‘एम्स’ नई दिल्ली में 300 रुपए तक की जांचें मुफ्त करने का निर्णय

punjabkesari.in Saturday, May 21, 2022 - 06:44 AM (IST)

नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुॢवज्ञान संस्थान (एम्स) हमारा सबसे पुराना और सर्वश्रेष्ठï चिकित्सा संस्थान है जहां सब ओर से निराश विभिन्न रोगों से ग्रस्त सभी वर्गों के लोग इलाज करवाने के लिए देश के कोने-कोने से ही नहीं बल्कि विश्व भर से वहां आते हैं। चूंकि यहां बहुत से ऐसे रोगी भी पहुंचते हैं जिनके लिए थोड़ी सी रकम देना भी मुश्किल होता है, इसलिए संस्थान ने रोगियों को राहत देते हुए 300 रुपए तक की सभी जांच मुफ्त करने का फैसला किया है। 

एम्स में अब एक्सरे, अल्ट्रासाऊंड, हार्मोन की सारी जांच, अधिकतर ब्लड जांच, हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच, एफनेसी, बायोप्सी, लिवर फंक्शन, किडनी फंक्शन, मैमोग्राफी आदि मुफ्त हो गए हैं।हालांकि इस घाटे को पूरा करने के लिए संस्थान के प्राइवेट और डीलक्स वार्डों में शुल्क तथा प्राइवेट कमरों का किराया कुछ बढ़ा दिया गया है। इस संबंध में कुछ लोगों का कहना है कि यदि सी.टी. स्कैन, एम.आर.आई. और पैट स्कैन जैसे महंगे टैस्टों पर भी छूट दे दी जाए तो रोगियों को काफी हद तक राहत मिल सकती है। 

परंतु माहिरों का कहना है कि संस्थान द्वारा बड़ी संख्या में डाक्टरों और दूसरी सुविधाओं पर पहले ही भारी रकम खर्च करनी पड़ती है लिहाजा मुफ्त की सुविधाएं देने से इसके ऊपर और आर्थिक बोझ पड़ जाएगा जिससे एम्स के चरमरा जाने का खतरा पैदा हो सकता है। 

ऐसी स्थिति में हमारा स्वास्थ्य मंत्रालय इंगलैंड से काफी कुछ सीख सकता है। वहां स्वास्थ्य प्रणाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एन.एच.एस.) के अधीन है। जो विभिन्न संगठनों से प्राप्त आर्थिक सहायता से देश की स्वास्थ्य सेवाओं को धन उपलब्ध करवाती है जिससे ब्रिटेन में सभी ब्रिटिश नागरिकों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा दी जा रही है और ऐसा करने वाला ब्रिटेन दुनिया का एकमात्र देश है। 

माना कि भारत क्षेत्रफल व जनसंख्या के लिहाज से इंगलैंड से बहुत बड़ा देश है और डाक्टरों की उपलब्धता तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में हम उससे बहुत पीछे हैं, परंतु यदि हम चाहते हैं कि हमारे देश में भी लोगों को मुफ्त व उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सुविधा मिले तो हमें भी अपने देश की चिकित्सा प्रणाली में पर्याप्त धन की व्यवस्था करने के लिए इसकी संगठनात्मक क्षमता और कोष में वृद्धि करनी होगी।—विजय कुमार 


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