इन कामों की वजह से सहना पड़ता है लोगों को अपमान

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आज के समय में हर व्यक्ति अपने जीवन में ऊंचाईयों को छुना चाहता है और इसके लिए वह बहुत मेहनत भी करता है। लेकिन कई बार जाने-अंजाने में उससे कुछ गलतियां हो जाती हैं, जिससे कि उसे दूसरों के सामने अपमान सहन करना पड़ता है। शास्त्रों में कही गई बहुत सी बातें ऐसी हैं जोकि आज के समय में भी लोगों को सही राह पर चलना सिखाती हैं। तो चलिए आज हम आपको शास्त्रों में बताई गई उन बातों के बारे में बताएंगे, जिसके कारण इंसान को अपमान सहन करना पड़ता है।   


शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि वाणी में अमृत और विष दोनों का वास होता है। यदि मनुष्य की वाणी पर विष का प्रभाव है, तो सामने वाला सुनते ही आग बबूला हो जाता है और यदि वाणी में अमृत का वास है तो आप अपने दुशमन को भी अपना प्रशंसक बना सकते हैं। ऐसे में वाणी पर संयम रखना अत्यंत जरूरी है। 

माता-पिता के लिए हर एक बच्चा उनकी जिम्मेदारी होता है, जोकि उन्हें पूरी ईमानदारी से निभानी चाहिए। उनका अच्छे से पालन-पोषण करना चाहिए और उन्हें अपने पैरों पर खड़े करना भी माता-पिता का फर्ज होता है। कभी भी बच्चों को लेकर अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। क्योंकि आज के समय में कोई भी आपके बच्चों को गलत रास्ते पर ले जा सकता है। ऐसी स्थिति में समाज में सिर्फ और सिर्फ आपका अपमान होता है।

जिस पल मनुष्य अपनी तुलना किसी और से करता है, उसी पल से उसका पतन शुरू हो जाता है। किसी से तुलना के करने पर वह केवल उसकी उपलब्धियों या तौर-तरीकों पर ही ज्यादा गौर करता है। हालांकि तुलना करते समय अक्सर व्यक्ति इस बात को भूल जाता है कि उस स्थान तक पहुंचने के लिए उसने कितनी मेहनत की होगी। जब व्यक्ति मेहनत की बजाय होड़ करना शुरू कर देता है तो वह स्वयं ही अपने नाश को निमंत्रण देना शुरु कर देता है। 

दान देना शास्त्रों में बड़ा ही पुण्य कार्य माना गया है। किसी धर्म विशेष से ऊपर उठकर हमेशा जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए, लेकिन दान करते समय हमें अपनी जेब का पूरा ख्याल रखना चाहिए। कई बार ऐसा होता है कि हम अपनी आर्थिक स्थिति की अनदेखी करते हुए अपनी क्षमता से अधिक दान करते हैं या उसका दिखावा करते हैं। ऐसे में हम खुद ही कई बार पैसों की किल्लत से जूझने लगते हैं और ऐसे में दूसरों के आगे हाथ फैलाने की नौबत तक आ जाती है। 

कहते हैं कि जब इंसान गलत संगत में पड़ जाता है तो उसकी छवि समाज में बहुत ही खराब हो जाती है। ज्ञानियों का मानना है कि गलत संगत एक कोयले की भांति होती है, जो गर्म होने पर हाथ जला देती है, तो वहीं ठंडा होने पर हाथ काले कर देती है। ठीक इसी तरह अगर हमारी संगत सही नहीं है तो हम चाहे कितने भी सही क्यों न हो समाज हमें गलत नजरों से ही देखेगा। 

कहते हैं कि हमें हर स्थिति में अपने जीवन साथी का आदर करना चाहिए। अमूमन लोग दूसरों के सामने अपनी पत्नी की आलोचना करते नजर आते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि कई बार दुष्ट प्रवृति के लोग इस स्थिति का लाभ लेकर आपका या आपके पार्टनर का गलत फायदा भी उठा लेते हैं।

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