednesday, Jun 29, 2022 - 04:27 AM (IST)

हालांकि ऊपर से तो राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में फिलहाल शांति दिखाई देती है परन्तु अंदर ही अंदर वहां भी असंतोष का लावा उबल रहा है और दूसरी ओर महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में असंतुष्ट गुट ने उद्धव ठाकरे के विरुद्ध विद्रोह का झंडा उठा रखा है। दक्षिण भारत के तमिलनाडु में भी द्रमुक के हाथों सत्ता हार चुकी अन्नाद्रमुक में स्व. मुख्यमंत्री जयललिता की सहेली और पार्टी से निष्कासित पूर्व महासचिव वी.के. शशिकला को वापस लाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। 

5 दिसम्बर, 2016 को तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के देहांत के 2 महीने बाद ही पार्टी विधायक दल की एक बैठक में ‘ओ.पन्नीरसेल्वम’ द्वारा मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री के लिए शशिकला का नाम प्रस्तावित करने के बाद उसे विधायक दल की नेता चुन लिया गया परन्तु कानूनी अड़चनों के कारण इसे स्थगित करना पड़ा। फिर 14 फरवरी, 2017 को सुप्रीमकोर्ट द्वारा 66.65 करोड़ रुपए की अवैध सम्पत्ति रखने के आरोप में सुनाई गई 4 साल की सजा पूरी करने के लिए शशिकला को जेल जाना पड़ा। 27 जनवरी, 2021 को रिहाई के बाद से ही शशिकला पार्टी से समझौते की कोशिशें करती आ रही है तथा अब पार्टी के एक वर्ग द्वारा उसे वापस लाने की कवायद शुरू कर देने के कारण पार्टी में तनाव पैदा हो गया है। 

5 मार्च, 2022 को शशिकला दक्षिण तमिलनाडु की दो दिनों की यात्रा के दौरान धेनी, मदुरै, डिडीगुल, तिरुनेलवेली जिलों में अपने समर्थकों से मिलीं तो पार्टी के कई नेताओं ने उससे कहा था कि अन्नाद्रमुक को राज्य की सत्ता में वापस लाने के लिए उसे पार्टी में लौट कर इसकी बागडोर संभालनी होगी जिसके लिए यह सही समय है। इसी सिलसिले में पार्टी के को-आर्डीनेटर तथा पूर्व मुख्यमंत्री ‘ओ. पन्नीरसेल्वम’ के भाई ओ. राजा सहित पार्टी के धेनी जिले के 30 से अधिक पदाधिकारी  चेन्नई के होटल में शशिकला से मिले। इससे पार्टी के उच्च नेता भड़क गए व राजा सहित पार्टी के 30 पदाधिकारियों को निकाल दिया गया। इसके कुछ ही दिनों बाद 27 मार्च को पार्टी के शीर्ष नेता ‘के. पलानीसामी’ ने कहा कि, ‘‘पार्टी में शशिकला के लिए कोई जगह नहीं है। कोई भी उस मुद्दे को नवजीवन नहीं दे सकता जिसका फैसला लागू किया जा चुका है।’’ 

अन्नाद्रमुक के भीतर ‘ओ. पन्नीरसेल्वम’ और ‘पलानीसामी’ धड़ों के बीच आंतरिक कलह 21 जून को और बढ़ गई जब ‘पन्नीरसेल्वम’ धड़े ने चेन्नई के पुलिस अधिकारियों से अनुरोध किया कि ‘पलानीसामी’ धड़े द्वारा 23 जून को बुलाई जाने वाली पार्टी की महा परिषद की बैठक के आयोजन की अनुमति सुरक्षा संबंधी संभावित खतरे के दृष्टिगत न दी जाए। ‘ओ. पन्नीरसेल्वम’ जहां शशिकला को दोबारा अन्नाद्रमुक में शामिल करने पर विचार करने के प्रबल पक्षधर हैं तथा सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उनके मन में शशिकला के प्रति सम्मान है, वहीं पार्टी में ‘पन्नीरसेल्वम’ से बड़ा कद रखने वाले ‘पलानीस्वामी’ इसका विरोध कर रहे हैं। 

इसी मुद्दे को लेकर दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ चुका है कि पहले जहां सार्वजनिक रूप से दोनों आपसी नाराजगी का कोई संकेत नहीं देते थे वहीं अब उनकी नाराजगी जग-जाहिर हो चुकी है और उन्होंने एक सप्ताह से आपस में बात तक नहीं की है। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व जब धेनी जिले की पार्टी इकाई ने ‘पलानीसामी’ के विरुद्ध जाते हुए एक प्रस्ताव पारित करके उन सबको पार्टी में वापस लाने की बात कही थी जो पार्टी छोड़ कर चले गए हैं तो इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए ‘पलानीसामी’ ने कहा था कि उस स्थिति में वह ‘पन्नीरसेल्वम’ को धकेल कर एक ओर कर देंगे जहां वह अकेले ही होंगे। 

पिछले चुनावों में हालांकि द्रमुक कांग्रेस गठबंधन के हाथों सत्ता हार गई परन्तु ‘पलानीसामी’ के प्रभाव वाले पश्चिम तमिलनाडु में पार्टी 50 में से 33 सीटें जीतने में सफल रही जबकि ‘पन्नीरसेल्वम’ के प्रभाव वाले दक्षिण तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक 58 में से केवल 18 सीटें ही जीत पाई थी। तभी स्पष्टï हो गया था कि ‘पलानीसामी’ पार्टी का नेतृत्व करेंगे और ‘पन्नीरसेल्वम’ सदन में विपक्ष के नेता की भूमिका निभाएंगे।

पार्टी के एक धड़े के विरोध के बावजूद शशिकला निराश नहीं है तथा उसने 28 जून को चेन्नई व अन्य स्थानों पर अपने भारी रोड शो के दौरान दावा किया है कि वह चुनाव से पहले पार्टी को एक नेतृत्व में ले आएगी। इस संबंध में भविष्य में तो घटनाक्रम जो भी रूप ले इस समय तो ‘ओ. पन्नीरसेल्वम’ तथा ‘ई. पलानीस्वामी’ दोनों ही अपनी-अपनी जिद पर अड़े हुए हैं, अत: भविष्य में क्या होगा अभी कहना मुश्किल है।—विजय कुमार


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