गैर-पंजीकृत प्राइवेट सिक्योरिटी एजैंसियों पर कसा शिकंजा

जम्मू (बलराम सैनी): राज्य सरकार ने गैर-पंजीकृत प्राइवेट सिक्योरिटी एजैंसियों पर शिकंजा कसते हुए राज्य में ‘पसारा’ (प्राइवेट सिक्योरिटी एजैंसीज रैगुलेटरी एक्ट, 2015) को लागू करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने आदेश जारी किया है कि अब इस अधिनियम के तहत लाइसैंस शुदा प्राइवेट सिक्योरिटी एजैंसियों को ही राज्य के सरकारी, अद्र्ध सरकारी एवं निजी संस्थानों में सिक्योरिटी सेवाएं देने की अनुमति है। उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर के विभिन्न सरकारी, अद्र्ध सरकारी, बैंक, उद्योग एवं अन्य निजी संस्थानों में सिक्योरिटी गार्डों की बढ़ती मांग और इन गार्डों की दयनीय हालत के मद्देनजर सरकार ने वर्ष 2015 में प्राइवेट सिक्योरिटी एजैंसियों को कानून के अंतर्गत लाने का निर्णय लिया था। सरकार के प्रस्ताव पर विधानसभा एवं विधानपरिषद में पारित हुआ यह विधेयक ‘पसारा’ राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद कानून बना। 


‘पसारा’ कानून के अमल में आने पर राज्य सरकार ने विभिन्न प्राइवेट सिक्योरिटी एजैंसियों से लाइसैंस लेने के लिए आवेदन मांगे। इन आवेदनों की छानबीन के बाद निर्धारित मानदंडों पर उपयुक्त पाई गईं कुछ सिक्योरिटी एजैंसियों को अब गृह विभाग द्वारा लाइसैंस जारी किए गए हैं। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि राज्य में कार्यरत तमाम संस्थानों को लाइसैंस शुदा एजैंसियों से ही सिक्योरिटी सेवाएं लेने की इजाजत होगी और यदि कोई संस्थान गैर-पंजीकृत एजैंसी की सेवाएं लेता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। 


 
उल्लंघन पर केंद्र सरकार को भी लिखा पत्र
जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग ने राज्य में कार्यरत केंद्रीय संस्थानों (पी.एस.यू. समेत) द्वारा प्राइवेट सिक्योरिटी एजैंसीज रैगुलेटरी एक्ट, 2015 का उल्लंघन करके गैर-पंजीकृत सिक्योरिटी एजैंसियों को सिक्योरिटी के ठेके देने पर पत्र लिखा है। केंद्रीय श्रम मंत्रालय के सचिव को लिखे पत्र क्रमांक होम/पी.एस.ए.आर.ए./2019पी/09 में राज्य गृह विभाग ने कहा कि राज्य में कार्यरत केंद्रीय संस्थान केवल प्राइवेट सिक्योरिटी एजैंसीज रैगुलेटरी एक्ट, 2015 के तहत लाइसैंस शुदा एजैंसियों से ही सिक्योसिटी सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन देखने में आया है कि कुछ केंद्रीय पी.एस.यू. ऐसी प्राइवेट सिक्योरिटी एंड एलाइड सर्विसिज को ठेके दे रही हैं जो इस एक्ट के तहत लाइसैंस शुदा नहीं हैं। यह सीधे तौर पर 1 अप्रैल 2016 को जारी एस.आर.ओ. नंबर 113 एवं 114 का उल्लंघन है। इसलिए केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करे कि कोई भी संस्थान 1 जनवरी 2019 के बाद किसी गैर-पंजीकृत सिक्योरिटी एजैंसी की सेवाएं नहीं लेगा, अन्यथा राज्य सरकार नियमानुसार कार्रवाई करेगी। 


 
सरकार ने क्यों बनाया कानून
राज्य में पिछले कुछ समय के दौरान सरकारी, अद्र्ध सरकारी, निजी कार्यालयों, बैंकों, औद्योगिक इकाइयों, शैक्षणिक संस्थानों एवं निजी आवासों तक में प्राइवेट सिक्योरिटी गार्डों की तैनाती बढ़ी है। इसके चलते बहुत सी प्राइवेट सिक्योरिटी एजैंसियों ने अपने कार्यालय खोलकर ग्राहक संस्थानों एवं व्यक्तियों को अपनी सेवाएं देनी शुरू कर दीं। कुछ शिकायतें मिलने के बाद श्रम विभाग ने यह महसूस किया कि सिक्योरिटी एजैंसियों द्वारा खुद ग्राहक संस्थानों से मनमाने दाम वसूलने के बावजूद गार्डों को पर्याप्त वेतन नहीं दिया जा रहा। कई स्थानों पर सिक्योरिटी गार्डों को ई.पी.एफ. एवं ई.एस.आई. जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करवाई जा रहीं। इसलिए राज्य सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को कानूनी रूप देकर प्राइवेट सिक्योरिटी एजैंसियों को नियमित करने का निर्णय लिया। 
 

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