अशांति की लपटों में घिरा भारत अधिकांश राज्य उपद्रवों की चपेट में

punjabkesari.in Saturday, Jun 18, 2022 - 03:10 AM (IST)

इन दिनों देश के अधिकांश राज्य विभिन्न मुद्दों को लेकर हिंसा और विरोध प्रदर्शनों की चपेट में आए होने के कारण केंद्र और राज्य सरकारों को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। 

पहले विवाद की शुरूआत भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा पैगम्बर मोहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणियों के चलते 3 जून को हुई। दोपहर लगभग 2 बजे उत्तर प्रदेश में कानपुर के यतीमखाना इलाके की मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद 3 बजे पत्थरबाजी, लूट और आगजनी शुरू हो गई। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, दिल्ली सहित देश के अनेक राज्यों में हिंसा भड़क उठी। 

10 जून को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, प्रयागराज, सहारनपुर, पश्चिम बंगाल के मालदा, 24 परगना और झारखंड के रांची सहित एक दर्जन शहर हिंसा की चपेट में आ गए जिसके दौरान रांची में 2 लोगों की मौत भी हो गई है। उसके बाद से शुरू हिंसा जारी है। इस दौरान दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उपद्रवों में शामिल आरोपियों तथा अवैध कब्जाधारियों की सम्पत्तियों पर बुल्डोजर चलाने की कार्रवाई भी शुरू है। 

इस बारे ‘जमीयत-उलमा-ए-हिंद’ की ओर से सुप्रीमकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि ‘‘दंगा आरोपितों की प्रापर्टी पर बुल्डोजर चलाने की कार्रवाई अवैध रूप से की जा रही है अत: इसे रोका जाए क्योंकि यह शासन का उल्लंघन है।’’ इस पर सुनवाई के दौरान सुप्रीमकोर्ट ने बुल्डोजर चलाने की कार्रवाई पर रोक लगाने से इंकार करते हुए कहा ‘‘अदालत इस पर रोक नहीं लगा सकती परंतु अधिकारियों को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।’’ 

अभी यह विवाद जारी ही था कि 14 जून को एक अन्य समस्या उठ खड़ी हुई जब केंद्र सरकार द्वारा सेना में युवाओं की भर्ती के उद्देश्य से पेश की गई ‘अग्निपथ’ योजना के विरुद्ध युवाओं के विरोध प्रदर्शन ने 16 जून को देश भर में हिंसक रूप लेकर एक दर्जन से अधिक राज्यों को अपनी चपेट में ले लिया। इस दौरान बड़ी संख्या में सार्वजनिक सम्पत्ति को क्षति पहुंचाई गई। हालांकि युवाओं के भारी विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार ने 16 जून को देर रात ‘अग्निपथ’ योजना में वर्ष 2022 की भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 21 वर्ष से बढ़ाकर 23 वर्ष कर दी पर युवाओं का रोष अभी समाप्त नहीं हुआ। 

17 जून को भी बिहार, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा आदि सहित देश के 15 राज्यों में प्रदर्शन, ट्रेनों और बसों में तोड़-फोड़ व आगजनी की घटनाएं हुईं। तेलंगाना और बिहार में 2 लोगों की मौत भी हुई है। सेना में भर्ती को लेकर ही नहीं, रेलवे में भी लंबे समय से भर्ती न होने के विरुद्ध युवाओं में रोष व्याप्त है। इसी सिलसिले में 16 जून को ही युवाओं ने नांगलोई स्टेशन पर रेलगाडिय़ां रोकीं तथा भारी प्रदर्शन किया। 

भारतीय रेलवे के अनुसार 2 दिनों में आंदोलन के कारण 94 मेल एक्सप्रैस ट्रेनें और 140 यात्री ट्रेनें रद्द कर दी गईं। 65 मेल एक्सप्रैस और 30 पैसेंजर ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द किया गया। 11 मेल एक्सप्रैस ट्रेनों के मार्ग में परिवर्तन किया गया। 300 से अधिक ट्रेनें प्रभावित हुई हैं और 12 रेलगाडिय़ों को आग के हवाले भी किया गया। 

असंतोष की एक चिंगारी असम में भी सुलग रही है। वहां ‘अखिल भारतीय महिला सम्मेलन’ की कार्यकारी सदस्य चंद्र प्रभा पांडे द्वारा ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ कार्यक्रम में कलिम्पोंग जिले के नेपाली कलाकारों को कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए निमंत्रित करने के बाद इससे पलट जाने और नेपाली भाषा में किसी भी कार्यक्रम की प्रस्तुति पर प्रतिबंध लगा देने से भारत में रहने वाले गोरखा समुदाय में रोष फैल गया है। 

चंद्र प्रभा पांडे के इस स्पष्टीकरण कि ‘‘भारत की भाषा न होने के कारण नेपाली में गाया राष्ट्र गान कार्यक्रम में नहीं पेश किया जा सकता’’ के जवाब में ‘भारतीय गोरखा परिषद’ (बी.जी.पी.) की युवा शाखा के महासचिव रमेश बस्तोला ने कहा है कि ‘‘नेपाली भाषा/ गोरखा भाषा भारत की राष्ट्रीय भाषाओं में से एक है और इसे भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त है। अत: यदि चंद्रप्रभा पांडे ने इस बारे माफी न मांगी तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।’’ 

बेशक उत्तर प्रदेश में जुमे की नमाज पर 17 जून को कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई पर ‘अग्निपथ’ व अन्य मुद्दों पर आक्रोश जारी है। कुल मिलाकर इस समय देश एक अशांत वातावरण से गुजर रहा है तथा अनेक स्थानों पर रेल एवं सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। इस स्थिति का मुख्य कारण धार्मिक संकीर्णता और बेरोजगारी है। अत: जितनी जल्दी सरकार ये समस्याएं सुलझाएगी उतना ही अच्छा होगा तथा देश का माहौल शांत होगा।—विजय कुमार 


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