गंभीर रूप धारण कर रहा सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों का धंधा

2021-07-09T06:35:28.187

देश में सरकारी जमीनों पर बड़ी सं या में अवैध कब्जे हो रहे हैं। चाहे पंचायती जमीन हो या शहरी, समाज विरोधी तत्व और भू-माफिया धन-बल के प्रभाव से अवैध कब्जों का सिलसिला जारी रखे हुए हैं जिसमें अन्यों के अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल पाए जा रहे हैं। अवैध कब्जों के हाल ही के चंद उदाहरण निम्र में दर्ज हैं : 

* 24 जून को राजस्थान के भीलवाड़ा में नगर विकास ट्रस्ट की अवैध रूप से कब्जाई गई जमीन पर किए गए निर्माण को गिराने गए तहसीलदार को एक राजनीतिक पार्टी के नेता ने धमकी दी जिसके विरुद्ध पुलिस में शिकायत की गई है।
* 1 जुलाई को मध्य प्रदेश के शिवपुरी में वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से दुकान के निर्माण के विरुद्ध शिकायत दर्ज करवाई गई।
* 2 जुलाई को मध्य प्रदेश के मुरैना में रेत माफिया द्वारा च बल नदी के बीहड़ों में जमीन पर कब्जा किए जाने के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की गई।
* 4 जुलाई को उत्तर प्रदेश में ओरैया के डोडापुर गांव की प्रधान ‘आरती कबीर’ ने कुछ दबंगों पर पंचायत की जमीन, खेत, चारागाह, खाद के गड्ढïे, शामलात जमीन आदि पर अवैध कब्जे करने का आरोप लगाते हुए इन्हें मुक्त करवाने की अधिकारियों से गुहार लगाई। 

* 5 जुलाई को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले की ‘पंधरी’ ग्राम पंचायत की प्रधान ने पुलिस में लिखवाई शिकायत में कहा कि गांव की सरकारी जमीन श्मशानघाट, चारागाह, खेल का मैदान, कांजी हाऊस और पंचायत भवन आदि पर से अवैध कब्जे हटवाने के लिए जब उसने पुलिस से सहायता मांगी तो कब्जेदारों ने उसे परेशान करना शुरू कर दिया और उसके पति तथा ससुर को मारने की साजिश रच रहे हैं।

* 7 जुलाई को झारखंड के जमशेदपुर में कई जगह सरकारी जमीन पर कब्जा करके मकान और दुकानें बनाने के विरुद्ध शिकायत की गई।
* 7 जुलाई को उत्तर प्रदेश के नसीराबाद थाना क्षेत्र के ‘कुंवर मऊ’ गांव के तालाब पर 14 लोगों द्वारा अवैध कब्जे के विरुद्ध संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी गई है।
* 7 जुलाई को उत्तर प्रदेश में कन्नौज जिले के ‘पिपरोली’ गांव में लगभग 75 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का पता चलने पर अधिकारियों ने कब्जाधारियों को तत्काल कब्जा छोडऩे के आदेश दिए और ऐसा न करने पर उनके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की चेतावनी दी। 

* 7 जुलाई को उत्तर प्रदेश के कौशा बी जिले की अनेक ग्राम पंचायतों में ब्रिटिश काल में संचालित 390 स्कूलों की जमीन पर माफिया द्वारा अवैध कब्जा किए जाने की शिकायत करते हुए ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राजस्व अधिकारियों की मिली-भगत से इस जमीन पर कब्जा हो रहा है। अकेले हरियाणा के पानीपत जिले में कुल 34,971 एकड़ 7 कनाल और 4 मरला शामलात जमीन में से 5239 एकड़ अर्थात 15 प्रतिशत शामलात जमीन पर अवैध कब्जे हैं और इस जमीन के कब्जामुक्त न होने के कारण सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 16 करोड़ रुपए के राजस्व की हानि हो रही है।

पंजाब सरकार मोहाली में राजनीतिज्ञों और उनके सहायकों द्वारा 3700 एकड़ जमीन के कथित संदिग्ध सौदों की जांच कर रही है परंतु यह राज्य में 6 लाख एकड़ से अधिक जमीन पर अवैध कब्जों पर खामोश है।  बिहार के अधिकांश जिलों में सरकारी स्कूलों की हजारों एकड़ जमीन अवैध कब्जों की चपेट में है। कई स्थानों पर कब्जाधारियों ने पक्के निर्माण भी कर लिए हैं। उत्तराखंड व दिल्ली में भी बड़ी सं या में अतिक्रमण किए गए हैं। 

मध्य प्रदेश के ‘नरवर’ में अवैध कब्जों के चलते नगर के ऐतिहासिक तालाब का अस्तित्व मिट गया है और वहां अवैध कब्जाधारियों ने शॉपिंग कॉम्प्लैक्स का निर्माण कर दिया है। आरोप है कि समाज विरोधी तत्वों ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान कथित रूप से 80 करोड़ रुपए से अधिक के जलस्रोतों और अन्य सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे कर लिए हैं। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे के ये तो चंद उदाहरण मात्र हैं, वास्तव में अवैध कब्जों की सं या तो इससे कहीं अधिक है। 

इसी को देखते हुए ही सुप्रीमकोर्ट ने 7 जून, 2021 को हरियाणा सरकार और फरीदाबाद नगर निगम को अरावली के वन क्षेत्र में अवैध कब्जे हटाने का आदेश देते हुए कहा कि अवैध कब्जा करने वालों को कानून से राहत पाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस पर कार्रवाई भी शुरू हो गई है। अवैध कब्जे हटाने में विभिन्न सरकारों की उदासीनता को देखते हुए बॉ बे हाईकोर्ट ने अवैध निर्माणों के लिए मु बई नगर पालिका को फटकार लगाते हुए यह कटु टिप्पणी की है कि ‘‘ऐसा मालूम होता है कि राज्य की जमीनें कार्यपालिका (सरकार) के बाप का माल है।’’ 

कुछ स्थानों पर प्रशासन ने संंबंधित विभागों को अवैध कब्जे रोकने और पहले से किए जा चुके कब्जे हटाने की दिशा में काम करने के लिए कहा है और कुछ स्थानों पर कार्रवाई हो भी रही है, परंतु यह बहुत कम है और कब्जों की सं या बहुत अधिक। अत: संबंधित सरकारों को इस बारे अपनी मशीनरी को अधिक चुस्त करने तथा दोषियों को त्वरित और कठोरतम दंड देने की आवश्यकता है ताकि इस बुराई पर रोक लग सके।—विजय कुमार


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Chief Editor

vijay kumar

Recommended News