शिक्षा विभाग 3 दिन में लिखित में जारी करें ऑर्डर

शिमला (अम्बादत्त): शिक्षा विभाग निजी स्कूलों के प्रति किए गए वायदों को लिखित में 3 दिन के भीतर ऑर्डर जारी करे। शिक्षा विभाग से लिखित में ऑर्डर न मिले तो छात्र अभिभावक मंच निदेशक का घेराव करेगा। उल्लेखनीय है कि शनिवार को छात्र अभिभावक मंच और निदेशक उच्चतर शिक्षा के बीच लगभग 2 घंटे तक निजी स्कूलों द्वारा की जा रही लूट के खिलाफ बातचीत हुई। इस बैठक में शिक्षा निदेशक ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मंच के संयोजक विजेंद्र ने कहा है कि उनका आंदोलन मुख्यता स्कूलों द्वारा ली जा रही भारी-भरकम फीसों के खिलाफ है। इसलिए आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि छात्रों व अभिभावकों को आर्थिक राहत नहीं मिलती है। उन्होंने कहा कि आंदोलन की इस कड़ी में निदेशक कार्यालय का चौबीस घंटे घेराव व निजी स्कूलों के बाहर प्रदर्शन आदि शामिल है।

मंच अपने मांग पत्र को लेकर शीघ्र ही शिक्षा मंत्री और प्रधान सचिव शिक्षा से मिलेगा। प्राइवेट कालेजों व विश्वविद्यालयों को संचालित करने के लिए बने स्टेट रैगुलेटरी कमीशन की तर्ज पर प्राइवेट स्कूलों को संचालित करने के लिए भी रैगुलेटरी कमीशन बनाया जाए, जिसमें अभिभावकों को भी उचित स्थान मिले। मंच ने चिंता व्यक्त की है कि सरकार को सत्ता में आए एक वर्ष बीत चुका है, परंतु शिक्षा के अधिकार कानून 2009 के तहत आज तक राज्य सलाहकार परिषद का गठन भी नहीं हो पाया है। शिक्षा विभाग की वैबसाइट पर पिछली सरकार के समय बनी राज्य सलाहकार परिषद भी अपडेट नहीं हो पाई है। इसी से स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार शिक्षा को लेकर कितनी गंभीर है।

निजी स्कूलों पर अधिनियम लागू करे सरकार

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी लूट व भारी-भरकम फीसों के संचालन के संदर्भ में निजी स्कूल अधिनियम 1997 और इसके तहत वर्ष 2003 में बने नियमों तथा वर्ष 2016 के प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों को तुरंत लागू किया जाए। अभिभावक मंच ने कहा है कि प्रदेश उच्च न्यायालय के जस्टिस तरलोक सिंह चौहान द्वारा वर्ष 2016 में दिए गए आदेशों के बिंदु 56 से 65 तक स्पष्ट रूप से प्राइवेट स्कूलों की लूट पर रोक लगाने की बात कही गई है, परंतु सरकार ने इसे लागू नहीं किया। इसी आदेश में उन्होंने साफ लिखा है कि जो स्कूल इस आदेश की अवहेलना करते हैं, उन पर कंटैम्प्ट ऑफ कोर्ट का मुकद्दमा दायर किया जाए।

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