नेताओं द्वारा ‘जहरीले बयान’ देने का सिलसिला ‘लगातार जारी’

2021-08-26T03:39:12.917

हम लिखते रहते हैं कि हमारे माननीयों को हर बयान सोच-समझ कर ही देना चाहिए ताकि अनावश्यक विवाद पैदा न हों परंतु हमारे देश में विभिन्न राजनीतिक दलों के चंद छोटे-बड़े नेताओं द्वारा कटुतापूर्ण तथा ऊल-जलूल बयान देने का एक रुझान सा चल पड़ा है : 

* 30 जुलाई को बलिया के बैरिया से ‘भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह’ बोले, ‘‘समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ‘औरंगजेब’ के पदचिन्हों पर चल रहे हैं। जो अपने पिता का नहीं हुआ वह औरों का क्या होगा।’’ ममता बनर्जी बारे उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में राजनीतिक लंकिनी पैदा हो गई है जो गुंडों व सरकारी तंत्र की मदद से फिर सत्ता पर काबिज हो गई है।’’
* 3 अगस्त को ‘सपा नेता अबू आजमी’ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सबसे बड़ा माफिया बताते हुए कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश सरकार को अदालतें बंद करके वहां स्कूल-कालेज खोल देने चाहिएं।’’ 
 * 16 अगस्त को उत्तर प्रदेश के संभल से ‘सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क’ ने अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे को उचित ठहराया और इसकी तुलना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से करते हुए कहा, ‘‘तालिबान वहां की ताकत है। उनके नेतृत्व में अफगानी अमरीका से आजादी चाहते हैं।’’ 

* 19 अगस्त को त्रिपुरा में ‘भाजपा विधायक अरुण चंद्र भौमिक’ बोले, ‘‘यदि तृणमूल कांग्रेस के नेता अगरतला हवाई अड्डे पर पहुंचें तो भाजपा वर्करों को उन पर तालिबानी स्टाइल में हमला करना चाहिए।’’
 * 21 अगस्त को ‘केंद्रीय मंत्री राव साहब दानवे (भाजपा)’ बोले, ‘‘राहुल गांधी किसी काम के नहीं हैं, वह भगवान को समॢपत छुट्टी सांड की तरह हैं। ऐसा सांड जो भले ही किसी खेत में घुसकर फसल को खा जाए लेकिन किसान यह कह कर जानवर को माफ कर देता है कि उसे भोजन की जरूरत है।’’
 * 22 अगस्त को बंगाल ‘भाजपा के वरिष्ठ नेता व प्रदेश महासचिव सायंतन बसु’ ने ममता बनर्जी की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘कोलकाता के कालीघाट में (जहां ममता का निवास स्थान है) एक ‘लेडी तालिबान’ रहती है।’’ 

* 23 अगस्त को ‘पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा नेता बसन गौड़ा पाटिल यतनाल’ ने जब यह कहा, ‘‘वह पागल (राहुल गांधी) अफगानिस्तान में तालिबान के बारे में बात क्यों नहीं कर रहा?’’ तो इसके जवाब में ‘कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार’ ने बसन गौड़ा पाटिल यतनाल को पागल बताया। 
* 24 अगस्त को भोपाल से ‘भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर’ बोलीं, ‘‘महंगाई और कुछ नहीं कांग्रेस का दुष्प्रचार, कांग्रेसियों की मानसिकता और फोकट का प्रापेगैंडा है। ये लोग सिर्फ प्रचार करते हैं कि डीजल महंगा, पैट्रोल महंगा। ’’
इसके जवाब में ‘कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा’ ने कहा, ‘‘बाढ़ के लिए कांग्रेस जिम्मेदार, महंगाई के लिए नेहरू जी का भाषण जिम्मेदार, महंगाई से कष्ट हो तो अफगानिस्तान चले जाओ और अब प्रज्ञा ठाकुर कह रही है कि महंगाई कुछ नहीं यह कांग्रेस की मानसिकता ...जल्द ही इन सभी को पागलखाने भेजिए।’’ 

याद रहे कि कुछ समय पहले मध्य प्रदेश के ‘भाजपा नेता रामेश्वर शर्मा’ ने बाढ़ के लिए कांग्रेस को तथा प्रदेश की ‘चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग’ ने महंगाई के लिए प्रधानमंत्री नेहरू को जिम्मेदार ठहराया था और ‘कटनी भाजपा के जिलाध्यक्ष राम रत्न’ से लोगों ने महंगाई बारे सवाल पूछा तो राम रत्न ने उन्हें अफगानिस्तान जाने की सलाह देते हुए कहा था कि वहां पैट्रोल-डीजल के दाम कम हैं।  ये तो लगभग एक महीने के भीतर दिए बयान हैं इससे पहले भी नेताओं ने न जाने कितने ऐसे बयान देकर समाज में कटुता फैलाने की कोशिश की होगी। 

पहले तो हमारे नेतागण आपत्तिजनक बयान देते हैं और जब उन पर विवाद खड़ा होता है तो वे यह कह कर पल्ला झाड़ लेने की कोशिश करते हैं कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है जबकि आज के इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के युग में सब कुछ रिकार्ड हो जाता है। 
अत: मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक ही है कि आखिर इस तरह की बेलगाम बयानबाजी से अनावश्यक विवाद पैदा करके उन्हेें क्या मिलता है तथा इस पर कब और कौन लगाएगा लगाम! कहीं ऐसा तो नहीं कि ये नेतागण चर्चा में रहने के लिए यह सोच कर ऐसे बयान दे रहे हों कि :बदनाम भी होंगे तो क्या नाम न होगा!—विजय कुमार 


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Chief Editor

vijay kumar

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