रतलाम में BJP राष्ट्रवाद के भरोसे तो कांग्रेस को परंपरागत मतदाताओं का भरोसा

रतलाम: मध्यप्रदेश की रतलाम संसदीय सीट पर बीजेपी जहां राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने के फेर में है, वहीं कांग्रेस अपनी गढ़ कही जाने वाली इस सीट पर अपने परंपरागत मतदाताओं के भरोसे है। हालांकि गुजरात से सटी आदिवासीबहुल इस सीट पर अब भी विकास की कमी ही मूल मुद्दा है। रोजगार का अभाव, रुढ़िवादिता, पेयजल का संकट और स्थानीय आदिवासियों का मध्यप्रदेश के अलावा गुजरात के नजदीकी शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन के लिए भी ये क्षेत्र चर्चाओं में बना रहता है। कांग्रेस का गढ़ कही जाने वाली इस सीट पर इस बार पार्टी की प्रदेश इकाई के पूर्व अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया का मुकाबला बीजेपी प्रत्याशी गुमान सिंह डामोर से हो रहा है। इनके समेत इस सीट पर कुल नौ प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। प्रचार के आखिरी सप्ताह में भीषण गर्मी के बीच प्रत्याशियों और पाटिर्यों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।


इन दिग्गजों  ने की सभाएं
मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए स्टार प्रचारकों की आमसभाएं और मतदाताओं से घर घर जाकर संपर्क की रणनीति पर काम किया जा रहा है। भाजपा प्रत्याशी डामोर आंतकवाद के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक, राष्ट्रवाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर अपना चुनावी अभियान चला रहे हैं, तो कांग्रेस प्रत्याशी भूरिया परंपरागत तरीकों से प्रचार में जुटे हैं। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रतलाम में एक सभा को संबोधित कर चुके हैं, तो वहीं उनकी इस सभा के कुछ ही घंटों बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन मांग चुकी हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने-अपने दलों के प्रत्याशियों के लिए यहां जोर-शोर से प्रचार में जुटे हैं। रतलाम-झाबुआ संसदीय सीट में तीन जिलों के कुल आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं। रतलाम जिले की रतलाम सिटी, रतलाम ग्रामीण और सैलाना, झाबुआ जिले की झाबुआ, थांदला और पेटलावद तथा अलीराजपुर जिले की अलीराजपुर और जोबट सीटें इस संसदीय क्षेत्र में शामिल है।
 


 

वर्तमान में इनमें से पांच सीटों पर कांग्रेस और तीन पर भाजपा का कब्जा है। इस संसदीय क्षेत्र में कुल 18 लाख 36 हजार 833 मतदाता हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस सीट पर एक लाख आठ हजार 447 वोटों से जीत हासिल की थी, लेकिन महज एक साल के बाद भाजपा सांसद दिलीपसिंह भूरिया के निधन के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया इस सीट पर काबिज हो गए। रतलाम-झाबुआ संसदीय सीट आजादी के बाद से ही कांग्रेस की परंपरागत सीट मानी जाती रही है। कांतिलाल भूरिया लंबे समय से यहां का प्रतिनिधित्व कर रहे है। अब तक हुए तमाम लोकसभा चुनावों में से केवल दो बार यहां गैर- कांग्रेसी प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। इस सीट पर 19 मई को मतदान होना है।

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